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सब नहीं पचता इस मौसम में

Posted On December - 28 - 2016

12812cd _foodअरे थोड़ा और खा लीजिए, सर्दी है। खाने के बाद कुछ हलवा हो जाये। अरे कुछ नहीं होता एक पराठा और। ऐसी शब्दावली आमतौर पर सर्दियों में आम बोलचाल में सुनने को मिल जाती है। लोगों को लगता है कि इस मौसम में तो खाना-पीना आसानी से पच जाता है। क्यों परेशान होना है। गर्मियों में पानी खूब पीने के कारण भूख कम लगती है। बरसात में ऐसे ही अपच की समस्या रहती है। ऐसे में एक यही मौसम तो बचता है जब हम कुछ भी खा सकते हैं। इस संबंध में डॉक्टर एवं विशेषज्ञ भी कहते हैं कि आमतौर पर यह माना जाता है कि सर्दियों का मौसम खाने-पीने का मौसम है। इस मौसम में जो भी खा लो या जितना भी खा लो सब पच जाएगा। इसीलिये लोगों के खाने की थाल में खूब तली-भुनी चीजें दिख जायेंगी। विशेषज्ञ कहते हैं कि असल में ऐसा कहना और ऐसा सोचना एकदम गलत है कि इस मौसम में सब पचता है। डॉक्टर खान-पान के प्रति इस मौसम में भी सावधान करते हैं।
डॉक्टर एवं डायटीशियन कहते हैं कि इस मौसम में भी फूड प्वाइजनिंग की वैसी ही समस्या हो सकती है जैसी गर्मी या बरसात के मौसम में होती है। यह अलग बात है कि जो बैक्टीरिया बरसात के मौसम में ज्यादा सक्रिय रहते हैं, इस मौसम में वे डेड-से हो जाते हैं। लेकिन ऐसा नहीं कि उनका असर होता ही नहीं। अधिक खाने से सावधान करते हुए विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अपच की दिक्कत तो कई बार जाड़ों में ज्यादा हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों के इस मौसम में भी बासी और अतिरिक्त खाना नुकसानदायक हो सकता है। असल में कुछ बैक्टीरिया ऐसे होते हैं जो खास किस्म के भोजन में बहुत जल्दी पनपते हैं, इनमें मसालेदार दालों-सब्जियों के अलावा उबला चावल (भात) शामिल है। शादी-ब्याह में जमकर खाना भी कई बार परेशानी पैदा कर सकता है। डाॅक्टरों के मुताबिक फूड प्वाइजनिंग के चलते कुछ और दिक्कतें भी पैदा हो सकती हैं जैसे किडनी में इनफेक्शन, आंतों में दिक्कत आदि। इसलिए मौसम कोई भी हो, खाइये उतना ही जितना आप पचा सकें। खान-पान के उन्हीं नियमों पर चलें जो आप अन्य मौसम में भी फॉलो करते हैं।
कम हो जाता है पानी और व्यायाम
pt1 copyहोता यह है कि जाड़ों में हमारी फिजिकल एक्सरसाइज कुछ कम हो जाती है। पानी भी हम उस मात्रा में नहीं पी पाते जितनी की जरूरत होती है। इसलिए खान-पान ज्यादा हो जाता है। यह खानपान कई बार अपच की शिकायत में बदल जाता है। इसके अलावा कई बार और कारण भी होते हैं जब हम खानपान के प्रति सर्दियों के मौसम में बेपरवाह हो जाते हैं। इस संबंध में शहरों में रहने वाले कामकाजी लोगों के बीच किए गए एक शोध से यह बात सामने आई कि काफी संख्या में ऐसे लोग जो गर्मी और बरसात के मौसम में तो खान-पान पर ध्यान देते हैं, लेकिन जाड़ों में लापरवाह हो जाते हैं, जबकि कुछ संख्या ऐसे लोगों की थी जो किसी भी मौसम में खानपान के संबंध संवेदनशील नहीं होते। जो हमेशा कुछ न कुछ चटर-पटर व बासी भोजन खाते रहते हैं, उनमें कई किस्म की दिक्कतें देखने को मिलीं। इससे इतर मौसम के हिसाब से अपने खान-पान पर ध्यान देने वालों में अपेक्षाकृत कम समस्याएं देखने को मिलीं।


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