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सिनेमा से राजनीति तक…‘जय’ ललिता

Posted On December - 6 - 2016

Jayalalitha copyचंडीगढ़। वर्ष 1948 की 24 फ़रवरी को मैसूर में मांडया ज़िले के मेलुरकोट गांव में परंपरागत तमिल ब्राह्मण परिवार में पैदा होने वाली जयललिता के पिता जयराम की मृत्यु जब हुई, वे सिर्फ़ 2 साल की थीं। यहीं से उनका जीवन संघर्ष भी शुरू हो गया। उनकी माँ वेदवल्ली ने तमिल सिनेमा में काम करना शुरू कर दिया और अपना नाम बदल कर संध्या रख लिया। जयललिता अपनी मौसी और नाना-नानी के पास रहकर बेंगलुरु के बिशप कॉटन स्कूल में पढ़ने लगीं। मौसी की शादी के बाद वे अपनी माँ के पास चेन्नई चली गईं। यहाँ उनके जीवन ने दूसरी करवट ली, क्योंकि पढ़ाई में अच्छा करने के बावजूद उनकी माँ ने उन्हें फिल्मों में काम करने के लिए मजबूर किया। परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी इसलिए उन्हें 1961 में महज 13 साल की उम्र में बाल कलाकर के तौर पर फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। 1964 में कन्नड़ फिल्म चिन्नादा गोमबे (सोने की गुड़िया) से उन्होंने वयस्क भूमिकाएं करनी शुरू की।
p12 copyबस फिर क्या था! पहली कन्नड़ फ़िल्म के बाद उनके पास एक के बाद एक फ़िल्में आने लगीं। उन्होंने दक्षिण भारत में उस दौर के लगभग सभी सुपरस्टारों, मसलन, शिवाजी गणेशन, जयशंकर, राज कुमार, एनटीआर यानी एन टी रामाराव और एम जी रामचंद्रन यानी एमजीआर के साथ काम किया। फ़िल्म इतिहासकारों के अनुसार, जयललिता ने जयशंकर के साथ 10 तमिल फिल्मों में काम किया था। उन्होंने एन टी रामाराव के साथ 12 तेलुगु फिल्मों में भी काम किया। इसके अलावा उस वक़्त के तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार अक्कीनेनी नागेश्वर राव के साथ उन्होंने 7 फिल्में कीं।
शिवाजी गणेशन के साथ की गई तमिल फिल्म ‘पट्टिकाडा पट्टनामा’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। शिवाजी गणेशन के साथ जयललिता ने 17 फिल्में कीं। इतना ही नहीं, एक फिल्म में उन्होंने गणेशन की बेटी की भूमिका भी निभाई थी। उन्होंने कुछ हिंदी और एक अंग्रेजी फिल्म में भी अभिनय किया था लेकिन वहां वो सफलता का स्वाद नहीं चख सकीं।
जब ली थी कसम-अब सीएम बनकर ही लौटूंगी
10512cd _MGR Jayalalithaa Janakiराष्ट्रपति शासन के बाद 1989 में हुए विधानसभा के चुनावों में जयललिता के गुट ने 27 सीटें जीत लीं और वे विपक्ष की नेता बनीं। लेकिन, 25 मार्च 1989 में तमिलनाडु के विधानसभा में जो हुआ, उसने लोगों में जयललिता के प्रति सुहानुभूति और बढ़ा दिया। सत्ता पक्ष यानी डीएमके के सदस्यों और अन्ना द्रमुक के सदस्यों के बीच सदन में ही हाथापाई हुई और जयललिता के साथ ज़ोर ज़बरदस्ती की गयी। अपनी फटी साड़ी के साथ जयललिता विधानसभा से बाहर आयीं और लोगों ने सत्ता पक्ष को इस घटना के लिए खूब कोसा। यही वो दिन था जब जयललिता ने सदन से निकलते हुए कहा था कि वे मुख्यमंत्री बन कर सदन में लौटेंगी वर्ना नहीं। साल 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद हुए चुनावों में जयललिता ने कांग्रेस से चुनावी समझौता किया और 234 में से 225 सीटें जीत लीं। वे मुख्यमंत्री बनीं। चुनाव में करारी हार के बाद जानकी ने राजनीति से किनारा कर लिया और एआईएडीएमकी और एमजीआर की राजनीतिक विरासत की एकमात्र उत्तराधिकारी जयललिता बन गयीं।
भ्रष्टाचार के आरोप, चुनाव हारीं
10512cd _jaya4मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही वक्त बाद जयललिता पर आय से अधिक संपत्ति, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था इत्यादि के आरोप लगने लगे। नतीजा ये हुआ कि जब 1996 में विधानसभा चुनाव हुए तो उनकी पार्टी महज 4 सीटों पर सिमट गई। इसी साल उनके खिलाफ करुणानिधि सरकार ने भ्रष्टाचार के करीब 48 मामले दर्ज कराए। जयललिता को कई महीने जेल में बिताने पड़े।
लोगों को नहीं भाये कुछ निर्णय
2001 में उन्होंने लॉटरी टिकट पर पाबंदी लगा दी। हड़ताल पर जाने वाले 2 लाख कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकाल दिया, किसानों की मुफ्त बिजली पर रोक लगा दी, राशन की दुकानों में चावल की कीमत बढ़ा दी, 5000 रुपये से ज्यादा कमाने वालों के राशन कार्ड खारिज कर दिए, बस किराया बढ़ा दिया और मंदिरों में जानवरों की बलि पर रोक लगा दी।
अम्मा में भी रही कमी
10512cd _jilalitaअन्ना द्रमुक के मंत्री, सांसद, विधायक, नेता और समर्थक उन्हें ‘अम्मा’ और ‘पुरातची थलाइवी’ यानी ‘क्रांतिकारी नेता’ के नाम से भी पुकारते हैं। जयललिता तमिलनाडु की ऐसी आख़िरी नेता हैं, जिनके साथ उनके समर्थक किसी भी हद तक जाकर खड़े रहते हैं। लेकिन, उनकी सबसे बड़ी कमी वे यह बताते हैं कि जयललिता ने कभी पार्टी में दूसरी या तीसरी पंक्ति के नेता को खड़ा नहीं होने दिया।
पहली फिल्म एडल्ट करार, न देख सकीं थियेटर में
जयललिता की पहली फिल्म एडल्ट करार दी गई। दुर्भाग्य देखिए कि जयललिता अपनी पहली फिल्म को थिएटर में नहीं देख सकीं क्योंकि उस वक्त उनकी उम्र 18 साल से कम थी। फिल्मों में रहते हुए जयललिता को शादीशुदा अभिनेता सोहन बाबू से प्यार हो गया। लेकिन इन दोनों की शादी नहीं हो सकी।
तमिलनाडु के इतिहास में 32 साल बाद…
साल 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में जयललिता ने रिकॉर्ड जीत हासिल की। तमिलनाडु के इतिहास में 32 साल बाद किसी पार्टी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला था। 3 दशक पहले ये कारनामा उनके राजनीतिक गुरु एमजीआर ने किया था। मई 2016 में जयललिता 5 वीं बार राज्य की सीएम बनीं।


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