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पति गाड़ियों की, तो पत्नी कर रही है बॉक्सरों की धुलाई

Posted On November - 28 - 2016

दलेर सिंह, जींद

 नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता रेखा अपने मेडल के साथ। - दलेर सिंह

नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता रेखा अपने मेडल के साथ। – दलेर सिंह

उसने अभी बॉक्सिंग के ग्लव्स सलीके से पहनना सीखा ही था कि परिजनों ने शादी कर दी। शादी भी साधारण घर में, जहां आठ जमात पास उसका पति अपने सर्विस स्टेशन पर गाड़ियों की धुलाई कर घर का खर्च बमुश्किल से चला रहा है। ससुर की कई साल पहले सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी, जिसके चलते घर का सारा दारोमदार पति पर ही आन पड़ा। शादी हुई तो पत्नी भी घर-गृहस्थी निभाते हुए विशुद्ध गृहिणी बन गयीं। एक बेटे को जन्म दिया। परिवार में खुशियां आ गयी। लेकिन उधर, पत्नी के मन में कुछ और ही करने का सपना पल रहा था। उसने झट से पति और ससुरालजनों को अपने मन की बात बताई कि वह फिर से बॉक्सिंग का अभ्यास करना चाहती है। ससुरालजनों ने भी उसकी भावनाओं की कद्र की और उसे भिवानी स्थित एक बॉक्सिंग एकेडमी में अभ्यास करने की इजाजत दे दी। एकेडमी में उसने खूब पसीना बहाया और हाल ही में स्टूडेंट्स ओलंपिक एसोसिएशन की ओर से भोपाल में आयोजित नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 52 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर सभी को हैरान कर दिया। यह सब मात्र ढाई साल के अभ्यास से किया, लेकिन बड़ी बात यह है कि उसने नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक मात्र 2 माह अभ्यास करने के बाद ही हासिल किया है। यह दास्तां है जींद जिला के जुलाना निवासी सतीश की पत्नी रेखा (21) की।
रेखा भिवानी जिला के गांव गोठड़ा की बेटी है। स्कूल की पढाई अभी पूरी ही नहीं हुई थी कि वह विवाह के बंधन में बंध गयी। एक बार तो लगा कि वह गृहिणी बनकर ही रह जाएगी। लेकिन मन का जज्बा जगा तो रास्ते अपने आप खुलते गये। पिछले दिनों भोपाल से स्वर्ण पदक लेकर जुलाना पहुंचीं रेखा का उस के ससुरालजनों और ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। इससे पहले भी रेखा ने नेशनल में दो रजत, राज्य स्तर में एक स्वर्ण व एक रजत लेकर अपने नाम राष्ट्रीय उपलब्धियां अंकित की हैं।
दूसरी लड़कियों के लिए बनीं प्रेरणा स्रोत
बॉक्सर रेखा की दादी सास सरती देवी और चाचा ससुर सत्यवान खटकड़ ने कहा कि बहू के इस कार्य से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है, उनकी बहू आज दूसरी लड़कियों के लिए भी प्रेरणा स्रोत हैं। रेखा ने बताया कि वह पिछले 2 माह से भिवानी स्थित बॉक्सिंग एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। इस दौरान उसका नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए चयन हुआ, जिसमें उसने गोल्ड मेडल हासिल किया। रेखा ने कहा कि वह अपने खेल को जारी रखेगी, उसका असली लक्ष्य देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतना है। एक बच्चे की मां रेखा ने पिछले दिनों ओपन से दसवीं कक्षा पास की है और आगे भी वह खेल अभ्यास के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखेगी।


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