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जनता के दरबार में, जनता के नाम पर, जनता के पैसे की बर्बादी

Posted On December - 16 - 2016

लोकतंत्र में जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का शासन होता है। जनता के प्रतिनिधि के रूप में सांसद जनता की आवाज संसद में उठाते हैं। लेकिन 16 नवंबर से 16 दिसंबर तक चले संसद सत्र में हंगामा तो हुआ पर काम नहीं। पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। 21 दिन के सत्र में जनता के 180 करोड़ रुपये बर्बाद हो गये। जनता से संबंधित 11% सवाल ही पूछे जा सके। 

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1 मिनट ढाई लाख का
20 दिन में 180 करोड़ का नुकसान
संसद सत्र में कार्यवाही के दौरान सांसदों के भत्ते व अन्य खर्च को लगाया जाए गो 1 मिनट की कार्यवाही पर 2.5 लाख रुपये खर्च होते हैं। 1 घंटे का खर्च 1.5 करोड़ रुपये और पूरे 1 दिन का खर्च 9 करोड़ रुपये होता है। इस तरह, 21 दिन से संसद ठप होने से 180 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।

आपके पैसे से चलती है
कमाकर दिये टैक्स से होता है खर्च
संसद की कार्यवाही के लिए जो इतने पैसे खर्च किए जाते हैं वो कहां से आते हैं? वो आते हैं हमारी और आपकी कमाई से। दिनरात हम और आप जी तोड़ मेहनत करके पैसा कमाते हैं फिर सरकार उस पर टैक्स वसूलती है, जिससे सरकारी खजाना भरता है। उसी खजाने से संसद की कार्यवाही पर पैसा खर्च होगा है।

काम नहीं, साइन के ही पैसे
संसद जाने पर हर रोज 2000 रुपये
लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों को वैसे तो वेतन व अन्य भत्ते मिलते हैं, लेकिन संसद सत्र के दौरान उन्हें सदन की कार्यकवाही में हिस्सा लेने के ही 2000 रुपये मिलते हैं। अगर सांसद संसद भवन जाकर वहां रजिस्टर में हस्ताक्षर करते हैं तो उन्हें यह राशि मिलनी तय है। फिर इसके बाद वह सदन में कोई प्रश्न पूछे या हंगामा करे। काम हो या न हो उनका यह भत्ता उन्हें मिलता है।

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद  इस सत्र में कम काम
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार के ढाई साल के कार्यकाल के दौरान संसद के 8 सत्र हुए हैं। इससे पहले इस साल के मानसून सेशन-2015 में लोकसभा की प्रोडक्टिविटी 48% रही थी। मानसून सेशन-2015 में ही राज्यसभा की प्रोडक्टिविटी सबसे कम 9% रही थी। हालांकि, इस सेशन में दोनों सदनों की औसत प्रोडक्टविटी 28.5% रही थी।  2010- 2014 के बीच संसद के 900 घंटे बर्बाद हुए, ताे साेचिए कितना पैसा बर्बाद हुअा हाेगा।

जीएसटी बिल भी अटका
शीतकालीन सत्र में कई जरूरी बिल पेश होने थे। लेकिन हंगामे की वजह से यह संभव नहीं सका और सिर्फ दो बिल ही पास हो सके। इनमें एक टैक्सेशन अमेंडमेंट बिल था, दूसरा राइट्स ऑफ पर्सन्स डिसेबिलिटी बिल-2014। टैक्सेशन अमेंडमेंट बिल भी इसलिए पास हुआ, क्योंकि यह वित्त बिल था, जिसे राज्यसभा से पास होना जरूरी नहीं था। जबकि 22 बैठकों में जीएसटी पर तीन बिल पास होने थे। एक सेंटर का जीएसटी बिल, दूसरा इंटिग्रेटेड जीएसटी बिल और तीसरा जीएसटी से राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई तय करने वाला बिल।

9 बिल होने थे पेश
इस सत्र में कुल 9 बिल पेश होने थे। इनमें सरोगेसी (रेग्युलेशन), नेवी ट्रिब्यूनल बिल-2016, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बिल, डिवोर्स अमेंडमेंट बिल-2016 और स्टैटिस्टिक्स एग्रगेशन अमेंडमेंट बिल-2016 भी शामिल थे। सत्र के दौरान दो बिल पर लोकसभा में चर्चा होने के आसार थे, जो राज्यसभा से पास हो चुके हैं। इन बिलों में मेंटल हेल्थ केयर बिल-2016 और मैटरनिटी बेनिफिट्स अमेंडमेंट बिल-2016 शामिल था।

इन मुद्दों पर सदन में हुआ हंगामा
INDIA-POLITICS-PARLIAMENTनोटबंदी का विरोध
संसद के शीतकालीन सत्र में पहले नोटबंदी को लेकर हर दिन हंगामा होता रहा। विपक्ष की मांग थी कि पीएम की मौजूदगी में सदन में नोटबंदी पर चर्चा हो। कांग्रेस ने वोटिंग के तहत सदन में चर्चा की मांग की, जबकि सरकार इस पर राजी नहीं हुई। बाद में पीएम कई मौकों पर सदन में मौजूद रहे, लेकिन हंगामा नहीं थमा। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर चर्चा नहीं करने का आरोप लगाते रहे। बता दें कि शीतकालीन सत्र के शुरू होने से करीब एक सप्ताह पहले ही प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का एलान किया था, जिसके बाद सरकार सदन में विपक्ष के निशाने पर रही।

