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एमबीए, सीए की डिग्री लेकर खेतों में फूल उगा रहीं दो युवतियां

Posted On December - 1 - 2016
अपने खेत में काम करती वामिका और शिवानी माहेश्वरी। िनस

अपने खेत में काम करती वामिका और शिवानी माहेश्वरी। िनस

यह कहानी अनूठी है, इसका सबक यह है कि आपके पास अगर शिक्षा है और आप कुछ कर गुजरना चाहते हैं तो फिर कोई आपको नहीं रोक सकता। एमबीए और चार्टर्ड एकाउंटेंट की डिग्री हासिल करने के बाद ज्यादातर युवा आलीशान दफ्तरों की तरफ भागते हैं, ताकि अच्छे पैकेज की नौकरी मिल सके। लेकिन यहां दो युवतियों ने इन डिग्रियों को लेकर खेतों की तरफ रूख कर लिया। अब वे खेतों में फूल उगाती हैं, कहती हैं- हमने पूरी तैयारी की है, इस पेशे को समझ लिया है, अगर सिस्टम से किया जाए तो खेती नुकसान का सौदा नहीं है।
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वामिका बाहेती और शिवानी माहेश्वरी दिन के करीब 5 से 6 घंटे बहादुरगढ़ के नजदीक स्थित टांडाहेड़ी गांव में अपने नेट फार्म हाउस में खेती करती हैं। आधुनिक खेती का बारीकी से अध्ययन कर दोनों युवतियों ने खेती से दूर हो रहे युवा वर्ग के लिये नई मिसाल पेश की है। 10 एकड़ में फैला यह नेट हाउस फूलों की खुशबू से महकता रहता है। आखिर यहां सूझबूझ और मेहनत के बीज भी जो बोए जाते हैं।  दोनों हर रोज अपने खेत में आकर फसल की देखभाल करती हैं। सीए करने के बावजूद खेती को अपनाने वाली वामिका कहती हैं, पढ़ाई के दौरान मैंने इस बात को समझा कि हमारा देश कृषि प्रधान है, लेकिन इसके बावजूद परंपरागत खेती से किसानों को फायदे की जगह नुकसान हो रहा है। ऊपर से बढ़ते उद्योग-धंधों की वजह से  खेत कम हो रहे हैं, जिसके कारण खेती के लिये जमीन और युवा इच्छाशक्ति कम हो रही है। वामिका के अनुसार, इसी के चलते मैंने आधुनिक खेती के तौर तरीके देखे और सीखे जिसके बाद बहुत ही अनुभवी किसान सिलक राम व पवन दलाल के मार्गदर्शन में नेट फार्मिंग में कदम रखा है।
वहीं शिवानी माहेश्वरी का कहना है कि नेट फार्मिंग कम जमीन में ज्यादा मुनाफे की खेती है। उनके मुताबिक वे यह साबित करना चाहती हैं कि खेती घाटे का नहीं फायदे का सौदा है, लेकिन इसके लिये किसानों को परंपरागत खेती से हटकर आधुनिक खेती में कदम रखना होगा। शिवानी का कहना है कि आधुनिक खेती से कम जमीन में अधिक पैदावार और वो भी बिना कैमिकल और दवाइयों के ली जा सकती है।
 पीएम नरेंद्र मोदी से मिली प्रेरणा
दोनों युवतियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आधुनिक खेती को लेकर दिये प्रोत्साहन से भी उन्हें प्रेरणा मिली है। वामिका और शिवानी ने अपने सपने को पूरा करने के लिए टांडाहेड़ी गांव में 10 एकड़ जमीन में नेट फार्म लगवाया जहां पहले साल दोनों ने फूलों की खेती से काफी पैसा भी कमाया। इसके बाद उन्होंने खीरे और टमाटर की पैदावार पर भी ध्यान देना शुरू किया है।
दिल्ली के बाजार में मिलती है अच्छी कीमत
वामिका के अनुसार हम करीब 5 एकड़ में गुलदाऊदी, जरवेरा और ग्लैड जैसे फूल भी लगाये हैं जिनकी दिल्ली के बाजार में बड़ी मांग है। एक-एक फूल 40 से 50 रुपये में बिकता है और प्रति एकड़ करीब दो लाख फूलों के पौधे लगाये हुए हैं। शिवानी के अनुसार नेट फार्मिंग में पौधों की देखभाल और सही रखरखाव में काफी तकनीकी ज्ञान और अनुभव की जरूरत होती है।
नेट फार्मिंग कम पानी की खेती है। इसके कारण खेतों में व्यर्थ जाने वाला पानी बेहतर इस्तेमाल में लाया जाता है। नेट फार्म के पास दोनों युवतियों ने करीब 5 लाख लीटर क्षमता का वाटर स्टोरेज टैंक भी बनाया है। वामिका और शिवानी से प्रेरित होकर क्षेत्र के गांवों के कई अन्य किसानों ने भी नेट हाउस लगाकर खेती शुरू की है। आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिये हरियाणा सरकार भी पोली हाउस पर 65 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है।
 * रोहित विद्यार्थी, बहादुरगढ़


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