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बैडमिंटन का छोटा हैदराबाद बन रहा सोनीपत

Posted On November - 21 - 2016
 सोनीपत बैडमिंटन कोचिंग सेंटर के खिलाड़ी।

सोनीपत बैडमिंटन कोचिंग सेंटर के खिलाड़ी।

पुरुषोत्तम शर्मा, सोनीपत
बैडमिंटन का जिक्र हो और हैदराबाद का नाम न आये, यह तो संभव नहीं है। लेकिन धीरे-धीरे से सोनीपत शहर भी बैडमिंटन में छोटे हैदराबाद का रूप ले रहा है। यह संभव हो पाया है, यहां के प्रतिभावान खिलाड़ियों और इनके हुनर को निखार रहे कोच प्रदीप पालीवाल के प्रयास से। ये खेल अब नौजवानों की आदत में शुमार होने लगा है, तो शहर के खिलाड़ी राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। चुनिंदा बच्चों के साथ शुरू किया गया यह कारवां अब सैकड़ों में पहुंच गया है, तो हर दूसरा बच्चा किसी न किसी प्रतियोगिता का हिस्सा है। इतना ही नहीं इस सेंटर के दर्जनों खिलाड़ी देश की सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। ऐसे में यहां आने वाले नये खिलाड़ी भी उत्साहित हैं और अभिभावकों का भी हौसला बन रहा है। प्रदेश सरकार के अंतर्गत लिटल एंजेल्स स्कूल में चलाए जा रहे सोनीपत बैंडमिंटन कोचिंग सेंटर के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं। इसका पूरा श्रेय जाता है कोच प्रदीप पालीवाल को। कुछ समय पहले तक सोनीपत के खिलाड़ियों को बैडमिंटन की प्राथमिक जानकारी भी नहीं थी। परंतु एक व्यक्ति की लग्न और मेहनत ने इस शहर को बैडमिंटन का हब बना दिया। समय जरूर ढाई दशक का लगा, लेकिन आज युवाओं में इस खेल का क्रेज देखते ही बनता है।

ऐसे चला  कामयाबी का कारवां
बैडमिंटन कोच प्रदीप पालीवाल वर्ष 1991 में गुड़गांव से स्थानांतरित होकर सोनीपत आये, तो तब जिला खेल अधिकारी कार्यालय में उनका मजाक बनाया जाता था कि कुश्ती-कबड्डी की धरती पर ये शहरी खेल कहां से लेकर आ गए। इसके बावजूद कोच पालीवाल ने हार नहीं मानी और वे साइकिल पर ही रैकेट, शटल व नेट लेकर अपनी मंजिल की तरफ निकल पड़े। पालीवाल ने शुरुआत में प्राइवेट स्कूलों की ओर कदम बढ़ाया। उन्होंने शंभू दयाल माडर्न स्कूल, जानकीदास कपूर पब्लिक स्कूल, होली चाइल्ड व हिंदू विद्यापीठ को आगे बढ़ते हुए  यहां के विद्यार्थियों को बैंडमिंटन खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। इनकी प्रेरणा रंग लाई और कुछ छात्रों ने बैंडमिंटन की कोचिंग लेना प्रारंभ कर दिया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने एसएम हिंदू वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बैंडमिंटन सेंटर की स्थापना की। यहां पर कोच पालीवाल ने बैंडमिंटन की कोचिंग देने की शुरुआत की। महज 3 वर्षों के कोच के समर्पित प्रयास और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत ने सफल परिणाम दिए। प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर सोनीपत के बैंडमिंटन खिलाड़ियों ने सफलताओं के झंडे गाड़ना शुरू किया, तो लोगों का ध्यान इस खेल की तरफ बढ़ा। प्रदीप पालीवाल बताते हैं कि शुरुआत में बैंडमिंटन को शहरी व लड़कियों का खेल कहा जाता था। चुनौतियां भरपूर थीं, किंतु लक्ष्य से नजरें नहीं हटीं। आज सोनीपत का बैंडमिंटन कोचिंग सेंटर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान रखता है। उन्होंने दावा किया कि सेंटर का कोई भी खिलाड़ी बेरोजगार नहीं है। इसका कारण यह है कि यहां खिलाड़ियों को लगातार पढ़ाई के लिए भी प्रेरित किया जाता है। उन्होंने कहा कि सेंटर में कोचिंग के लिए आने वाले बच्चों को पढ़ाई के लिए विशेष तौर पर प्रोत्साहित किया जाता है। बैंडमिंटन के खिलाड़ी खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी सफलता हासिल कर रहे हैं। बैंडमिंटन की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज सोनीपत में निजी तौर पर 7 बैंडमिंटन अकादमी भी चल रही हैं।

