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मन भी मांगे आराम

Posted On December - 21 - 2016

रेनू सैनी
12112cd _Relaxing_kratomजीवन में आगे बढ़ने की कसक और ऊंचाइयां पाने की चाहत अकसर लोगों को काम में इतना डुबो देती है कि वे भूल जाते हैं कि विश्राम भी जिंदगी में जरूरी है। स्कूल, दफ्तर से लेकर दुकानों तक का ब्रेक का एक निश्चित दिन होता है। लेकिन हमारे मन व व्यक्तित्व के विश्राम का दिन कौन-सा है? क्या आपने ऐसा कोई दिन तय किया है? शायद नहीं। मन में ढेरों चिंताएं, तनाव पलते रहते हैं। छुट्टी के दिन ऑफिस की नहीं तो अन्य कामों की चिंता मन को घेरे रहती है। कहां शांत रहता है मन? हम यह जानकर भी अंजान बने हुए हैं कि खुद को थोड़ा विश्राम देकर, शांति को जीवन का अंग बना सकते हैं। मुनि गणेश वणी कहते हैं, ‘जिसके अंतरंग में शांति है, उसे बाहरी वेदना कभी कष्ट नहीं दे सकती।’
विज्ञान के अनुसार लंबे समय तक दिमाग को जब एक ही तरह के इनपुट मिलते हैं, तो उनके प्रति उसकी प्रतिक्रिया कम होती जाती है। उसे बोरियत महसूस होने लगती है। विंस्टन चर्चिल और जॉन डी. रॉकफेलर ने अपने जीवन में न सिर्फ महत्वपूर्ण सफलताएं अर्जित की, बल्कि अपने जीवन में समय-समय पर विश्राम भी लिया और उसका आनंद भी उठाया। द्वितीय महायुद्ध के दौरान चर्चिल सत्तर साल की आयु में भी 16 घंटे काम करते थे। उनके काम करने का तरीका ऐसा था कि काम के साथ-साथ विश्राम भी सहजता से हो जाता था। जॉन डी. रॉकफेलर विश्व के सबसे धनी व्यक्ति थे। उन्होंने 98 वर्ष की आयु पाई। वह रोज अपने दफ्तर में आधे घंटे का विश्राम लेते थे। इस विश्राम के दौरान वह झपकी लेते थे, खुद को शांत रखते थे। अपने दिमाग से सभी तरह के तनाव, काम और परेशानियों को निकाल कर बस खुद के साथ रहते थे।
दिल को भी टटोलता है ऐसा आराम   
विश्राम का अर्थ ही यही है कि इस दौरान रोजमर्रा की दिनचर्या से निकलकर खुद को बिल्कुल खाली कर दिया जाए। जब दिमाग और व्यक्तित्व शून्यचित्त हो जाता है, तो उसमें नये सिरे से नवीन योजनाएं और काम अपनी जगह बना लेते हैं। इस तरह दिमाग में उन कार्यों और समस्याओं के हल खुद ही निकल आते हैं, जो लगातार काम करते हुए नज़र नहीं आते। व्यक्ति लगातार काम में डूबा रहे तो वह चिड़चिड़ेपन के साथ ही मानसिक व शारीरिक रूप से अशक्त भी हो जाता है। विश्राम व्यक्ति के हृदय को टटोलता है, उसकी व्यस्तता के बोझ को कम करता है और उसमें स्फूर्ति का संचार करता है। यही कारण है कि विश्राम के बाद लोग खुद को तरोताजा और स्वस्थ पाते हैं।

12112cd _backजरूरी नहीं कि कहीं दूर घूमने जायें, बस थोड़ा वक्त निकालें
डेनियल डब्लू जोसलिन ने अपनी किताब ‘व्हाई बी टायर्ड’ में लिखा है कि ‘विश्राम का मतलब बेकार पड़े रहना नहीं है। आराम का मतलब है-शक्ति की क्षतिपूर्ति करना।’ काम के बीच थोड़ा विश्राम लेने से अधिक व सर्वश्रेष्ठ काम किए जा सकते हैं। इसलिए दूसरों से आगे निकलने की होड़ में अपने विश्राम से समझौता करना समझदारी नहीं है। विश्राम करते हुए काम करिये, आप खुद दूसरों से आगे निकल जाएंगे। हर देश में अवकाश के नियम हैं। इन नियमों का उद्देश्य व्यक्ति की थकान मिटाना, उन्हें बीमारियों से दूर रखना और उन्हें तनावमुक्त रखना है। गर्मी की छुट्टियां, सर्दी की छुट्टियां और त्योहारों से संबंधित छुट्टियां विश्राम का बेहद सुंदर रूप हैं। अधिकतर व्यक्ति इन छुट्टियों के विश्राम का लाभ उठाते हैं। विश्राम का अर्थ यह नहीं है कि इस दौरान पहाड़ों पर या अपनी मनपसंद जगह पर घूम लिया, बल्कि विश्राम का असली अर्थ तो अपने शरीर को दैनिक समस्याओं से दूर रखकर, उसमें ताजगी भरना है। यदि हफ्ते में कुछ वक्त विश्राम के लिए निश्चित कर लिया जाये तो न सिर्फ समस्याओं के समाधान सहजता से निकल आते हैं, बल्कि विश्राम के समय कुछ देर बिल्कुल शांत रहकर आप खुद को तरोताजा व स्फूर्ति से भरा हुआ पाते हैं। कहते हैं कि नेपोलियन युद्ध में घोड़े की पीठ पर भी विश्राम कर
लेते थे।

12112cd _peaceगहरी सांस, मीठी यादें या मनभाता काम  
विश्राम में आप रोजमर्रा के कामों से कुछ देर के लिए दूर हो जाएं। धीरे-धीरे लंबी और गहरी सांस लें। ऐसा न सोचें कि धूम्रपान या चाय-कॉफी की लत आपको विश्राम देगी। चाय-कॉफी कम मात्रा में लें और धूम्रपान जैसे नशों को तो जीवन से बाहर ही निकाल दें। विश्राम में आप ऐसे काम भी कर सकते हैं जिनसे आपको खुशी व रचनात्मकता मिले। मसलन आप आंखें बंद करके कुछ देर के लिए सब कुछ भूलकर स्वयं से बात करें। संगीत सुनें, किताब पढ़ें, अपनी मीठी स्मृतियों को याद करें, उन पलों को याद करें जब आप पुरस्कृत हुए थे। विश्राम लेकर देखें। कुछ समय बाद आपके जीवन में आया सकारात्मक बदलाव खुद विश्राम के अनेक लाभ गिना देगा।


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