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बाक्सिंग के लिए छोड़ दी डॉक्टरी की पढ़ाई

Posted On November - 21 - 2016
अपने मैडल और ट्राफी के साथ बाॅक्सर अनुप्रीत। - अरविंद शर्मा

अपने मैडल और ट्राफी के साथ बाॅक्सर अनुप्रीत। - अरविंद शर्मा

अरविंद शर्मा, जगाधरी
अब वह दिन बीते जमाने की बात हो गये जब बेटियों को बेटों के मुकाबले कम आंका जाता था। आज बेटियां चुनौतियों को पार पाते हुए कामयाबी की इबारत लिख ही हैं। ऐसी ही दो बेटियों हैं रोडवेज कर्मचारी प्रताप सिंह के घर। इन मेहनती बेटियों ने आज तक प्रताप सिंह को बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी।
प्रताप सिंह की दोनों बेटियां अनुप्रीत व मनप्रीत पढ़ाई में अच्छी हैं, लेकिन अनुप्रीत पढ़ाई के साथ-साथ बाक्सिंग की भी बेहतर खिलाड़ी है। अब तक दर्जनों मैडल व ट्राफियां जीत चुकी अनुप्रीत को घर वाले मैट्रिक के बाद मेडिकल की पढ़ाई कराना चाहते थे। लेकिन अनुप्रीत ने मेडिकल पढ़ाई की बजाय नान मेडिकल लेना ही बेहतर समझा। मनप्रीत ने 2013 में बाक्सिंग में हाथ आजमाना शुरू किया। 2 साल पहले करनाल में हुई राज्य स्तर की बाक्सिंग चैंपियनशिप में अनुप्रीत ने कांस्य पदक हासिल किया। इसके अगले साल पंचकूला में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी इसे कांस्य पदक मिला। बीते माह 26 से 30 सितंबर तक चंडीगढ़ में हुई सीबीएससी प्रतियोगिता में अनुप्रीत ने रजत पदक जीता।
अनुप्रीत का कहना है कि उसकी तमन्ना देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने की है। उनका कहना है कि पापा प्रताप सिंह और मां वनीता ने आज तक किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। वह दोनों बहनें मम्मी-पापा का बेटों से भी बढ़कर नाम रोशन करना चाहती हैं। अनुप्रीत का सपना आईपीएस अफसर बनकर मजलूमों को इंसाफ दिलाना है। इसके लिए वह खेलों को माध्यम बनाना चाहती है।
वहीं अनुप्रीत की बड़ी बहन मनप्रीत कॉलेज की पढ़ाई कर रही है और वह शिक्षक बनना चाहती है। अनुप्रीत कहती है कि उसका परिवार भी ग्रामीण पृष्ठभूमि से है। मूल रूप से जिला जींद से ताल्लुक रखने वाली अनुप्रीत का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में अभी बहुत करने की जरूरत है। यहां पर छिपी प्रतिभाओं को सिर्फ अवसरों व प्रोत्साहन की जरूरत है। अनुप्रीत के मुताबिक उनके मम्मी-पापा कहते हैं कोई मां-बाप नहीं चाहेंगे कि उनकी पहचान बच्चों खासकर बेटियों से हो। बेटियां सफलता का आसमान छूए बस इसी उम्मीद से जो बन पा रहा है कर रहे हैं।


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