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पुरस्कारों के सहारे गढ़ बचाएंगे चंद्रशेखर

Posted On November - 11 - 2016

विनय ठाकुर
11111cd _chandrasekara_2028380eतेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव तेलुगू सिनेमा के लिए नंदी पुरस्कारों की जगह सिंह पुरस्कारों को स्थापित करने की तैयारी में हैं। इसके लिए उन्होंने पूर्व आईएएस अधिकारी केवी रमणाचारी के नेतृत्व में समिति का गठन किया गया था। उन्होंने बाजार के लिहाज से राज्य की छवि के अनुरूप इस नाम का चयन किया। आंध्रप्रदेश के विभाजन से बने दोनों नए राज्यों के राजनीतिक रहनुमा फिल्मों की कारोबारी व राजनीतिक ताकत दोनों से वाकिफ हैं। दोनों को ही अपनी राजनीतिक जागीरदारी की जड़ों को मजबूत करने के लिए पूंजी व पहचान की जरूरत है। सिनेमा इसका बेहतरीन माध्यम है। तमिलनाडु की तरह ही आंध्रप्रदेश में फिल्म उद्योग का राजनीति में और राजनीति का फिल्म उद्योग में दखल रहा है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव इसे जानते हैं। वे जानते हैं कि राज्य के मुख्य विपक्षी दल की ताकत को कमजोर करने के लिए तेलगु फिल्म उद्योग पर काबिज सीमांध्र के लोगों के वर्चस्व को कमजोर करना जरूरी है। नए तेलंगाना राज्य के निर्माण के बाद से ही तेलगु फिल्मों के लिए दिए जाने वाले नंदी पुरस्कार स्थगित थे। भाषा के आधार पर बने राज्य में भाषा राजनीतिक के केंद्र में हैं, इसलिए तेलंगाना राज्य की स्थापना के लिए चलने वाले आंदोलन में तेलुगू के स्थानीय बोली को लेकर शुरू से ही संजीदगी थी। तेलुगू फिल्म व मीडिया जगत में सीमांध्र इलाके से आने वाले लोगों का वर्चस्व रहा है। इसलिए तेलंगाना राज्य के लिए संघर्ष करने वालों को इन संस्थानों से शिकायत रही है। राज्य निर्माण आंदोलन के आरंभिक दिनों से ही इनमें तेलगाना की हिस्सेदारी की आकांक्षा रही है। राज्य निर्माण के बाद के. चंद्रशेखर राव में इसका अहसास रहा है, इसलिए जब तेलंगाना के लिए फिल्म सिटी की बात चली तो उन्होंने चित्रपुरी के बेंचमार्क के तौर पर बॉलीवुड नहीं हॉलीवुड को सामने रखते हुए उसे हॉलीवुड से बेहतर बनाने की घोषणा की। तेलगु फिल्म उद्योग के तेलंगाना समर्थक लोगों में करीमनगर व अदिलाबाद जिलों के प्राकृतिक सौदर्य को इस्तेमाल करने की वकालत करते हैं। पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए दोनों के बीच कड़ी स्पर्धा है। भारत में व्यवसाय के लिहाज से सबसे बेहतर राज्य की घोषणा की गयी तो तेलंगाना और सीमांध्र दोनों के बीच शीर्ष स्थान के लिए कांटे की टक्कर थी। दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अपने पारिवारिक व्यावसाय हैं और दोनों ही राजनीति के साथ ही व्यवसाय में भी काफी सफल माने जाते हैं। सीमांध्र के मुख्यमंत्री चंद्राबाबू नायडू की पहचान पूर्व में हैदराबाद को दुनिया के नक्शे पर एक आधुनिक कारोबारी शहर के रूप में स्थापित करने वाले के रूप में जानी जाती है। उन्हें सीईओ मुख्यमंत्री का तगमा भी दिया जाता था। तेलांगना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के पारिवारिक फार्म हाउस के उत्पाद अपने गुणवत्ता और इनोवेशन के चलते तेलांगाना के साथ ही सीमांध्र के बाजार में भी अपनी पैठ बनाने में सफल रहे हैं। श्री राव का काफी समय अपने फार्म हाउस पर बीतता है। तेलगु फिल्म उद्योग का कारोबार (सालाना 15000 करोड़) भी काफी बड़ा है। साथ ही विभिन्न भाषायी फिल्मों की श्रेणी में सबसे अधिक फिल्म बनाने वालों में से हैं। हाल में तेलगु फिल्म निर्माता चंद्रमौली ने बाहुबली के जरिए भारतीय फिल्म इतिहास में एक नया अध्याय रचा। आंध्रप्रदेश के निर्माण के बाद तेलगु फिल्म उद्योग ने धीरे-धीरे चेन्नई से निकल हैदराबाद में अपनी जड़े जमायी जिसमें उन्हें फिल्म अभिनेता से मुख्यमंत्री बने एनटी रामाराव का काफी सक्रिय सहयोग मिला। राज्य के बंटवारे के बाद एक बार फिर से तेलगु फिल्म उद्योग के विस्थापन की बात चली। दोनों राज्यों में प्रभुत्वशाली-राजनीतिक वर्ग इस फिल्म उद्योग के बड़े से बड़े हिस्से पर काबिज होना चाहता है। राजनीतिक बाजार में छवियों की जंग है और इस जंग में सिनेमा से बड़ा कोई हथियार नहीं है।


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