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बढ़ रहा कैशलेस भुगतान का दायरा

Posted On August - 8 - 2016

देश में 2020 तक 500 अरब डॉलर का कारोबार

43543_01_payments-one-day-cashless-cardless-take-time copyतकनीकी इनोवेशन के युग में कैशलेस भुगतान का चलन बढ़ रहा है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और गूगल की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री का कारोबार वर्ष 2020 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंच जायेगा। भारत में डिजिटल पेमेंट के ग्रोथ में भविष्य में अनेक फैक्टर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिनमें लगातार विस्तार हो रहा है।  कैसे इस डिजिटल प्रक्रिया को मिल रहा है बढ़ावा जानेंगे नॉलेज में…
भारत में डिजिटल सिस्टम से भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों के भीतर अनेक नयी तकनीकों ने इसका परिदृश्य बदल गया है। हालांकि, भारत में भुगतान की प्रक्रिया को महज कुछ साल पहले ही डिजिटाइज स्वरूप दिया गया है, लेकिन इसमें आयी तेजी को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत में डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री का कारोबार वर्ष 2020 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंच जायेगा। देश की जीडीपी में इसकी करीब 15 फीसदी तक की हिस्सेदारी होगी। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के साथ मिल कर ‘गूगल’ ने इस संबंध में व्यापक अध्ययन के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 तक भारत में इंटरनेट यूज करनेवालों में 50 फीसदी से ज्यादा लोग डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करेंगे।
साथ ही इन यूजर्स में से शीर्ष के 10 करोड़ यूजर्स इन पेमेंट के ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (जीएमवी) के 70 फीसदी को संचालित करेंगे। कंज्यूमर पेमेंट सेगमेंट में नॉन-कैश हिस्सेदारी वर्ष 2020 तक बढ़ कर दाेगुनी से भी ज्यादा हो जायेगी । इस अध्ययन में नॉन-कैश ट्रांजेक्शन के तहत चेक, डिमांड ड्राफ्ट, नेट-बैंकिंग, क्रेडिट व डेबिट कार्ड, मोबाइल वॉलेट ओर यूपीआइ आदि को शामिल किया गया है ।
गैर-संगठित खुदरा व परिवहन क्षेत्रों में नकद भुगतान का चलन जारी रहेगा, लेकिन संगठित क्षेत्रों में ऑनलाइन पेमेंट में काफी तेजी आयेगी । इस अध्ययन में यह भी पाया गया है कि ऑफर मुहैया होने के कारण भारत में डिजिटल पेमेंट की ओर लोगों का आकर्षण भले ही बढ़ा हो, लेकिन  करीब 50 फीसदी ट्रांजेक्शन 100 रुपये से कम रकम के होते हैं।

रेगुलेटरी माहौल बनेगा मददगार

  • छोटे लेन-देन में केवाईसी से छूट : भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट के जरिये प्रति माह 10,000 रुपये तक के ट्रांजेक्शन पर केवाईसी से छूट दी है। किसी भी अधिकृत वॉलेट के जरिये इतनी रकम तक बिलों का भुगतान किया जा सकता है।

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से छूट

  • भारतीय रिजर्व बैंक की मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड से भुगतान के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को जरूरी बनाया गया है। हालांकि, ग्राहकों की सुरक्षा के लिहाज से इसे जरूरी समझा गया है, लेकिन इसे और ज्यादा आसान बनाने के लिए इसे फ्लेक्सिबल बनाया जायेगा।

आधार से आसान होगा केवाईसी

  • राष्ट्रीय पहचान के तौर पर ‘आधार’ को एक प्रमुख जरिया बनाने के कारण ‘केवाईसी’ प्रक्रिया आसान हो गयी है। ग्राहक का मोबाइल नंबर ‘आधार’ और बैंक खाते से स्वत: जुड़ने के कारण यह आसान हो गया है। साथ ही खाताधारक के बायोमेट्रिक पहचान में यह बड़ी भूमिका निभा रहा है।

cashless (1) copyयूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस

  • एनपीसीआई यानी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने हाल में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस लॉन्च किया है। इसके इस्तेमाल से आसानी से और तेजी से ऑनलाइन बैंक पेमेंट्स किया जा सकता है। यह इमेल आइडी की तरह एक वर्चुअल पहचान है, जो यूजर्स का नाम या फोन नंबर कुछ भी हाे सकता है। इसके जरिये किसी भी समय भुगतान किया जा सकता है। इसके जरिये होने वाले लेन-देन को अधिकतम सुरक्षित माना जा रहा है।

भारत बिल पेमेंट सिस्टम

  • यह एक इंटेग्रेटेड बिल पेमेंट सिस्टम है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस सिस्टम को लागू करने से संबंधित गाइडलाइन जारी किया है। इस सिस्टम के शुरू होने से भुगतान पानेवाली संस्थाओं या संगठनों के लिए भी आसानी होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में बिल भुगतान की मौजूदा व्यवस्था उपभोक्ता-केंद्रित हाेने के बजाय संस्था-केंद्रित है। इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट की सुविधा होेने से इस सिस्टम में बदलाव आयेगा और ज्यादा-से-ज्यादा लोग इसे अपनायेंगे।

