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सेहत ही नहीं दिमाग के लिये भी खतरा है फास्ट फूड रिचा

Posted On September - 5 - 2016

fe copyपिछले कुछ दशकों से पश्चिमी खान पान का चलन हमारे देश में भी तेजी पकड़ रहा है । भागदौड़ भरी जीवनशैली में अब लोगों को भोजन भी फटाफट चाहिए । कई तरह के रेडीमेड फूड बाज़ार में आसानी से मिल जाते हैं ।  यही कारण है कि फास्ट फूड या जंक फूड कहे जाने वाले पश्चिमी खानपान का तेजी से प्रसार हो रहा है । इस जंक फूड की गुणवत्ता पर वैसे तो शुरु से ही सवाल उठते रहे हैं लेकिन हाल ही में  ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ न्यूट्रिशन’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट ने इस पर फिर से बहस छेड़ दी है । शोधकर्तांओं ने फास्ट फूड के खतरों के प्रति सावधान करते हुए कहा है कि इससे अलजाइमर की बीमारी का जोखिम बढ़ता है । फास्ट फूड से जुड़ी कुछ ताज़ा रिसर्च पर हम बात करेंगे नॉलेज में…

मस्तिष्क में ब्लॉकेज पैदा करता है
फास्ट फूड के रूप में जाने जानेवाले पश्चिमी खानपान से अल्जाइमर यानी भूलने की बीमारी का जोखिम बढ़ता है । पिछले कई वर्षों से जारी एक अध्ययन की हाल में आयी रिपोर्ट में पाया गया है कि भूमध्य-सागरीय देशों के मुकाबले अमेरिका में डीजेनरेटिव ब्रेन डिसऑर्डर का जोखिम औसतन ज्यादा है । इसके लिए उनके खानपान की मौजूदा प्रवृत्ति को जिम्मेवार बताया गया है, जिसमें कॉलेस्ट्रॉल और अल्जाइमर पैदा करनेवाले प्रोटीन्स मौजूद होते हैं, जो मस्तिष्क में ब्लॉकेज पैदा करते हैं । इस रिपोर्ट के प्रमुख लेखक और सैन फ्रांसिस्को के एक हेल्थ रिसर्च सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टर विलियम ग्रांट का कहना है कि अल्जाइमर और उसके कारणों के संबंध में अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों की पड़ताल कर उसकी व्यापक समीक्षा की गयी है।  इसमें पाया गया है कि पश्चिमी खानपान शैली और खासकर मीट से बनी चीजें ज्यादा मात्रा में खाने से इस बीमारी का जोखिम बढ़ता है ।

दिमाग की बीमारी है अल्जाइमर  
अल्जाइमर की बीमारी एक दिमागी विकार है, जिससे धीरे-धीरे इनसान की याददाश्त और उसके सोचने-समझने की कुशलता, यहां तक कि उसके रोजमर्रा के जीवन में आनेवाले आसान कार्यों को करने की उसकी क्षमता भी खत्म होती जाती है । ज्यादातर लोगों में इस बीमारी का लक्षण पहली बार तब दिखता है, जब वे 60 वर्ष की उम्र पार करते हैं । ‘अमेरिकी हेल्थ एंड ह्यूमेन सर्विसेज’ के मुताबिक, अमेरिका में इस बीमारी से पीड़ितों की संख्या 50 लाख से ज्यादा हो सकती है ।  अमेरिका में अल्जाइमर की बीमारी मृत्यु का छठा बड़ा कारण है, लेकिन यदि बुजुर्गों के निधन के मामले में हार्ट डिजीज और कैंसर के बाद यह तीसरा सबसे बड़ा कारण हो सकता है । वयस्कों में अल्जाइमर का सामान्य कारण डिमेंशिया है । डिमेंशिया में भी इन्सान सोचने, याद रखने और तर्क करने की क्षमता खोने लगता है । उसके रोजमर्रा के कार्यकलापों में वह स्पष्ट रूप से दिखने लगता है ।  डिमेंशिया अलजाइमर का आरंभिक स्वरूप है, जिस दौरान कार्यशैली में बदलाव आने लगता है़ ।
 10509CD _FATKIDSकैसे नाम पड़ा अल्जाइमर  : 1906 में पहली बार डॉक्टर एलॉइस अलजाइमर ने एक महिला के मस्तिष्क उतकों में इस बदलाव को जाना, जिसकी मौत मानसिक बीमारी के कारण हो चुकी थी । डॉक्टर अल्जाइमर ने उसके मस्तिष्क का परीक्षण किया और उसमें अनियमितताएं पायी। इसलिए इस बीमारी का नाम डॉक्टर अल्जाइमर के नाम पर रखा गया ।
 

अल्जाइमर के प्रमुख लक्षण 

  • किसी समय आसान व सरल लगनेवाले कार्यों को पूरा करने में मुश्किल होना ।
  • समस्याओं को हल करने में कठिनाई ।
  • मनोदशा और व्यक्तित्व में बदलाव, दोस्तों व परिवार से अलग रहने की प्रवृत्ति ।
  • संवाद कायम करने में परेशानी ।
  • जगहों, लोगों और घटनाओं के बारे में भ्रमित होना ।

