छुटकारा !    कविताएं !    देख! तेरे संसार की हालत... !    गोद लेने वालों की पसंद : बेटियां !    स्कूली दिनों में तंग किया जाता था मुझे : निकी !    रोजगारोन्मुखी शिक्षा सरकार की प्रतिबद्धता : बाली !    काम ही से पहचान : यामी !    पृथ्वीराज : अभिनय की बात करो !    बहुत कुछ रखा है नाम में !     क्वेश्चन क्लब !    

रोचक जानकारी : तरह-तरह के घोंसले

Posted On September - 9 - 2012

मनुष्य जिस प्रकार तरह-तरह के मकान बनाकर रहता है उसी प्रकार विभिन्न आकार-प्रकार के घोंसले पक्षी भी बनाते हैं। कुछ पक्षी घोंसले बनाते ही नहीं। वे या तो बगैर घोंसलों के काम चलाते हैं या फिर दूसरे पक्षियों के घोंसलों से ही अपना काम चला लेते हैं।

आइए, कुछ घोंसलों के बारे में जानें :
चील का घोंसला : चील का आकार-प्रकार बड़ा होता है। चील अपना घोंसला अधिकतर पानी के किनारे लगे हुए ऊंचे वृक्ष पर बनाती है। देखा गया है कि यह ताड़ के वृक्षों पर ज्यादातर घोंसला बनाना पसंद करती है। घोंसला बनाने के लिए जो सामग्री चाहिए उसे नर तथा मादा दोनों मिलकर एकत्रित करते हैं। चील के घोंसले में सूखी छोटी-छोटी टहनियां, लकडिय़ां, घास-फूस और सेमल की रूई नजर आती है। ‘वाल्ड ईगल’ का घोंसला बहुत बड़ा होता है।
मैना का घोंसला : मैना अधिकतर घरों में चाहे जहां अपना घोंसला बना लेती है। कभी-कभी पेड़ों पर भी घास-फूस और तिनकों से साधारण नीम, आम आदि के वृक्षों पर घोंसला तैयार करती है। मैना के घोंसले देखने में अधिक सुंदर या आकर्षक नहीं होते लेकिन इनके घोंसले बनाने में कुछ न कुछ कलाकारी तो जरूर नजर आती है।
बाज का घोंसला : बाज के घोंसले हमेशा बहुत ऊंचे-लंबे वृक्षों पर ही देखे जाते हैं। इसे सुंदर और खूबसूरत घोंसला बनाना नहीं आता। यह सामान्यत: झाड़ और सूखी लकडिय़ों से अपना घोंसला बनाता है। कभी-कभी इनके घोंसलों में नुकीली लकडिय़ां भी होती हैं जिससे  इनके घोंसलों पर कोई शत्रु एकदम से आक्रमण करने या झपट्टा मारने का साहस नहीं कर पाता। ऐसा भी देखा जाता है कि जिस वृक्ष पर बाज अपना घोंसला बनाता है उस पेड़ पर कोई दूसरा पक्षी अपना घोंसला नहीं बनाता। शायद इस कारण कि बाज से सभी छोटे पक्षी भयभीत रहते हैं।
सारस का घोंसला : सारस का घोंसला पेड़-पौधों पर नहीं होता। यह अपना घोंसला जमीन पर नदी, तालाब या पानी वाली जगह के नजदीक बनाता है। सारस अपनी चोंच से जमीन में गड्ढा करके घास-फूस और तिनके जमा कर लेता है। घास-फूस, तिनकों और फालतू वस्तुओं से बने घोंसले में अंडे देता है। सारस अपने घोंसले में प्राय: दो अंडे देता है परंतु इन अंडों में केवल एक अंडे से ही बच्चा निकलता है जबकि दूसरा अंडा खराब या निरर्थक निकल जाता है। इसलिए सामान्यत: आपने देखा होगा कि नर तथा मादा जोड़े के साथ सिर्फ एक बच्चा होता है। सारस के घोंसले को देखकर किसान लोग वर्षा का अनुमान लगाते हैं। यदि ऊंचे टीले पर सारस अपना घोंसला बनाता है तो खूब वर्षा होती है और यदि सारस अपना घोंसला निचली सतह पर बनाता है तो वर्षा कम होती है।
