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पूर्व महानिदेशक ने माना-अपात्र प्रत्याशियों की हुई भर्ती

Posted On April - 23 - 2013

समालखा, 23 अप्रैल (निस)। भवन निरीक्षक भर्ती घोटाले की जांच में शहरी स्थानीय विभाग के तत्कालीन महानिदेशक व हरियाणा राज्य कर्मचारी चयन आयोग के अधीक्षक लोकायुक्त के समक्ष चंडीगढ़ में पेश हुए। इस दौरान तत्कालीन महानिदेशक ने लिखित में स्वीकारा की, उन्होंने गजट नोटिफकेशन जारी होने के बावजूद सिविल इंजीनियरों की बजाय मकैनिकल इंजीनियरों को भवन निरीक्षकों के पद पर नियुक्त किया। लोकायुक्त ने तत्कालीन महानिदेशक व हरियाणा राज्य कर्मचारी चयन आयोग के अधीक्षक को 13 अगस्त को दोबारा तलब किया है।
आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने बताया कि उन्होंने 4 मार्च, 2012 को लोकायुक्त हरियाणा जस्टिस प्रीतम पाल को 72 भवन निरीक्षकों की भर्ती में हुए घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि हरियाणा सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाकर भवन निरीक्षकों के पद पर अपात्र व्यक्तियों को नियुक्त कर दिया गया। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने प्रदेश की विभिन्न नगर पालिकाओं, नगर परिषदों में 72 भवन निरीक्षकों की नियुक्तियां नवंबर 2010 में की। आरोप है कि 72 में से 69 अपात्र व्यक्तियों को नियुक्त कर दिया गया। कपूर ने बताया कि हरियाणा सरकार ने 24 सितंबर, 2010 को गजट नोटिफकेशन जारी करके भवन निरीक्षक के पद के लिए सिविल इंजीनियरिंग में 3 वर्षीय डिप्लोमा की शैक्षणिक योग्यता तय की थी। इसमें स्पष्ट लिखा था कि सिविल इंजीनियर के अलावा अन्य किसी को भवन निरीक्षक के पद पर नियुक्त न किया जाए। लेकिन इन आदेशों के बावजूद 72 पदों में से 69 पर मेकैनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक अपात्र को नियुक्ति पत्र थमा दिया गया। कपूर ने बताया कि प्राथमिक जांच में उनके आरोपों की पुष्टि होने पर लोकायुक्त ने शहरी स्थानीय विभाग के तत्कालीन महानिदेशक डा. महावीर सिंह को नोटिस जारी कर 12 अप्रैल तक स्पष्टीकरण देने व पेश होने के आदेश दिए थे। तत्कालीन महानिदेशक ने अपने लिखित स्पष्टीकरण में बताया कि 5 दिसंबर, 2008 को शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने भवन निरीक्षकों के 72 पदों के चयन के लिए हरियाणा राज्य कर्मचारी चयन आयोग से आग्रह किया था। उस वक्त निकाय विभाग के भर्ती नियमों के अनुसार भवन निरीक्षक के पद के लिए सिविल व मेकैनिकल इंजीनियरिंग में तीन वर्षीय डिप्लोमा की शैक्षणिक योग्यता निर्धारित थी। कर्मचारी चयन आयोग ने 11 फरवरी, 2009 को नियुक्तियों के लिए विज्ञापन दिया व 22 सितंबर 2010 को चयन सूची तैयार करके निकाय विभाग को सौंप दी। लेकिन इसी बीच 24 सितंबर,  2010 हरियाणा सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी करके भवन निरीक्षकों के पद पर नियुक्ति की पात्रता में संशोधन कर दिया। संशोधित पात्रता के अनुसार उक्त पद पर सिर्फ सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक को ही नियुक्त किया जाना था। लेकिन यह आदेश 14 अक्तूबर, 2010 को प्राप्त हो जाने के बावजूद भर्ती गलत तरीके से करके गजट नोटिफिकेशन की धज्जियां उड़ा दी। पीपी कपूर ने मांग की है कि इन तमाम अपात्र भवन निरीक्षकों की नियुक्तियां रद्द करने के साथ साथ दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज कराए और सरकार को हुए नुकसान की वसूली भ्रष्ट अधिकारियों से की जाए।
ये भी खामियां :भर्ती के दौरान न केवल सरकार के गजट नोटिफकेशन की धज्जियां उड़ाई गई, बल्कि अनेक नियमों को भी ताक पर रखा गया। कपूर ने बताया कि भवन निरीक्षक की नियुक्तियों में से एससी वर्ग के लिए आरक्षण के नियम को लागू किया गया, परंतु पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण के संवैधानिक नियम को लागू नहीं किया गया। नगर नियमों में नियुक्ति पत्र देने के लिए नियमानुसार महानिदेशक शहरी स्थानीय निकाय विभाग ही सक्षम अधिकारी है। इस नियम की उल्लंघना करके नगर निगमों में भवन निरीक्षकों के पदों पर नियुक्ति-पत्र जिला उपायुक्तों द्वारा जारी किए गए। इसके अलावा नगर निगम सर्विस रूल्ज 1988 के अनुसार भवन निरीक्षक पद की शैक्षणिक योग्यता सिविल इंजीनियर होने के बावजूद 9 नगर निगमों में मकैनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक नियुक्त कर दिए गए। वहीं उक्त भर्ती में नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता प्रोडक्शन इंजीनियरिंग इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट डिप्लोमा का उल्लेख न करने के बावजूद भी प्रोडक्शन व इंडस्ट्रीरियल मैनेजमेंट डिप्लोमा धारकों को भवन निरीक्षक नियुक्त कर दिया गया।


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