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बरवाला की अनाज मंडी, गरीबों के हक पर डाका

Posted On April - 23 - 2013

रोहित काठपाल

बरवाला के हरियाणा एग्रो गोदाम में लगाया गया स्टॉक जिसमें अंकुरित एवं खराब गेहूं के बैग भी है।

बरवाला,23 अप्रैल । हाथी के दांत, खाने के ओर दिखाने के ओर। यह कहावत भले ही बहुत पुरानी हो, लेकिन बरवाला में हुए दो वाक्यों ने इस कहावत को हरियाणा एग्रो के अधिकारियों व कर्मचारियों पर चरितार्थ कर दिया। दरअसल हुआ यूं कि जैसा कि प्रदेश भर की अनाज मंडियों में गेहूं खरीद का कार्य जोरों पर चल रहा है। इसी प्रकार बरवाला की अनाज मंडी में भी ऐसा ही हो रहा है। गेहूं की खरीद-बेच के चक्कर में कुछ आढ़ती मिलीभगत कर गरीबों के हक पर डाका डालने में भी जुटे हैं। मंगलवार को हर रोज की भांति हरियाणा एग्रो ने गेहूं की खरीद का कार्य शुरू कर रखा था। इस बीच शंकर ट्रेडिंग कंपनी द्वारा गोदाम में पहुंचाने के लिए गेहूं के बैगों को भरा गया था। लेकिन जब विभाग के इंस्पेक्टर सुनील मलिक ने मंडी में ही उसे चैक किया तो उन बैगों में गेहूं कम तो जौ ज्यादा भरे हुए थे। ऐसे में विभाग के अधिकारी ने उस स्टॉक को उठाने से इंकार करते हुए मामले के संबंध में मार्केट कमेटी सचिव अजय श्योराण को फर्म पर कार्रवाई करने के लिए लिख दिया। इसके अलावा गेहूं के सैंपल लेकर एसडीएम महाबीर प्रसाद को भी दिखाया। दूसरे मामले में हुआ यूं कि नए बस अड्डे के नजदीक स्थित हरियाणा एग्रो के गोदाम नंबर 2 में सरकार तथा गरीबों को  कथित रूप से चूना लगाने के लिए एग्रो विभाग के कर्मचारी और अधिकारी मंडी आढ़तियों से मिलीभगत करे हुए थे। हर बार की तरह गेहूं के बैगों से लदे ट्राले और ट्रैक्टर-ट्रालियों का मंडी में आने का दौर जारी था। इस बीच एग्रो के गोदाम संख्या 2 में ट्राले व ट्राली से उतरे 300-300 बैग गेहूं में से ज्यादतर बैगों में अंकुरित तथा डेमेज गेहूं भरी हुई स्टॉक में लगाई गई थी। जिस दौरान मजदूरों ने स्टॉक में लगाने के लिए वाहनों से गेहूं के बैगों को उतारना शुरू किया, तो उन्हें जैसे ही आभास हुआ कि गेहूं के बैगों में खराब गेहूं है। तो उन्होंने मामले से विभाग के कर्मियों को जानकारी दे दी। मजदूरों ने बताया कि गेहूं के बैगों के गीले होने तथा उसमें खराब गेहूं होने के संबंधी जानकारी उन्होंने विभाग के मंडी इंस्पेक्टर एवं गोदाम इंचार्ज सुनील कुमार मलिक को भी दी। जिसके बाद एक बार तो विभाग के अधिकारी ने स्टॉक लगाने से रोकने के लिए निर्देश देते हुए ऐसा करने से मना कर दिया। लेकिन कुछ देर बाद वहां आए कर्मियों ने दोबारा गेहूं को स्टॉक में लगाने के लिए कह दिया। जिसके बाद मजूदरों ने मामले की मीडिया कर्मियों को जानकारी दे दी। मौके पर पहुंचे मीडिया कर्मियों द्वारा कवरेज करके जाने के बाद एग्रो विभाग के अधिकारी हरकत में आ गए तथा उन्होंने आनन फानन में बैगों में रखी खराब गेहंू को सूखाना तथा वहां से हटवाना शुरू कर दिया। मौके से मिला गेहूं इतना अंकुरित तथा सड़ा हुआ है कि अनाज आदमी तो क्या पशुओं के खाने लायक भी नहीं है। अगर गेहंू के दाने को दबाकर देखते तो वह उंगली से ही पिस जाता। बता दें कि कई सालों पुराना तथा अंकुरित हुए इस डेमेज गेहूं का मामला सामने ना आता तो यह कुछ समय बाद राशन वितरण प्रणाली के जरिए गरीब आदमी के घर तक पहुंचना था।
नियमों की उड़ाई धज्जियां : नियमानुसार गोदाम में लगने वाले गेहूं के बैगों को स्टॉक में लगाने से पहले परखी मार कर चेकिंग की जाती है, ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर बैगों की तय नियमानुसार चैकिंग हुई थी तो गोदाम के अंदर तक वह बैग कैसे पहुंच गए। बैगों की संख्या एक दो नहीं बल्कि दर्जनों थी। इसके अलावा गोदाम में रखे जाने वाले बैगों की गेहूं भराई के बाद होने वाली सिलाई मशीन से की जाती है, वहीं गोदाम में लगाए गए बैगों का निरीक्षण करने पर पाया गया कि कई जगह ऐसे बैग स्टॉक में लगाए जा रहे थे, जिनकी सिलाई हाथ से की गई थी।
क्या कहना है अधिकारी का : मामले के संबंध में हरियाणा एग्रो के मंडी इंस्पेक्टर एवं गोदाम इंचार्ज सुनिल मलिक से बातचीत की गई तो उन्होंने स्टॉफ की कमीं की दुहाई देते हुए कहा कि प्वाइंट ज्यादा है, स्टॉफ कम है। ऐसे में अगर उन्हें पता लगता है कि किसी गोदाम में खराब गेहंू लगाई गई है, तो वे उसे वापस उठवा देते हैं।


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