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जहां खेलें केवल महिलाएं होली

Posted On March - 26 - 2013

राजिन्दर पाल कौर
रंग किसे अच्छे नहीं लगते? इसीलिए तो फाल्गुन में हर कहीं रंगों की बात होती है। हाट-हाट में रंग भरी पिचकारियां और प्रकृति के रंगों की छटा के तो कहने की क्या? भारत में हर कोई इन रंगों से खेलता है, लेकिन भारत के बाहर कई ऐसे देश हैं जहां केवल स्त्रियां ही होली खेलती हैं।
स्वीडन के पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाएं होली का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाती हैं। औरतें लकडिय़ां लेकर पहाड़ी पर पहुंच कर लकडिय़ों का बड़ा ढेर लगाकर उसमें आग लगाती हैं। जब तक अग्नि ठंडी नहीं होती वे उसके सामने नाचती रहती हैं। फिर अग्नि ठंडी होने के बाद एक-दूसरी के ऊपर रंग डालती हैं।
थाईलैंड में होली का त्योहार पहली अप्रैल से सात अप्रैल के मध्य मनाया जाता है तथा महिलाएं इस दिन भगवान बुद्ध की पूजा करती हैं। उस समय जो भी साधु सामने आता है उसके पैर धोकर उसे गुलाल का टीका लगाकर खाना खिलाती हैं। यह सिलसिला पांच बजे तक चलता रहता है। इसके बाद एक-दूसरे के घर जाकर रंग डालती हैं।मिस्र में भी यह त्योहार मार्च महीने में मनाया जाता है। महिलाएं रंगों से भरी बाल्टियां व पिचकारी लेकर छत पर चढ़ जाती हैं तथा नीचे जाने वाले पथिकों पर रंग डालती हैं।
फ्रांस में इस दिन यहां पति का चुनाव किया जाता है। औरतें घास-फूस इकट्ठा करके एक सुनसान जगह पर जाकर उसे आग लगाकर अपने देवता की पूजा करती हैं। विवाह करवाने के लिए पुरुष वहां धूमधाम से पहुंचते हैं, उनकी तरफ औरतें बड़ी-बड़ी फूलमालायें फेंकती हैं। जिस आदमी पर जिस औरत की माला डल जाये वह उसका पति होता है। बाद में सारे जोड़े रंग खेलते व ढोल बजाते हुए घर वापस आते हैं। इटली में केवल स्कूल व कालेज की लड़कियां ही होली खेलती हैं। वे जून के मध्य में यह उत्सव मनाती हैं। इस दिन कोई भी लड़की स्कूल या कालेज नहीं जाती। इस रोज इटली की सड़कें बहुत रंगीन होती हैं। इस उत्सव को वहां ‘कलाऊ’ के नाम से जाना जाता है।
बर्मा में यह त्योहार ‘तेचा’ के नाम से प्रसिद्ध है। पूरे बर्मा में लड़कियां व औरतें मंदिरों में जाकर अपने-अपने देवताओं की पूजा करती हैं तथा एक-दूसरी पर रंग डालती हैं। शाम को सभी लड़कियां अच्छी-अच्छी मिठाई बनाकर एक-दूसरी को दावत देती हैं।
बर्तानिया स्थित कुछ स्थानों लीवरपूल, साउथहैम्पटन, समरसैट लीड्स, बर्मिंघम तथा मैनचेस्टर में महिलाओं द्वारा होली के दिन गीत-संगीत का सामूहिक आयोजन किया जाता है। महिलाएं सूखे रंग का प्रयोग करती हैं। पोलैंड में अलग प्रकार की होली मनाई जाती है। होली से एक हफ्ता पहले सभी महिलाओं को सूचित किया जाता है। फिर उस जगह पर महिलाएं नगाड़ों की ताल पर नाचती-गाती हैं और दो अढ़ाई घंटे के प्रोग्राम के बाद पूरे नगर की परिक्रमा करते हुए सभी महिलाओं को रंग से रंग देती हैं। खाने-पीने का प्रोग्राम अगले दिन रखा जाता है, जिनमें महिलाएं एकत्र होकर एक-दूसरी के घर जाती हैं।


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