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बचपन की शरारतों से बनी बाक्सिंग की राह

Posted On December - 19 - 2016

पुरुषोत्तम शर्मा, सोनीपत

 मैडल दिखाते पवन नरवाल व सचिन दलाल।

मैडल दिखाते पवन नरवाल व सचिन दलाल।

कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही पता चल जाते हैं। बशर्तें इसे देखने और समझने की सोच और नजरिया इंसान के पास हो। अगर आपका दृष्टिकोण सकारात्मक है, तो फिर जीवन में कुछ भी नकारात्मक नहीं हो सकता है। न ही कोई हार या प्रतिरोध आपका रास्ता रोक सकते। वह भी तब, जब एक किशोर को इतनी समझ आ जाए कि वह आपस में अपने दोस्तों और साथियों से लड़ने की बजाय, इस ऊर्जा को खेल में परिवर्तित क्यों ना कर दें। जिसके पास ऐसी सोच होती है, वह वास्तव में बड़े मुकाम को पाता है। ऐसी ही सोच का धनी है कबड्डी में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात रिढाणा गांव का उभरता बाक्सर पवन नरवाल।
बकौल पवन वह बचपन से बेहद शरारती रहा है। अपने साथ के बच्चों को पीटना और उनसे झगड़ा करना उसे बेहद पसंद था। रोजाना घर में एक-दो उलाहना नहीं आया, तो फिर मजा कैसा। परंतु इस बालक ने अपने इस अंदाज को ही अपनी योग्यता को पैमाना बना लिया। जानिये वह कैसे?
पवन ने सोचा कि वह क्यों ना कोई ऐसा खेल चुने, जिसमें मारधाड़ का ही काम हो, लेकिन यह मारधाड़ केवल बचपने तक सीमित न रह कर उसके करियर और जीवन का लक्ष्य बन जाए। तब उसे समझ आया बाक्सिंग का खेल। किसान ओमप्रकाश नरवाल के बेटे पवन नरवाल की माता राजबाल गृहणी हैं। वह फिलहाल, बीए प्रथम वर्ष में पढ़ाई कर रहा है। इससे पहले 2 वीं तक वो लिटिल एंजेल्स स्कूल सोनीपत का छात्र रहा। यहीं पर उसने कोच रोहताश सिंह के मार्गदर्शन में बाक्सिंग की शुरुआत की। वर्ष 2010 में पवन पहली बार रिंग में उतरा था। सबसे पहले उसने 2010 में स्कूल स्टेट खेलों में हिस्सा लिया और 14 वर्ष आयु वर्ग के 46 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीता।
पवन के जीवन में इस पदक ने ऐसा बदलाव लिया कि फिर उसने मुड़ कर नहीं देखा और पदकों की झड़ी लगा दी। पवन एक बेहतरीन बाक्सर ही नहीं, बल्कि मंझे हुए खिलाड़ी की तरह व्यवहार करते हैं। इनका मानना है कि वह अपने आइडियल खुद ही हैं। क्योंकि इनके जैसा दूसरा कोई हो ही नहीं सकता है। फिलहाल, पवन 69 किलोग्राम भारवर्ग में सीनियर यूथ कैंप में गया है। यहां पर विदेशी स्तर की बाक्सिंग की बारीकियां सीखने के साथ ओलंपिक क्वालीफाई करने के लिए अभ्यास कर रहा है। ताकि वह अगली बार ओलंपिक में देश को पदक लाकर दे सके।
दरोगा के बेटे ने पिता और भाई से अलग चुना अपना रास्ता : पवन के ही साथी झज्जर जिले के मांठोड़ी गांव निवासी महाबीर सिंह के बेटे सचिन दलाल ने भी पिता और भाई के खेल से इतर अपना रास्ता चुना। सचिन के पिता चंडीगढ़ पुलिस में दरोगा हैं। वे अपने समय के प्रदेश स्तरीय कबड्डी के खिलाड़ी रहे हैं। जबकि उसका बड़ा भाई सन्नी बीकॉम का छात्र है और प्रदेश स्तरीय फुटबाल का खिलाड़ी है। इससे अलग सचिन ने बाक्सिंग में अपना भाग्य आजमाया और सबको चकित कर दिया। हालांकि पिता चाहते थे कि वह कुश्ती में जाए।

