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सुनो, डिजिटल युग की दस्तक

Posted On December - 25 - 2016

इस सदी का 16वां साल विदा ले रहा है। नोट और कागज की विदाई का डंका बजाते हुए। जाते साल के आखिरी महीनों में संसद से सड़क और साइबर हाईवे तक सबसे चर्चित मुद्दा नोटबंदी का ही रहा। हो भी क्यों न, इसने सैकड़ों साल से घर-बाजार पर राज कर रहे कागजी नोटों की कमर जो तोड़ डाली। अब दस्तक दे रहा है डिजिटल युग। इंडिया डिजिटल हो रहा है और कैशलेस, पेपरलेस हो रहे हैं हम। कागज, कलम न दवात, बस डिजिटली होगी बात। जाते साल को रुखसती देता और डिजिटल दुनिया की ओर लंबी छलांग लगाते नए युग की आमद को खुशामदीद कहता यह आलेख-

उपेंद्र पाण्डेय

14 copyसुना है कि इंडिया डिजिटल हो रहा है, कैशलेस। साइबर हाईवे पर सवार देश की नरेंद्र मोदी सरकार ने जाते साल की 8 नवंबर को कागजी नोटों की रुखसती और डिजिटल युग की आमद का परवाना लिख डाला। वे कागजी रुपये, जिनकी महक मदमस्त कर देती थी। सैलरी की आमद पर नोटों की कड़कड़ गरीब-गुरबे के कमज़ोर बदन में भी ठसक भर जाती थी। जिन रुपयों के हाथ में आते ही इठलाते थे हम। डिजिटल इंडिया में ये सब नहीं मिलेगा, न ही दिखेगा। अब दिखेगा तो पेपरलेस युग। कभी खत लिखे जाते थे और खतों किताबत के किस्से लोगों की जुबां पर बरसों छाये रहते थे। ‘चिट्ठी आई है वतन से चिट्ठी आई है’ और ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में, फूल नहीं मेरा दिल है’ जैसे गाने कलम और कागज की जुगलबंदी का मर्म बयां करते थे। मगर अब, कागज, कलम न दवात। पुरानी बातें, रिवायतें खत्म होने के कगार पर। जाते साल में चहुंओर है नोटबंदी और इंडिया के डिजिटल होने की चर्चा।
इसमें शक नहीं कि नोटबंदी ने जनता को डिजिटल मनी की ओर ढकेला है। किंतु देश में आज भी 50 फीसदी से ज्यादा आबादी डिजिटल निरक्षरों की श्रेणी में आती है। इसलिए नोटों की जगह डिजिटल मुद्रा के चलन के गंभीर खतरों से भी इनकार नहीं किया जा सकता। कागजी नोटों की जगह मोबाइल फोन के स्क्रीन पर चमकने वाले मैसेज और डिजिटल स्वाइप खैर कितने भरोसेमंद होंगे, यह तो वक्त ही बताएगा।
सरकारी दावा है कि नए साल में पेपरलेस दुनिया की ओर सबसे ठोस कदम है नोटबंदी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 500 और एक हजार रुपये के पुराने नोट बंद करके 2 हजार और पांच सौ के नए नोट चलन में लाने का ऐलान किया, वह था डिजिटल करेंसी की ओर एक जबरदस्त कदम। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली कागजी नोटों की जगह मोबाइल बैंकिंग, एटीएम पेटीएम मोबाइल मनी के इस्तेमाल की सलाह दे  रहे हैं।
अब बात डिजिटल होती जनता-जनार्दन की। चंडीगढ़ के हरीश चंद्र छाबड़ा बीते 30 साल से डिजिटल हैं। फोन के मिनट, सेकेंड गिनकर डिजिटल पेमेंट वाली पहली मशीन हमने इनके पीसीओ पर ही देखी थी। वक्त बदला, हरीश जी ने पीसीओ के फोन का चोंगा पीछे की अलमारी में सजा दिया और मोबाइल शाॅप में बदल गई उनकी दुकान। 2016 में छाबड़ा जी ने एमेजॉन आॅनलाइन शापिंग की एजेंसी ले ली। पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस हरीश जी डिजिटल वर्ल्ड में अपने साथियों व ग्राहकों से 2017 की पहली जनवरी को आॅनलाइन बोलेंगे  ‘हैप्पी न्यू ईयर’।
2016 तैयारी कर रहा है 2017 के वेलकम की और लोग मोबाइलों, आईपैड, लैपटाप व कंप्यूटरों पर खंगाल रहे हैं हितमित्र परिचितों को ‘हैप्पी न्यू ईयर’ कहने का नया अंदाज। हर साल आधा दिसंबर आर्चीज गैलरी से लेकर ग्रीटिंग डायरी और कैलेंडर शाप्स की मार्केटों में न्यू ईयर गिफ्ट्स की मार्केटिंग में गुजारने वाले डीटीडीसी फ्रेंचाइजी सारथी को भी लगने लगा है कि 2016 ने भारतवर्ष में पेपरलेस युग की शुरुआत कर दी है। जाते साल का मिजाज देखकर 2015 के मुकाबले न्यूईयर स्टेशनरी का स्टाक आधा ही मंगवाया था, लगता है उसमें भी ज्यादातर गिफ्ट पहली जनवरी 2017 के बाद लोगों को बुलाबुला कर पकड़ाना पड़ेगा, फिलहाल तो इस साल कोई आफिस आकर नए साल पर कैलेंडर डायरी की डिमांड तक नहीं कर रहा। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से तो 2016 की झोली से बहुत शस्य श्यामल गिफ्ट निकला है डिजिटल इंडिया का। जो डिजिटल वही स्वच्छ, वही शुद्ध और वह ही शुभ संकेत।
फेसबुक ने इस साल लोगों को ‘हैप्पी न्यू ईयर’ कहने का एक अभिनव अंदाज पेश किया है। आजकल लोग जैसे ही फेसबुक अकाउंट खोल रहे हैं, उनको ‘हैप्पी  न्यू ईयर 2017’ का एक नया पैनोरमा दिखता है। जैसे ही यह पैनोरमा क्लिक करो, चलने लगती है एक फिल्म। ऐसी फिल्म जिसकी हीरोईन या हीरो आप खुद  हैं, फिर भी आपको पता नहीं कि कब और कैसे बन गया यह डिजिटल वीडियो। फेसबुक ने चुपचाप आपको पूरे साल फाॅलो किया, और 2016 में आपकी फोटोज, लाइक्स और कमेंट्स का पूरा ब्योरा इकट्ठा करके उनमें से बेस्ट फोटोज और इवेंट्स चुनकर बना दिया है यह वीडियो। हर फेसबुक अकाउंड होल्डर को यह पैनोरमा पेश किया जाता है। फिर आपके ओके करते ही सारी दुनिया के सामने पेश हो जाती है बीते साल आपकी खुशनुमा यादों के साथ नए साल की शुभकामनाओं की झांकी। फरीदाबाद मेट्रो हाॅस्पिटल की सीईओ रहीं लेफ्टिनेंट कर्नल सीमा और मथुरा रिफाइनरी हाॅस्पिटल के प्रभारी सर्जन मेजर हिमांशु पाण्डेय कहते हैं कि 2016 डिजिटल मेडिसिन युग की शुरुआत में एक माइल स्टोन है। आने वाला साल 2017 दवाओं की निर्माता फार्मिसियों से लेकर उपभोक्ता मरीजों और उनके बीच की कड़ियों मसलन अस्पतालों, पैथालोजी लैब्स, एक्सरे रेडियोलॉजी, आईसीयू सीसीयू सभी के 95 फीसदी डिजिटल और पेपरलेस होने का ऐलान करके जाएगा।

