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श्रम विभाग ने अपनाया बातचीत का रास्ता, परिणाम सकारात्मक

Posted On September - 28 - 2012

गुडग़ांव, 28 सितंबर (हप्र)। होण्डा और मारुति सुजुकी मानेसर प्लांट में पूर्व में हुई बड़ी श्रमिक घटनाओं को ध्यान में रखकर श्रम विभाग द्वारा दोनों-तीनों पक्षों के बीच तुरंत बातचीत का रास्ता अपनाए जाने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुआ है। इससे श्रम अदालत में भी मामले घटे हैं।  प्राप्त जानकारी के अनुसार हाल ही में उपजे रिको कंपनी के श्रमिक विवाद को अतिरिक्त श्रमायुक्त  नरेश नरवाल के  हस्तक्षेप से सुलझा लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह मामला त्रिपक्षीय विवाद का था, जिसमें कंपनी प्रबंधन तथा श्रमिकों की दो यूनियन शामिल थी। श्रमिकों की पुरानी यूनियन ने चुनाव घोषित किए थे, जिसे नई यूनियन ने स्वीकार नहीं किया। इससे उत्पन्न स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कंपनी प्रबंधन ने 18 श्रमिकों को निलंबित कर दिया था, जिसके कारण कंपनी में तनाव हो गया और वहां पर कानून व्यवस्था की स्थिति भी बिगडऩे का भय हो गया था।
गुडग़ांव की मुख्य श्रमिक यूनियनों के प्रतिनिधियों ने अतिरिक्त श्रमायुक्त से इस विवाद को हल करवाने का आग्रह किया, जिस पर श्री नरवाल ने विवाद में शामिल तीनों पक्षों को बुलवाकर उनकी सहमति बनवाई और मामले को हल करवा दिया। श्रमिक  यूनियन के चुनाव के लिए रिटर्निंग अधिकारी तथा पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए और शान्तिपूर्ण ढंग से चुनाव संपन्न हुआ। इसके बाद निलंबित कर्मियों को भी वापस कंपनी में ले लिया गया।
उन्होंने बताया कि ईस्टर्न मेडिकिट कंपनी के विवाद को भी सुलझाने के प्रयास किए गए। कंपनी प्रबंधन तथा श्रमिकों के बीच विवाद का समाधान ढूंढऩे के लिए श्रम अधिकारी, उप श्रमायुक्त, अतिरिक्त श्रमायुक्त तथा उपायुक्त की अध्यक्षता में कई बैठकें  करवाई गई। कंपनी प्रबंधन, जो समझौता करने में आनाकानी कर रही थी, को अतिरिक्त श्रमायुक्त द्वारा वारंट भेजकर बुलवाया गया। प्रबंधन के आग्रह पर श्रमिकों के प्रतिनिधियों तथा प्रबंधन के बीच हरियाणा भवन दिल्ली में बैठक आयोजित करवाई गई, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने विवाद को सुलझाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। प्रबंधन का कोई भी व्यक्ति जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हुआ और वे एक-दूसरे पर जिम्मेदारी को टालते रहे। इसके बाद श्रम विभाग ने कंपनी के उच्च प्रबंधन के खिलाफ स्थानीय न्यायालय में लगभग 50 चालान दाखिल किए और राज्य सरकार से लॉक-आउट को अवैध घोषित करवाया। यही नहीं, यह मामला श्रम न्यायालय को भी भेज दिया गया है।
कंपनी के श्रमिकों ने श्रम विभाग की इस कार्रवाई पर अपना संतोष जताया है और कहा है कि वे किसी प्रकार की अहिंसक गतिविधियों में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि हरसौरिया, सीनियर इंडिया लिमिटेड, पराशा, ऊषा अमरफोर्स आदि के पुराने विवादों को अतिरिक्त  श्रमायुक्त के स्तर पर हल करवाया गया है और श्रमिकों ने श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर संतोष व्यक्त किया है। इनके अलावा, विभिन्न फैक्टरियों जैसे मुंजाल शोवा, हाईलैक्स इंडिया लिमिटेड, हेमा इंजीनियरिंग रेवाड़ी, यूनाइटेड ब्रेवरीज रेवाड़ी, इंडिया निपोन, शुभम ऑटो, कैरियर इंडिया, एम टैक ऑटो आदि के धारा 2केके अंतर्गत दिए गए डिमांड नोटिस के मामलों का भी कंपनी प्रबंधन तथा श्रमिकों की सहमति से निपटारा करवाया गया।


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