 एक प्रतियोगिता में जीते गये कप के साथ सचिन दलाल।

एक प्रतियोगिता में जीते गये कप के साथ सचिन दलाल।

सचिन फिलहाल बीए की पढ़ाई कर रहा है। वह भी लिटिल एंजेल्स स्कूल की बाॅक्सिंग अकादमी में आगे बढ़ा और इस खेल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। सचिन कहते हैं कि वह जब छठी कक्षा में प्रताप स्कूल में पढ़ता था, तो पहली बार बाॅक्सिंग शुरू की थी। यहां पर रोहताश सिंह कोच से उनकी मुलाकात हुई। इसके बाद रोहताश सिंह कोच लिटिल एंजेल्स स्कूल में आए, तो सचिन भी उनके साथ ही यहां बेहतर प्रशिक्षण के लिए चला आया। इसी साल उसने यहां से 12वीं की परीक्षा पास की है। सचिन के नाम प्रदेश स्तर पर दर्जनों रिकाॅर्ड  दर्ज हैं, तो वह राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुका है। फिलहाल, दोनों दोस्त सचिन व पवन ओलंपिक के लिए तैयारी कर रहे हैं। सचिन बताता है कि वे रोजाना करीब चार घंटे रिंग में कड़ा अभ्यास करते हैं। इस दौरान एक-दूसरे की कमियों को जानने की कोशिश करते हैं, तो इसमें कैसे सुधार होगा, यह कोच बताते हैं। सचिन अखिल कुमार को अपना आदर्श मानते हैं और उसी की तरह बेहतरीन बाक्सर बनाने का सपना है।
सचिन दलाल के नाम राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कई रिकार्ड दर्ज हैं। सचिन ने 2015 में नेशनल स्कूल गेम्स में 54 किलोग्राम भारवर्ग में सोना जीता, 2016 में फिर से स्कूल नेशनल में 57 किलोग्राम में सोना, 2013 में हरियाणा स्कूल स्टेट चैंपियनशिप में भागीदारी की और रिंग में यह साबित किया कि वह बेहतरीन बाक्सर बनेगा। 20 मकें सब जूनियर चैंपिनशिप में गोल्ड, 2012 में ऑल इंडिया साई बाक्सिंग चैंपियनशिव में सिल्वर मैडल, 2013 में नेशनल स्कूल गेम्स में ब्रांच मेडल, सब जूनियर बाक्सिंग चैंपियनशिप 2011 में सिल्वर मैडल, पायका हरियाणा 2012 में सिल्वर मैडल, सब जूनियर मैन्स स्टेट बाक्सिंग में ब्रोंज मैडल सचिन दलाल ने जीता। इसके अलावा जिला व प्रदेश स्तर की कई प्रतियोगिताओं में वह पदक जीत चुका है। वह ओलंपिक के लिए 56 से 60 किलोग्राम भारवर्ग के लिए तैयारी कर रहा है।

यह उपलब्धियां हैं पवन नरवाल के नाम
पवन ने 2012 में स्कूल नेशनल गेम्स में गोल्ड मैडल जीता। इसके बद 2014 में फिर से इसी प्रतियोगिता में गोल्ड पाया। ऑल इंडिया साई रीजनल चैंपियनशिप में गोल्ड, पायका नेशनल खेल में गोल्ड, ऑल इंडिया सब जूनियर नेशनल में ब्रांज मैडल, राजीव धनखड़ मैमोरियल बाक्सिंग में ब्रांज मैडल, आल इंडिया इंटर साई रीजनल चैंपियनशिप में सिलवर मैडल, स्कूल नेशनल गेम्स 2016 में गोल्ड मैडल के अलावा राज्य स्तरीय एक दर्जन से अधिक प्रतियोगिता में वह अब तक करीब आठ गोल्ड मैडल, दो सिलवर मैडल तथा चार ब्रांज मैडल जीत चुका है।


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