पपीहा का घोंसला : पपीहा अपना घोंसला ऊंचे-ऊंचे वृक्षों पर ही बनाना पसंद करता है। वह अपने इन घोंसलों में अंडे देता है। इस पक्षी के अंडे नीले रंग के होते हैं। इस पक्षी की एक मजेदार आदत है-यह मौका देखकर चरख पक्षी के घोंसले में अपने अंडे रख आता है। चरख इन अंडों को अपना समझकर सेता है मगर जब अंडों से बच्चे निकलते हैं तब उसे वास्तविकता का ज्ञान होता है। बच्चे उडऩे लायक होते हैं और फुर्र से उड़ जाते हैं। कुछ लोग ऐसा भी मानते हैं कि पपीहा पक्षी घोंसला नहीं बनाता, वह सिर्फ ‘चरख’ पक्षी के घोंसले में मादा को अंडे देने को भेज देता है।
कौए का घोंसला : कौए का घोंसला पेड़ों की सबसे ऊंची डाल पर होता है। कौए को घोंसला बनाना नहीं आता, इसीलिए इनके घोंसले बेतरतीब ढंग से बने होते हैं जिनमें घास-फूस, रूई, तिनके और पत्ते आदि पाए जाते हैं। कौए का घोंसला भी देखने में आकर्षक नहीं लगता। बस, इतना जरूर है कि इसका घोंसला सामान्यत: बड़ा होता है। कौआ चालाक पक्षी है यह कभी-कभी कोयल के घोंसले में अपने अंडे रख आता है। कोयल बड़े मजे से अंडों को सेती है। मगर जब अंडों से उसके बच्चों की जगह कौए के बच्चे निकलकर फुर्र हो जाते हैं।
बया का घोंसला : बया पक्षी का घोंसला सबसे सुंदर और आकर्षक होता है। इसलिए बया को ‘कुशल शिल्पी’ माना जाता है। यह घोंसला प्राय: नर बया ही तैयार करता है। वह चाहता है कि उसके घोंसले को देखकर मादा बया आकर्षित हो। नर बया घोंसले के नजदीक एक झूला भी बनाता है जिस पर मादा मौज-मस्ती में फुदकती नजर आती है।
पीलक का घोंसला : पीलक पक्षी भी अपना घोंसला ऊंचे वृक्षों पर नर तथा मादा के सहयोग से बनाता है। घास-फूस, तिनकों से बना यह घोंसला दो शाखाओं के बीच झूले जैसा दिखायी देता है।
मोर का घोंसला : मोर का घोंसला भी झाडिय़ों में होता है। घास-फूस से बने घोंसले में मोरनी 3 से 5 अंडे तक देती है। इनके घोंसले भी सामान्यत: नदी, तालाब, पोखर, झरनों के नजदीक पाए जाते हैं।
पत्रिंका का घोंसला : यह अपना घोंसला मिट्टी के अंदर सुरंग बनाकर जमीन में ही तैयार करता है। इस सुरंग में दो जगह होती हैं—एक जहां पर मादा पत्रिंका अंडे देती है और दूसरी जगह स्वयं नर पत्रिंका रहता है। मादा पत्रिंका एक बार में 4 से 7 अंडे देती है।
                                                                                                                                        -ऋषि मोहन श्रीवास्तव


1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...
Share |
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

समाचार में हाल लोकप्रिय

  • मौसम

    Delhi, India 28 °CClear
    Chandigarh, India 30 °CPartly Cloudy
    Ludhiana,India 30 °CPartly Cloudy
    Dehradun,India 28 °CHaze

क्रिकेट

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.