11911CD _04अब लिटल एंजेल्स में चल रहा सेंटर
कुछ वर्ष पूर्व बैंडमिंटन कोचिंग सेंटर को लिटल एंजेल्स स्कूल में स्थानांतरित किया गया, यहां स्कूल ने नि:शुल्क रूप से 3 एसी बैंडमिंटन कोर्ट मुहैया कराये हैं। ऐसा कोर्ट पूरे हरियाणा में कहीं और नहीं है। ऐसे में खिलाड़ियों को विशेष सुविधा मिली है। नतीजा सेंटर में इस समय करीब 80 महिला-पुरुष खिलाड़ी कोचिंग ले रहे हैं। इनमें 25 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर के हैं और आधा दर्जन खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हैं। इनमें रोहन, जयंत, ललित, नीरज व अरुण के नाम शामिल हैं। कोच पालीवाल बताते हैं कि सेंटर के ढाई दशक के कार्यकाल में करीब 20 हजार महिला-पुरुष खिलाड़ी प्रशिक्षण ले चुके हैं। इनमें लगभग 1000 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा चुके हैं और करीब 150 खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेर चुके हैं।

11911CD _03डीयू में आसानी से मिलता है दाखिला
पालीवाल कहते हैं कि सेंटर के खिलाड़ी खेलों के दम पर दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला आसानी से पाते हैं। सेंटर से निकले खिलाड़ी विविध व्यवसायों में नाम कमा रहे हैं। वहीं, इस सेंटर के नन्हे खिलाड़ी शहीदों, फौजियों और गरीबों व जानवरों के लिए कुछ कर गुजरने की चाहत रखते हैं। कोमल सरोहा आईपीएस बनना चाहती है और ओलंपिक में देश का नाम रोशन करना चाहती है, जिससे मिलने वाली पुरस्कार राशि को वे शहीदों व फौजियों और गरीबों के कल्याण के लिए देना चाहती हैं। यही चाहत कृतिका व अपूर्वा की भी है। नन्ही खिलाड़ी खुशी आंतिल विश्व स्तर पर देश के लिए पदक जीतना चाहती है। इससे उन्हें मिलने वाली इनाम राशि को जानवरों के कल्याण के लिए दान करने की इच्छा रखती हैं।

यूएसए काउंटी क्लब में भी म्हारे छोरे
पालीवाल कहते हैं कि इस सेंटर की देन अभिषेक अहलावत व अंकित छिक्कारा अमरीका में यूएसए काउंटी में क्लब की ओर से खेलते हैं। इन्हें यूएसए ने ग्रीन कार्ड जारी किया है। इसी सेंटर के खिलाड़ी रहे आईएएस विवेक पदम सिंह संयुक्त वित्तायुक्त के पद पर हैं। सेंटर के करीब 30 खिलाड़ी रेलवे में कार्यरत हैं। सेंटर के खिलाड़ी सुनील दहिया व राहुल वर्मा न्यूजीलैंड की ओर से खेलते हैं। मेलबर्न में कंप्यूटर साइंस विभाग के अध्यक्ष कीर्ति सिंह और मैक्स अस्पताल में डीएम डॉ.सुधांशु राय इसी सेंटर से कोचिंग लेते थे। कोच पालीवाल की बेटी वृंदा भी बैंडमिंटन की स्टेट चैंपियन रह चुकी हैं। फिलहाल वे पीजीआई रोहतक से एमबीबीएस कर रही हैं और गत कुछ वर्षों से पीजीआई की बैंडमिंटन चैंपियन का खिताब भी अपने नाम कर रही हैं।

2020 के ओलंपिक में होंगे म्हारे लाडले
सोनीपत बैडमिंटन कोचिंग सेंटर के 2 खिलाड़ी वर्ष 2020 में होने वाले ओलंपिक खेलों में दमखम दिखायेंगे। पालीवाल के अनुसार कार्तिक पावा व सौरभ शर्मा को कैंप के लिए चुना गया है। ये दोनों खिलाड़ी चीफ कोच गोपीचंद के नेतृत्व में हैदराबाद में इंडिया कैंप में अभ्यास कर रहे हैं। इतना ही नहीं, सेंटर के खिलाड़ियों ने कई बार ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। सेंटर के प्रतिभाशाली खिलाड़ी नीरज वशिष्ठ हरियाणा के पहले खिलाड़ी हैं, इन्होंने पुरुष वर्ग में इंडिया नंबर एक का खिताब अपने नाम किया। बैडमिंटन लीग में नीरज को मणिपुर ने खरीदा था और आज वे आयकर विभाग में इंसपेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उभरती प्रतिभा जयंत राणा ने अंडर-15 आयुवर्ग में इंडिया नंबर एक का खिताब अर्जित किया है। सेंटर के दमदार खिलाड़ी ललित दहिया स्कूली खेलों में अंडर-19 आयुवर्ग में इंडिया नंबर एक व नॉर्थ इंडिया नंबर एक बन चुके हैं। सगे भाइयों सूरज व लक्ष्य ने अंडर-17 आयुवर्ग में स्कूली स्तर पर इंडिया नंबर एक बने हैं। इसी प्रकार बैंडमिंटन की सनसनी बन रही निकिता हरियाणा स्टेट नंबर एक और नॉर्थ इंडिया नंबर एक बन व महिला वर्ग में नंबर-2 खिलाड़ी बन चुकी हैं।


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