रिजिजू पर आरोप
नोटबंदी के बाद संसद में किरेन रिजिजू का मुद्दा भी छाया रहा। मामले में कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का इस्तीफा मांगा। कांग्रेस ने इस मामले में एक ऑडियो भी जारी किया था। बता दें कि किरेन रिजिजू पर अरुणाचल हाइड्रो प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगा है।

कितना वक्त किस पर लगा
लोकसभा        राज्यसभा
* सवालों पर            36%             0%
* विधायी कामकाज पर         3%              1%
* गैर-विधायी कामकाज पर         31%             62%
* वित्तीय कामकाज पर         5%               0%
* अन्य कामकाज पर             24%               37%

विपक्ष कहता रहा-पीएम संसद में आकर बोलें
पूरे सत्र के दौरान विपक्ष यह मांग करता रहा कि प्रधानमंत्री सदन में आएं और नोटबंदी पर अपनी बात रखें। विपक्ष की ओर से यह कहा जाता रहा कि प्रधानमंत्री संसद का सामना करने से बचना चाह रहे हैं।

पीएम कहते रहे-उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा
सत्ता पक्ष की ओर से यह दलील दी जाती रही कि प्रधानमंत्री संसद में बोलना चाहते हैं, लेकिन विपक्ष उन्हें बोलने नहीं दे रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी जनसभाओं में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बात कही।

इनकी भी न सुनी
pranab-mukherjee_650x488_71440825710भगवान के लिए अपना काम कीजिए
शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में चल रहे लगातार हंगामे पर राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गहरी नाराजगी जताई थी। राष्ट्रपति ने सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे गतिरोध को खत्‍म करने की अपील करते हुए कहा कि संसद की कार्यवाही में बाधा किसी भी सूरत में स्‍वीकार्य नहीं है। प्रणब ने कहा, ‘संसदीय प्रणाली में कामकाज में बाधा डालना पूरी तरह अस्वीकार्य है। लोग अपने प्रतिनिधियों को बोलने के लिए भेजते हैं, धरना पर बैठने के लिए नहीं, और न ही सदन में दिक्कतें पैदा करने के लिए। बाधा पैदा करने का मतलब है कि आप चोट पहुंचा रहे हैं, आप बहुमत की आवाज दबा रहे हैं। सिर्फ अल्पमत ही सदन के बीचोंबीच आता है, नारेबाजी करता है, कार्यवाहियां रोकता है और ऐसे हालात पैदा करता है कि अध्यक्ष के पास सदन की कार्यवाही स्थगित करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होता। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। नोटबंदी के लिए आप कोई और जगह चुन सकते हैं। लेकिन भगवान के लिए, अपना काम करें। आपको कामकाज करना होता है। आपको सदस्यों के अधिकारों का इस्तेमाल करने, खासकर लोकसभा सदस्यों को धन और वित्त के मुद्दे पर कामकाज में अपना वक्त देना होता है।’

Lalkrishan Advaniसंसद हार जाएगी, हम बदनाम होंगे
लोकसभा में जारी गतिरोध पर वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी का दो बार आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के मुद्दे पर चर्चा किए बिना यदि लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई तो ‘संसद हार जाएगी और हम सब की बहुत बदनामी होगी। आडवाणी ने हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित होने के बाद आक्रोश जताते हुए कुछ अन्य दलों के सदस्यों के साथ बातचीत में कहा, मेरा तो मन कर रहा है कि इस्तीफा दे दूं। सब को लगी है , मैं जीतूं , मैं जीतूं…लेकिन इसमें संसद की हार होगी। इससे पहले आडवाणी ने सुझाव दिया था कि जो सांसद संसद की कार्रवाई नहीं चलने दे रहे हैं उनके वेतन-भत्ते काट लेने चाहिए।

11612CD _PRAKASH_JAVDEKARसंसद आ रहे छात्रों को क्या दिखाऊं
संसद में गतिरोध से पर मोदी सरकार में केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी नाखुशी ज़ाहिर की थी। केंद्रीय विद्यालय स्कूलों के स्थापना दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम में प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सदन देखने आने वाले केंद्रीय विद्यालय के छात्रों को आखिर मैं क्या दिखाऊं। संसद की कार्यवाही देखने आने वाले विद्यार्थियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। मैं सोचता हूं कि कार्यवाही देखने आने वाले केंद्रीय विद्यालय के छात्रों को मुझे क्या दिखाना चाहिए। क्या मुझे उन्हें यह दिखाना चाहिए कि संसद में किस तरह का ‘हंगामा’ होता है… यहां वे अनुशासन का पाठ पढ़कर आएंगे, लेकिन यहां से वह अनुशासनहीनता सीखकर जाएंगे…।


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