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दीदी की निगाहें दिल्ली पर

Posted On November - 25 - 2016

रीता तिवारी
mamata-banerjee -8 copyअाजकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले का विरोध कर रहे विपक्षी दलों में से तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी सबसे सक्रिय नजर आती हैं। उनके तेवर अचानक से बदल गये हैं। ऐसा लगता है कि उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद अपना लक्ष्य वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव जीतना तय कर लिया है। इसके लिए उन्होंने एक धर्मनिरपेक्ष तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद भी की थी। अब नोटबंदी ने उनकी इस योजना को पूरा करने के लिए मुद्दा दे दिया है। नोटबंदी के फैसले के बाद से ही ममता अचानक केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा के खिलाफ आक्रामक हो गयी हैं। उन्होंने दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना दिया। अगले सप्ताह उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब समेत विभिन्न राज्यों के दौरे पर निकलने वाली हैं। इस अचानक बढ़ी राजनीतिक सक्रियता से साफ है कि दीदी की निगाहें अब दिल्ली पर हैं। हालांकि कुछ दिन पहले एक सवाल पर उन्होंने कहा था कि वे बंगाल में ही रहना चाहती हैं और प्रधानमंत्री बनने की उनकी कोई मंशा नहीं है। लेकिन कहा जाता है कि राजनीति में कोई भी फैसला स्थायी नहीं होता।
केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ विपक्ष को पहले से ही लामबंद करने का प्रयास कर रहीं दीदी को नोटबंदी के तौर पर एक ठोस मुद्दा मिल गया है। उन्होंने नोटबंदी के फैसले के विरोध के बहाने दूसरे क्षेत्रीय दलों के साथ जुगलबंदी शुरू कर दी है। इसके लिए उन्होंने अपनी कट्टर दुश्मन रही माकपा को साझा आंदोलन का न्योता देने से भी गुरेज नहीं किया। यह बात अलग है कि माकपा ने उनके न्योते को तवज्जो नहीं दी। दूसरी ओर, तमाम क्षेत्रीय दलों और उनके नेताओं के साथ बातचीत करने के बावजूद राष्ट्रपति भवन जाकर प्रणब मुखर्जी से मुलाकात के दौरान आम आदमी पार्टी और नेशनल कान्फ्रेस के अलावा दूसरी कोई पार्टी ममता के साथ नहीं आई।
दीदी पहले दिन से ही इस फैसले का लगातार विरोध करती रहीं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश पर आर्थिक आपातकाल थोपने जैसे आरोप लगाए हैं। ममता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर नोटबंदी के फैसले विरोध करने वाले राजनीतिक दलों को धमकाने का आरोप लगाते हुए इस मुद्दे पर बंगाल के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में रैलियां करने का एेलान किया है। इस फैसले के विरोध में ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को कोलकाता में एक विरोध रैली निकाली। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी ने इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर साझा आंदोलन करने से इनकार कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दीदी इस मुद्दे को लंबा खींचना चाहती हैं। इस मुद्दे पर तमाम दलों को लामंबद करने की उनकी कोशिशें भी जारी रहेंगी। दरअसल, भाजपा अब तक शारदा चिटफंड घोटाले और नारद न्यूज के स्टिंग वीडियो को हथियार बनाकर तृणमूल कांग्रेस पर हमले करती रही हैं। अब दीदी नोटबंदी के सवाल पर आम लोगों की परेशानियों को मुद्दा बनाकर जवाबी हमले करने में जुटी हैं। नोटबंदी पर अपने आंदोलन की वजह से ही उन्होंने राज्य में लोकसभा की दो और विधानसभा की एक सीट के लिए हुए उपचुनाव में प्रचार तक नहीं किया। ममता ने उपचुनाव के नतीजों को नोटबंदी के
खिलाफ आम लोगों का विद्रोह करार देते हुए कहा है कि भाजपा और केंद्र सरकार को इससे सबक लेना चाहिए।
नोटबंदी के खिलाफ दीदी की यह मुहिम कितना रंग लाएगी, इसका पता तो बाद में चलेगा। लेकिन वे इस बहाने पूरी ताकत के साथ अगले लोकसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार करने में तो जुट ही गई हैं।


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