उपभोक्ताओं का बढ़ता अनुभव

  • भारतीय उपभोक्ता अब तकनीक से खुद को जोड़ रहा है और ई-कॉमर्स व वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनियों से लेन-देन करते हुए अनुभवी हो रहा है। पेमेंट की प्रक्रिया को वॉलेट ने आसान बना दिया है। बैंकिंग एप्स के माध्यम से होनेवाले भुगतान के मुकाबले वॉलेट के जरिये भुगतान करना ज्यादा आसान होने से ज्यादातर लोग इसे अपना रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अनेक भुगतान कंपनियों द्वारा रिवार्ड प्वाइंट्स और ऑफर्स देने के कारण ग्राहक इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं का अनुभव बढ़ रहा है।

नेक्स्ट जेन पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स  

Cashless copyटेलीकॉम कंपनियों, बैंकों, वॉलेट कंपनियों, इ-कॉमर्स और टेक्नोलॉजी आधारित संगठनों के विस्तार के कारण भारत में न केवल डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ रहा है, बल्कि इसमें प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। अनेक बैंक अब संबंधित मोबाइल एप्स लॉन्च कर रहे हैं, जिनके माध्यम से सभी बिलों का भुगतान एक ही प्लेटफॉर्म के जरिये किया जा सकता है। मोबाइल रिचार्ज के भुगतान के लिए वॉलेट की लोकप्रियता बढ़ रही है। छोटी रकम के भुगतान के लिए ग्राहक को किसी बैंक में खाता होना जरूरी नहीं होता, लिहाजा वॉलेट के जरिये ज्यादातर लोग भुगतान करने लगे हैं। इसमें टेलीकॉम कंपनियों का योगदान भी बढ़ा है। इन कंपनियों ने ग्राहकों को भुगतान के अनेक विकल्प मुहैया कराये हैं और इनकी संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
2009-10 में रिजर्व बैंक ने 26 प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (पीपीआई) लाइसेंस जारी किया था। पीपीआई यूजर्स को अब सेमी-क्लोज्ड वॉलेट जारी किये गये हैं, जिनके जरिये भुगतान करने के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती है। लिहाजा मोबाइल वॉलेट, प्रीपेड वॉलेट इंस्ट्रूमेंट उभररहे हैं।

मोबाइल वॉलेट

यह एक एप्प-आधारित स्टोर्ड वैल्यू एकाउंट है, जिसमें क्रेडिट या डेबिट कार्ड अथवा नेटबैंकिंग के जरिये रकम डाली जाती है. पेटीएम, मोबिक्विक, फ्रीचार्ज और साइट्रस पे इसके उदाहरण हैं। आम तौर पर इन वॉलेट्स का इस्तेमाल मोबाइल रिचार्ज और बिल पेमेंट के लिए किया जाता है।

प्रीपेड काडर्स

ऑक्सीजेन, इट्ज कैश, सुविधा और जीआई टेक जैसी कंपनियां डिजिटल माध्यमों से वंचित लोगों तक इसे पहुंचाने में जुटी हैं। रेल और बस टिकट बुक करने समेत अनेक पेमेंट प्रक्रिया में इनका इस्तेमाल हो रहा है। कई पीपीआइ को तो अब टेक-फर्म्स ने अधिग्रहित कर लिया है।  जबकि ओला और बुकमाइशो जैसी कंपनियों ने अपना वॉलेट एप्प शुरू किया है। इन प्रीपेड वॉलेट की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अनेक अन्य कंपनियां भी अपना वॉलेट एप्प शुरू करने जा रही हैं। 2016 में पीपीआई लाइसेंस शुदा कंपनियों की संख्या 46 तक पहुंच चुकी थी, जबकिं अनेक कंपनियों ने इसके लिए आवेदन कर रखा है।   पेमेंट बैंक डेबिट कार्ड जारी कर सकते हैं और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा दे सकते हैं।  हालांकि, पेमेंट बैंक के लिए बनाया गया इकोनोमिक मॉडल फिलहाल थोड़ा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि ये ज्यादा राजस्व नहीं अर्जित कर सकते या सरकारी प्रतिभूतियों में ग्राहक की रकम का निवेश नहीं कर सकते, लिहाजा कई कंपनियां इसमें खास दिलचस्पी नहीं ले रही हैं।

डिजिटल बनता भारत

स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ देश में डिजिटल बैंकिंग ट्रांजेक्शन की संख्या बढ़ रही है. मौजूदा समय में देश में करीब 24 करोड़ लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं और वर्ष 2020 तक इनकी संख्या 53 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा, देशभर में 3जी और 4जी इंटरनेट कनेक्टिविटी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।  ‘नेशनल ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क’ के तहत देश के ढाई लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक इंटरनेट की पहुंच आसान हो जायेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट इस्तेमाल करनेवालों में से 70 फीसदी लोग स्मार्टफोन के जरिये इसका इस्तेमाल करते हैं, लिहाजा इस क्षेत्र में विकास का असर डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा देगा । पिछले कुछ सालों के दौरान बैंकिंग सेक्टर में डिजिटल ट्रांजेक्शन में सालाना 50 फीसदी की दर से वृद्धि हो रही है। वही दूसरी ओर ब्रांच-आधारित ट्रांजेक्शंस में वर्ष 2014 के मुकाबले 2015 में करीब सात फीसदी की कमी आयी है।


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