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पिता चाय बेचते हैं, बेटे ने जीती चांदी

Posted On December - 12 - 2016
पिहोवा : स्कूल स्टाफ के साथ सौरव और िवपिन

पिहोवा : स्कूल स्टाफ के साथ सौरव और िवपिन

सुभाष पौलस्त्य, पिहोवा
मेहनत करने का जज्बा और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। कुरुक्षेत्र जिले के गांव मिर्जापुर के रहने वाले सौरव व कमोदा के विपिन अपनी मेहनत के बल पर ही एक के बाद एक सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं। बिल्कुल सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले परिवार के ये दोनों होनहार साइकिलिंग में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। खास बात यह है कि विपिन के पिता सब्जी मंडी में चाय की दुकान चलाते हैं। इसी छोटी-सी दुकानदारी से घर का खर्चा भी चलता और विपिन व उसके भाई-बहनों की पढ़ाई का प्रबंध भी। वहीं सौरव के पिता सरकारी कोच हैं।
सौरव-विपिन पिहोवा के बाबा श्रवण नाथ वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पढ़ते हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में आयोजित नेशनल स्तर की साइकिलिंग प्रतियोगिता में उन्होंने सोना-चांदी जीता है। इस प्रतियोगिता का आयोजन नेशनल साइकिलिंग फेडरेशन द्वारा किया गया था। 11वीं कक्षा के छात्र सौरव ने इसमें स्वर्ण पदक जीता है। सौरव को बचपन से ही साइकिलिंग का शौक है। उसके इसी शौक के चलते उसके माता-पिता ने उन्हें जिला कोच पंजाब सिंह और परमवीर सिंह के पास भेजना शुरू कर दिया। यहां उसने कड़ा अभ्यास किया और पहली बार 2012 में पुणे में आयोजित नेशनल स्तर की साइकिलिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इसके बाद 2013 तक कड़ा अभ्यास किया। फरवरी 2014 में उसने केरल में आयोजित नेशनल साइकिलिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर रजत पदक हासिल किया। इसके बाद सौरव ने गोल्ड मेडल जीतने का लक्ष्य तय कर लिया और शुरू कर दी कड़ी मेहनत। फरवरी 2014 में सिल्वर मेडल हासिल करने के बाद अक्तूबर 2016 के बीच सौरव ने कर्नाटक और केरल में आयोजित अनेक साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में भाग लिया लेकिन कोई पदक हासिल नहीं हुआ। सौरव ने बताया कि उसने हिम्मत नहीं हारी और अपना अभ्यास जारी रखा। नवंबर 2016 में अलीगढ़ में आयोजित नेशनल स्तर की साइकिलिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। यह उसकी कड़ी मेहनत का ही परिणाम था इस प्रतियोगिता में वह गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रहा।

पिहोवा : स्वर्ण पदक विजेता सौरव।

पिहोवा : स्वर्ण पदक विजेता सौरव।

कोच और पिता ने बढ़ाया हौसला : गोल्ड मेडल विजेता सौरव ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने कोच परमवीर सिंह और पंजाब सिंह को दिया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता नरेश कुमार बाबा श्रवण नाथ स्कूल में शारीरिक शिक्षा के अध्यापक हैं। उन्होंने भी उनका काफी मार्गदर्शन किया है। अब एशियाई खेलों में गोल्ड लक्ष्य सौरव ने बताया कि एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतकर लाना उनका मुख्य लक्ष्य है। इसके लिए वह कड़ा अभ्यास कर रहे हैं।

दिन-रात किया अभ्यास
वहीं बाबा श्रवण नाथ वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के ही छात्र विपिन सैनी ने राष्ट्रीय स्तर की साइकिलिंग चैंपियनशिप में तीन बार रजत पदक जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया। विपिन ने अपने साइकिलिंग कैरियर की शुरुआत मार्च 2014 से की थी। उसने भी ट्रेनिंग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में साइकिलिंग कोच परमवीर व पंजाब सिंह से ली। एक साल की ट्रेनिंग के बाद उसने कर्नाटक, पुणे व केरल में राष्ट्रीय साइकिलिंग फैडरेशन की ओर से आयोजित साइकिलिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया, लेकिन कोई पदक नहीं मिल पाया। इसके बाद विपिन ने दिनरात अभ्यास किया। 2016 फरवरी में केरल आयोजित राष्ट्रीय साइकिलिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और दो रजत पदक हासिल कर कामयाबी हासिल की। सिल्वर मेडल मिलने के पश्चात विपिन के हौसले बुलंद हो गये और फिर से अभ्यास करने के लिए मैदान में जुट गया। गत नवंबर में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में राष्ट्रीय साइकिलिंग चैंपियनशिप आयोजित हुई जिसमें एक बार फिर कामयाबी हासिल करते हुए विपिन ने रजत पदक पर कब्जा किया। विपिन का कहना है कि उसकी कामयाबी के पीछे उसके कोच परमवीर सिंह का विशेष हाथ है। कोच ने उन्हें न केवल ट्रेनिंग दी बल्कि पूरे सामान का खर्च सहित अन्य सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाने में भी मदद की।

पिहोवा : रजत पदक विजेता विपिन।

पिहोवा : रजत पदक विजेता विपिन।

राष्ट्रीय स्तर पर जीते 3 रजत पदक
सिल्वर मेडल विजेता विपिन सैनी ने बताया कि पिहोवा की सब्जी मंडी में उसके पिता राजकुमार चाय की दुकान चलाते हैं। इसी दुकान से वे पूरे घर का खर्च चलाते हैं। विपिन के मुताबिक उनके पिता ने किसी चीज के लिए उनको कोई कमी नहीं आने दी। पिता की ओर से हौसला अफजाई की वजह से ही वह राष्ट्रीय साइकिलिंग प्रतियोगिता में 3 सिल्वर मेडल जीत सका है। विपिन ने बताया कि अब एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतना ही उसका मुख्य लक्ष्य है। इसके लिए वह निरंतर जी जान से अभ्यास कर कर रहे हैं।


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