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अभिनय से निर्देशन तक का सफर

Posted On July - 6 - 2014

बॉलीवुड अभिनेता शशि किरण को वैसे तो हमेशा ही अपने बेहतरीन अभिनय के लिये सराहा गया लेकिन निर्देशन में कदम रखने के बाद उनकी शोहरत को एक नया मुकाम मिला। 7 जुलाई को जन्में शशि किरण 1971 में सबसे पहले मेरे अपने नाम की फिल्म में नज़र आए। इसके बाद 1975 में खेल-खेल में,1976 में मां और 1980 में थोड़ी सी बेवफाई में अपने अभिनय का जादू बिखेरा। इसके बाद उन्होंने निर्देशन की ओर कदम बढ़ाए और असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर शशि किरण की पहली फिल्म थी बेशक जो 1981 में रिलीज़ हुयी। शशि की जानी मानी फिल्मों में मेरा नाम चिन-चिन छू, चतुर सिंह 2 स्टार, बॉडीगार्ड, गॉड तुस्सी ग्रेट हो, नहले पे दहला,बनारसी बाबू, घरवाली बाहरवाली, मेहंदी, 100 डेज़, मीत मेरे मन के, क्योकि मैं झूठ नहीं बोलता, गुड्डू, दिलवाले, बागबान, तेरा जादू चल गया, बीवी नंबर -1,लोफर, इंग्लिश बाबू देसी मेम,बंदा यह बिन्दास है, चोर मचाये शोर, कितने दूर कितने पास शामिल हैं।
इतनी सारी फिल्मों में अभिनय और सहायक निर्देशन के बावजूद शशि किरण गुमनामी के संसार में ही रहे। उन्हें मंच के अलावा सार्वजनिक जगहों और सोशन साइट्स पर भी बहुत कम देखा जाता है। शशि बॉलीवुड की उस ऊंचाई पर नहीं दिखे जहां उन्हें होना चाहिए था। इशकी एक वजह यह भी है कि उन्हें कभी लीड रोल निभाने का अवसर ही नहीं मिला। उनके अभिनय की तारीफ तो हुई लेकिन वो मुकाम नहीं मिला जिसके वह हकदार थे। हालांकि उनका कहना है कि इतने बरसों की मेहनत के बाद उन्हें जो नाम और सम्मान इंडस्ट्री में मिला उससे वह बेहद खुश हैं।


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