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अहीरवाल के होनहारों का दर्द 

Posted On November - 14 - 2016

राजनीतिक हैसियत रखने वाले जिलों के खिलाड़ी ही क्यों निकलते हैं आगे

11211CD _REWARI 1तरुण जैन, रेवाड़ी
प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, लेकिन इसे निखारने के लिए शिल्पी की दरकार हमेशा रहती है। जिला रेवाड़ी में प्रतिभावान खिलाड़ियों खिलाड़ियों  की कभी कमी नहीं रही और अनेक खेलों में दमखम दिखाने का प्रयास भी किया है। लेकिन पिछड़ा क्षेत्र होने के कारण प्रतिभाओं को न तो आगे बढ़ने का मौक मिलता है और न ही सरकारी प्रोत्साहन मिलता है। सवाल यह भी उठता है कि केवल राजनीतिक हैसियत रखने वाले कुछ जिलों के खिलाड़ी ही आगे क्यों निकलते हैं। यहां कुछ खिलाड़ी अपने दम पर क्षेत्र का नाम रोशन कर गये। दुखद स्थिति यह है कि जिला में खेलों के कोच बहुत कम है और यदि कोच हैं तो सुविधाएं नहीं हैं। असुविधाओं व प्रोत्साहन के अभाव में ये प्रतिभाएं एक दायरे में सिमट कर रह गयी हैं। खिलाड़ी व खिलाड़ियों की एसोसिएशन की ओर से सरकार से कोच और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर मांग की जाती रही है। लेकिन उस पर आज तक कोई गौर नहीं हुआ। कुछ एसोसिएशन तो अपने खर्चे से कोच का इंतजाम कर खिलाड़ियों को तराशने का प्रयास कर रही हैं। इन हालातों के चलते जिले से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को अपना हुनर दिखाने का मौका नहीं मिल पा रहा। यह क्षेत्र किसी समय में कुश्ती और कबड्डी के लिए विख्यात था। अनेक अखाड़े चलते थे। लेकिन आज ये अखाड़े सिमटते जा रहे हैं और युवाओं को इन खेलों में राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार होना पड़ रहा है। यह इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अनेक जिलों में इन खेलों को न केवल महत्व दिया जा रहा है, बल्कि पूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं और वहां के खिलाड़ी देश-विदेश में प्रदेश का नाम चमका रहे हैं। यहां का पहलवान अपनी डाइट का इंतजाम खुद करता है। जिला में विभिन्न खेलों के लिए लगभग 12 कोचिंग सेंटर हैं। इनमें सरकार की ओर से नाम मात्र की सुविधा उपलब्ध कराई गयी है।
रेवाड़ी में खिलाड़ियों के लिए एकमात्र राव तुलाराम स्टेडियम मौजूद है और इस स्टेडियम में खेल कम सरकारी कार्यक्रम ज्यादा होते हैं। यहां सैनिकों की भर्ती के लिए युवाओं की दौड़ होती है या 26 जनवरी व 15 अगस्त के कार्यक्रम होते हैं। यहां प्रेक्टिस करने वाले खिलाड़ियों के लिए ट्रैक का सिंथेटिक होना जरूरी है। दौड़ लगाने वाले धावकों के पैरों में स्पाइस और शरीर पर एथलेटिक्स आउटफिट होना जरूरी है। लेकिन यहां खिलाड़ियों को न स्पाइस, न ड्रेस और न ही प्रेक्टिस के बाद एनर्जी देने वाला पेय उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में कोच की बेहतरीन ट्रेनिंग के बावजूद पिछड़ जाते हैं। बैडमिंटन, फुटबाल, हैंडबाल, वॉलीबाल और हॉकी का भी यही हाल है। फुटबाल व हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान, फ्लैग पोस्ट, जिम्रास्टिक ट्रेनिंग, स्टड्स, ड्रेस व रेगुलर डाइट सहित संसाधनों की जरूरत होती है। वॉलीबाल के लिए लाइटिंग, ठोस सर्फेस जैसी सुविधा चाहिए। बैडमिंटन के लिए नगर के माडल टाउन स्थित विक्रमादित्य हॉल है। इसमें खिलाड़ियों के लिए यहां की एसोसिएशन व प्रशासन ने सुविधाएं तो दे रखी हैं लेकिन खिलाड़ियों को हुनर सिखाने के लिए यहां आज तक कोई कोच नहीं है। जिले में खेल नर्सरी भी हैं। जिनमें 1-1 नर्सरी एथलेटिक्स व फुटबाल व हैंडबाल के लिए है। अन्य खेलों के लिए नर्सरी नहीं है। प्रशिक्षकों का मानना है कि हर खेल की नर्सरी होनी चाहिए और खिलाड़ियों को आधुनिक ट्रेनिंग व उपकरण दिए जाने चाहिए। पूरे प्रदेश में खेल प्रशिक्षक के करीब 1100 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से आधे से अधिक खाली पड़े हैं। रेवाड़ी जिले में खेलों के हिसाब से लगभग 50-60 प्रशिक्षक होने चाहिए। जबकि इनकी संख्या बहुत कम है। हम ने विभिन्न खेलों के कोच व खिलाड़ियों से जब बात की तो उनका दर्द छलक पड़ा।

