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चंडीगढ़, 20 सितम्बर। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश ङ्क्षसह बादल ने कहा है कि देश मध्यावधि चुनावों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार अपनी मुख्य सहयोगी पार्टियों की अंदरूनी कलह और बेभरोसगी के कारण अपने वजन से ही गिर जाएगी। मुख्यमंत्री आज चंडीगढ़ में आयोजित प्रमुख सचिवों (सहकारिता) के राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
मुख्यमंत्री के कहा कि यूपीए की सहयोगी पार्टियों में मुख्य मुद्दों को लेकर फूट बढऩे के कारण देश की राजनीतिक हालात बड़े नाजुक बने हुए हैं। इस कारण लोकसभा चुनाव समय से पूर्व होने की पूरी संभावना है। बादल ने स्पष्ट तौर पर कहा कि केंद्र में यूपीए सरकार में पैदा हुई अस्थिरता का राष्ट्रीय स्तर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है जिससे आम आदमी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि यूपीए सरकार ने आम आदमी की शुभङ्क्षचतक होने का दावा करके सत्ता हासिल की थी पंरतु अब जनविरोधी नीतियां अपनाकर समाज के इस अहम तबके को सिरे से नकार दिया हैं। एक सवाल के जवाब में बादल ने कहा कि विरोधी पार्टियों द्वारा किए गए देश बंद के आह्वान पर लोगों ने पूरा समर्थन दिया है, जो इस बात का प्रतीक है कि यूपीए सरकार के कुप्रबंधन के खिलाफ लोगों के मनों में रोष है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में केंद्र द्वारा डीजल के मूल्यों में बढ़ोतरी करने और एलपीजी गैस सिलेंडरों की घरेलू खपत करने के लिए सीमा निर्धारण के फैसलों ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है। साथ ही, उन्होंने कहा कि परचून क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी से देश का छोटा व्यापारी बर्बाद हो जाएगा। यूपीए सरकार के फैसलों को जनविरोधी, किसान विरोधी और गरीब विरोधी करार देते हुए बादल ने कहा कि देशवासी यूपीए सरकार के कुप्रशासन से तंग आ चुके हैं और आगामी लोकसभा चुनावों में इस गठजोड़ को बाहर का रास्ता दिखाएंगे।
कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि इस पार्टी ने अपने विरोधी राज्यों विशेषकर पंजाब से हमेशा ही सौतेला व्यवहार किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से जुड़े केंद्रीय मंत्री मनमर्जी से केंद्रीय ग्रांटों और अन्य प्रोजेक्ट अपने राज्यों में ले जा रहे हैं जबकि दूसरे राज्यों को केंद्र फंडों का अपना बनता हिस्सा भी नहीं मिल रहा है। बादल ने केंद्र के इस रवैये की कठोर आलोचना करते हुए कहा कि इससे राज्य केंद्रीय फंडों से वंचित रह जाते हैं, जिसका विकास पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता हैं।