10 देशों में हुई रिसर्च

डॉक्टर ग्रांट ने इस शोध के लिए अल्जाइमर के प्रसार वाले 10 देशों (ब्राजील, चिली, क्यूबा, मिस्र, भारत, मंगोलिया, नाइजीरिया, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, श्रीलंका और अमेरिका) मे रिसर्च की । इस रिसर्च में पाया गया कि लोगों द्वारा पश्चिमी जीवनशैली के खानपान अपनाने से अलजाइमर की बीमारी की दर बढ़ गयी । हालांकि, भारत, जापान और नाइजीरिया जैसे देशों  में, जहां कम मीट के इस्तेमाल से पारंपरिक खानपान का अधिक सेवन किया जाता  है, जहां इस बीमारी का खतरा 50 फीसदी कम पाया गया है । उन्होंने आगाह किया है कि इस बीमारी का सीधा संबंध खानपान से जुड़ा है, जिसमें मीट, अंडों व बसायुक्त डेयरी उत्पादों का अधिक योगदान है । अनाज, फलों, सब्जियों व मछली के सेवन समेत विटामिन डी से इस बीमारी का जोखिम कम पाया गया है ।

डायबिटीज का भी कारण फास्ट फूड
फास्ट फूड से केवल अल्जाइमर बीमारी का ही खतरा नही हैं बल्कि कई तरह की गंभीर बीमारियों को यह न्योता देता है। किंग साइज बर्गर और फ्रंच फ्राइज़ जैसे फास्ट फूड खाने से पेट के आसपास चर्बी बढ़ने के अलावा डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है। हॉर्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, चिंता की बात यह है कि बाहर का खाना खाने पर ऊर्जा तो मिलती है, लेकिन पोषण नहीं मिलता है, जिससे वजन बढ़ जाता है । इससे धीरे-धीरे टाइप 2 डायबिटीज होने की आशंका बढ़ने लगती है । इस शोध से पता चलता है कि घर का बना खाना खानेवालों के मुकाबले जंक फूड खानेवालों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा आधे से भी कम होता है ।

 जंक फूड से हैंगओवर का जोखिम !
यदि आप रात के खाने में फास्ट फूड लेते हैं, तो सुबह आपको हैंगओवर हो सकता है । ‘स्टैंडर्ड डॉट को डॉट यूके’ की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि रात में फास्ट फूड खाने से सुबह सोकर उठने के बाद इन्सान जिस तरह की मनोदशा से जूझता है, उसे जंक फूड हैंगओवर का नाम दिया जा सकता है । अगर रात को सोते समय आप चिप्स, बर्गर और कबाब जैसे जंक फूड खाते हैं, तो सुबह उठने पर आपको सुस्ती महसूस होगी, क्योंकि इस तरह के खाने को शरीर में पचने में कम-से-कम 12 घंटे का समय लगता है । इनमें ज्यादा सोडियम होने से ये शरीर में पानी ज्यादा सोखते हैं, लिहाजा गैस्ट्रोइंटेस्टाइन पर इसका सीधा असर पड़ता है और  जब शरीर के अंदर पानी की कमी होती है तो सिरदर्द का खतरा पैदा हो सकता है।

 रोज बर्गर खाने से कैंसर का खतरा!
नाश्ते में सैंडविच, बर्गर और ब्रेड जैसे जंक फूड लेनेवालों में कैंसर का ज्यादा जोखिम पाया गया है । सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरन्मेंट (सीएसई) की एक ताजा रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय बाजारों में बिकनेवाले नामी-गिरामी ब्रांड के ब्रेड में जानलेवा केमिकल पोटेशियम ब्रोमेट और आयोडेट पाये गये हैं। इस हानिकारक केमिकल का सेवन करने से कैंसर और थायरॉइड जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है । सीएसई ने अपने इस शोध में ब्रेड के 38 ब्रांड को शामिल किया, जिसमें पोटेशियम ब्रोमेट और आयोडेट के 84 फीसदी टेस्ट पॉजिटिव पाये गये हैं । रिपोर्ट  में बताया गया है कि पोटेशियम ब्रोमेट को ब्रेड का स्वाद बढ़ाने, ज्यादा सफेद दिखने और मुलायम बनाने के लिए डाला जाता है । यूरोपीय देशों में पोटेशियम ब्रोमेट के इस्तेमाल पर पाबंदी है ।

 पिज्जा, बर्गर से अस्थमा और एग्जिमा  
ब्रिटेन की नॉटिंघम यूनिवर्सिटी और न्यूजीलैंड  की ऑकलैंड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की माने तो ज्चादा पिज्जा और बर्गर की आंदत हमें अस्थमा और एग्जिमा जैसी बीमारियों का चपेट में ला सकती है।  ‘थॉरेक्स जर्नल’ में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि बर्गर जैसे फास्ट फूड में आम तौर पर ट्रांस फेटी एसिड होते हैं, जो रोगों से लड़ने की  क्षमता को प्रभावित करते हैं । इससे बच्चों में अस्थमा और एग्जिमा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है । इस रिसर्च में 50 देशों के पांच लाख से ज्यादा बच्चों के बारे में आंकड़े जमा किये गये । इनमें से जिन बच्चों को बर्गर जैसे फास्ट फूड खाने की आदत है, उनमें अस्थमा, एग्जिमा, खुजली और आंखों से पानी आना जैसी समस्याएं होने का ज्यादा जोखिम रहता है ।


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