पिंजौर, 26 फरवरी (निस)। नेशनल हाईवे अथारिटी (एनएचएआई) द्वारा पिंजौर-परवाणू बाईपास का निमार्ण कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है पिंजौर के गांव घाटीवाला के पास बाईपास के उपर से भाखड़ा ब्यास मैनजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की सलापड़ा हिमाचल प्रदेश से पानीपत के लिए जा रही 400 के.वी. की बड़ी टॉवर लाईन की तारों की ऊचांई सड़क से बेहद कम होने के कारण यहां पर दुर्घटना का खतरा बना हुआ था इसी समस्या को उजागर करने के लिए विगत 26 जनवरी को दैनिक ट्रिब्यून ने उक्त खबर को प्रमुखता से छापा था जिस खबर का असर हुआ और एनएचएआई सहित बीबीएमबी सहित दिल्ली तक के अधिकारी हरकत में आ गए यहां का सर्वे कर सामने आ रही समस्या के समाधान के लिए फोरलेन सड़क के बीचों-बीच केवल तारों के नीचे लगाए गए लोहे के डिवाईडरों को निकाल दिया गया। बीबीएमबी के अधिकारिक सूत्रों के अनुसारं खबर छपने के बाद मामला चीफ इंजीनियर तक पहुंचा। पूरे मामले की जांच के लिए दिल्ली से एक टीम को भेजा गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार तारों के नीचे लगाए लोहे के डिवाईडरों में बिजली करंट का हलका झटका लगता था। यहां पर हाथ लगाने से कुछ लोगों को करंट भी लगा था। चार लाख वोल्ट जब तारों में बहती है तो उसका चुंबकीय क्षेत्र बन जाता है और इंडक्शन द्वारा करंट आ जाता है इसलिए लगभग 20 मीटर की दूरी को सुरक्षित माना जाता है और कम से कम तारों से 18 फुट की दूरी होनी आवश्यक है।
बीबीएमबी ने बड़े टॉवर लगाकर तारों को सुरक्षित दूरी पर लगाया हुआ है लेकिन बाईपास निर्माण कंपनी ने सड़क को आसपास की भूमि से लगभग 10 फुट उंचा उठाकर बनाया है जिससे तारों की दूरी कम हो गई है। केवल इतना ही नहीं उंचे कंटेनर ढोने वाले बड़े ट्रकों के लिए अभी भी उक्त तारें खतरा बनी हुई है लेकिन विभाग इसे कम खतरे वाला मानता है।
अधिकारियों ने बताया कि कमजोर दिल वाले व्यक्ति के लिए उक्त करंट का झटका जानलेवा हो सकता है जबकि बरसात में यह खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए लगभग 100 फुट लंबे लोहे के डिवाईडरों को हटा दिया गया और इससे कुछ मीटर दूरी पर अन्य 66 केवी तारों के नीचे से भी डिवाईडरों को हटा दिया गया है।
बीबीएमबी मैनेजमेंट अधिकारियों ने उक्त तारों के नीचे सुरक्षा के लिए लकड़ी या सिमेंट के डिवाईडरों को लगाने का सुझाव एनएचएआई को दिया है। फिलहाल उक्त स्थान पर कोई डिवाईडर नहीं है।