11211CD _REWARI 2 SUDARSHAN HANDUJAएसोसिएशन ने किया कोच का प्रबंध

रेवाड़ी बैडमिंटन एसोसिएशन के महासचिव व खिलाड़ी सुदर्शन हंडूजा का कहना है कि खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए यहां कोर्ट (मैदान) तो सही है, लेकिन स्थायी कोच नहीं है। इसके चलते आज तक हमारा कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि दर्ज नहीं करा पाया। एसोसिएशन ने स्वयं अपने खर्चे से पिछले 2 महीने से कोच रखा हुआ है। जिसका वेतन एसोसिएशन के सदस्य चुका रहे हैं।

11211CD _REWARI 9 BHAY SHEO LAL PAHLWANसिमटते जा रहे अखाड़े

रेवाड़ी के कुश्ती के पहलवान भाई श्योलाल का कहना है कि पहले रेवाड़ी में अनेक अखाड़े चलते थे और यहां के पहलवान दूर-दूर तक इनामी कुश्तियों में भाग लेते थे। लेकिन सुविधाओं के अभाव में अब अखाड़े सिमटते जा रहे हैं। अब रेवाड़ी में 2, बावल के गांव आसलवास में 2 व बावल में एक अखाड़ा चल रहा है। उनके द्वारा छोटा तालाब व्यायामशाला पिछले कई वर्षों से चलाई जा रही है।

11211CD _REWARI 8 VIDHAYAK RANDHIR SINGH KAPRIWASखेलों में ही नहीं, हर बात पर होता है भेदभाव

रेवाड़ी के विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास का कहना है कि खेलों में ही नहीं, अभी तक हर मामले में इस क्षेत्र के साथ भेदभाव होता था। उन्हें पता है कि खिलाड़ियों को समुचित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। लेकिन अब प्रदेश सरकार हर जिलों के साथ समान व्यवहार कर रही है। वे स्वयं इस प्रयास में हैं कि यहां हर खेलों के कोच व प्रशिक्षक होने के साथ-साथ खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं भी मिलें।

11211CD _REWARI 3 CHARAN SINGHकोच बोले- विदेशी तर्ज पर हों सुविधाएं

फुटबाल कोच चरण सिंह का कहना है कि विदेशों में खेल सिस्टम बहुत ही उन्नत है। वहां खिलाड़ी को तैयार करने के लिए पूरी टीम होती है। अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग, मैदान व आधुनिक उपकरण सहित अन्य चीजों की जरूरत होती है। एक खिलाड़ी को तैयार करने के लिए विभिन्न विशेषज्ञों की टीम होती है। पहले की तुलना में अब सुविधाएं बढ़ी हैं।

11211CD _REWARI 7 KAJAL CHAUHANचैंपियन बोलीं : एस्ट्रोटर्फ मैदान की जरूरत

फुटबाल की नेशनल चैंपियन काजल चौहान का कहना है कि खिलाड़ियों को यदि आगे बढ़ाना है तो सुविधाएं तो देनी होगी। एक खिलाड़ी अपने स्तर पर कुछ नहीं कर सकता। खिलाड़ी जब  मेडल जीतकर लाता है तो देश का ही नाम रोशन होता है। फुटबाल में एस्ट्रोटर्फ मैदान की सुविधा जरूरी है। गांवों में फुटबाल को लेकर लड़कों में ही नहीं लड़कियों में भी क्रेज लेकिन सुविधाएं मिले, तभी ये लड़कियां अपनी प्रतिभा दिखा पाएंगी।

11411CD _REWARI KRISHAN KUMARपहलवान हैं सरकार से नाराज

अंतरराष्ट्रीय पहलवान राजगढ़ निवासी मनीष पहलवान सरकार की नीति से बेहद नाराज दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि रोहतक, झज्जर, सोनीपत जैसे जिलों में सुविधाओं व अच्छी-अच्छी एकेडमी की जहां कोई कमी नहीं है और वहां के खिलाड़ी दुनिया में नाम कमा रहे हैं, वहीं इस पिछड़े क्षेत्र की लगातार उपेक्षा करते हुए पहलवानों को कोई सुविधा नहीं दी जाती। यही कारण है कि यहां से अच्छे खिलाड़ी नहीं निकल पाते।

11211CD _REWARI 4 ANIL KUMARधावकों को मिली तनिक राहत

एथलेटिक्स प्रशिक्षक अनिल कुमार का कहना है कि हमारे खिलाड़ी नेशनल चैंपियनशिप में क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। स्टेडियम में रेसिंग ट्रेक को पहले से बेहतर बनाया गया है। धावकों को अब दौड़ने में काफी सुविधा हो रही है।

11211CD _REWARI 6 HARSH KUMARलेकिन अभी चाहिए सिंथेटिक ट्रैक

अंतर्राष्ट्रीय 400 मीटर रेस के धावक हर्ष कुमार का कहना है कि बहुत से धावक उचित ट्रेक व अन्य संसाधनों के अभाव पीछे छूट जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जीत दर्ज करने के लिए सिंथेटिक ट्रैक तो होना ही चाहिए। एथलेटिक्स में खासकर रेस सेक्सन में नियमित व फोकस के साथ प्रेक्टिस करनी पड़ती है।

11211CD _REWARI 5 JAYOTASANAसुविधाएं बढ़ें तो मेडल भी बढ़ेंगे

लंबी कूद की राष्ट्रीय चैंपियन ज्योत्सना का कहना है कि हर कार्य में मेहनत व साधना की जरूरत होती है। एथलेटिक्स में खिलाड़ियों को एकाग्रता व साधना के साथ आगे बढ़ना होता है। विश्व स्तर की खेल सुविधाएं नहीं मिलने के कारण हमें चंद मेडल में ही संतोष करना पड़ता है।


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