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चुपके-से नजर चुराये मीठा

Posted On December - 7 - 2016

15 copyहमारे देश में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां तक कि बच्चों और युवाओं को भी यह रोग घेर रहा है। करीब 41 करोड़ लोग इससे जूझ रहे हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन का अनुमान है कि 2040 तक यह आंकड़ा 64 करोड़ तक पहुंच सकता है। यह हमारी सेहत को कई तरह से प्रभावित करती है, यह आंखों के लिए भी बड़ीा खतरा बन सकती है। अकसर लोग इस बात से अनजान होते हैं कि डायबिटीज के कारण आंखों की रोशनी पूरी तरह खत्म भी हो सकती है। डायबिटिक रेटिनोपैथी (डीआर), डायबिटिक मैक्युलर एडिमा (डीएमई), मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसे कई रोग डायबिटीज के कारण हो सकते हैं। यह कब घेर लें, पता ही नहीं चलता।

घेर सकती हैं ये बीमारियां
डायबिटिक रेटिनोपैथी (डीआर) : डायबिटीज के कारण आंखों को नुकसान के ज्यादातर मामले डायबिटिक रेटिनोपैथी  के ही होते हैं। यह अंधेपन का एक बड़ा कारण है। इसमें रेटिना (आंखों के पीछे का पर्दा) की रक्त धमनियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और खून फैल जाता है। जब तक दिखना कम नहीं होने लगता, तब तक इस बीमारी का पता नहीं चल पाता। यह बीमारी आमतौर पर 20 से 74 साल की उम्र के लोगों को घेरती है और यह 3 तरह की होती है…
बैकग्राउंड डीआर : हालांकि यह आंखों को ज्यादा प्रभावित नहीं करती, लेकिन इस पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए आंखों की नियमित जांच कराते रहें। सामान्यत: बीमारी  का यह शुरुआती चरण होता है, जिसमें लक्षणों का पता नहीं चलता।
प्रोलिफेरेटिव डीआर : इसमें रेटिना के इर्द-गिर्द की रक्त धमनियों में रक्तस्राव होने लगता है और देखने में दिक्कत महसूस होती है।
डायबिटिक मैक्युलोपैथी : इसमें आंखों के बीच का हिस्सा प्रभावित होता है धुंधला दिखने लगता है।
डायबिटिक मैक्युलर एडिमा (डीएमई) : यदि डायबिटिक रेटिनोपैथी का इलाज न किया जाये तो बीमारी बढ़ जाती है। आंख पर दबाव बढ़ जाता है और रेटिना के मैक्युला नाम के हिस्से में सूजन आने लगती है। इस स्थिति को डायबिटिक मैक्युलर एडिमा कहा जाता है। धुंधलापन, धब्बे दिखना और एक के बजाय दो-दो चीजें नजर आना इसके लक्षण हैं। इसके कारण व्यक्ति दृष्टिहीन भी हो सकता है।
मोतियाबिंद : डायबिटीज से पीड़ित लोगों को कम उम्र में मोतियाबिंद की समस्या हो सकती है। यह समस्या आमतौर पर आंख के लेस में शर्करा का स्तर बढ़ने से सूजन के कारण होती है।
 ग्लूकोमा : यह बीमारी आंख और दिमाग के बीच की ऑप्टिक नर्व प्रभावित करती है। ग्लूकोमा आमतौर पर आंख में दबाव बढ़ने पर होता है। गंभीर मामलों में इसके कारण दृष्टि पूरी तरह खत्म हो सकती है। धुंधलापन, आंखों में दर्द, सिर दर्द, मिचली, रोशनी में रंगदार गोले दिखना ग्लूकोमा के लक्षण हैं। इन्हें नजरंदाज नहीं करना चाहिये।
समय पर इलाज जरूरी है।

रखें ध्यान…
RUN copyलक्षणों को पहचानकर समय पर इलाज और नियमित जांच से डायबिटीज के कारण आंखों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।  इससे बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है…

  • डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए डॉक्टर की सलाह, दवा और खानपान का बेहद ध्यान रखें।
  • शारीरिक तौर पर सक्रिय रहें। जीवनशैली का डायबिटीज पर बड़ा असर पड़ता है। एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनायें।
  • शरीर का वजन नियंत्रित रखें। मोटापे के कारण डायबिटीज का खतरा  बढ़ता है। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि शरीर का वजन थोड़ा कम करके भी फायदा मिल सकता है।
  • डायबिटीज से पीड़ित हैं तो साल में कम से कम एक बार आंखों की पूरी जांच जरूर करवायें।

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