नहीं लौटेंगे नोटों के दिन
cla copyप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की रात नोटबंदी का ऐलान किया, उसके अगले दिन से लेकर पूरे सप्ताह तक मोबाइल बैंकिंग कंपनी पेटीएम ने अखबारों में फुलपेज के विज्ञापन छापकर प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया और कई आॅनलाइन व डिजिटल करेंसी कारोबार वाली कंपनियों ने पीएम नरेंद्र मोदी की फोटो लगाकर नोटबंदी का स्वागत किया। यह थी कागजी नोटों को चलन से बाहर करने और डिजिटल लेनदेन के युग की दस्तक। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 19 दिसंबर को ऐलान कर दिया कि सरकार पहले के मुकाबले कम नोट छापेगी, कागजी नोटों की संख्या बाजार में लगातार कमी की जाएगी और इसकी जगह लेगी डिजिटल मनी। मतलब पेटीएम, स्टेट बैंक समेत तमाम बैंकों, डाकघर एटीएम और ईमनीआर्डर के जरिए पैसे भेजो, मोबाइल पर ही अपने अकाउंट से पैसे निकलने का मैसेज लो और मोबाइल पर ही दूसरों के भेजे पैसे रिसीव कर लो। बाजार जाने की जरूरत नहीं। अमेजॉन, फ्लिपकार्ड, बिगबास्केट के जरिए घर बैठे आॅनलाइन खरीद-फरोख्त करो और डिजिटल  पेमेंट करो।

पेपरलेस डेमोक्रेसी
साल 2017 देश के लिए मिनी आम चुनाव सरीखा साल होगा। नए साल में सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें से हिमाचल प्रदेश की विधानसभा ने नए साल में ‘गो डिजिटल’ का नारा दे रखा है। मतलब विधानसभा की सारी कार्यवाही पेपरलेस। विधायकों के जवाब भी आॅनलाइन और मंत्रियों व सरकार की ओर से उनके जवाब भी डिजिटल। एक अनुमान के अनुसार एक हजार टन से भी ज्यादा कागज देश के विधायी कामकाज में इस्तेमाल होता है। हिमाचल प्रदेश और गोवा राज्यों की विधानसभाओं का डिजिटल होना निश्चित रूप से कागजविहीन कामकाज के नए युग की दस्तक है। चंडीगढ़ नगर निगम के हाल ही में संपन्न चुनावों में वोट भी पेपरलेस थे और वोटर भी। वोटर सूची पार्टियों के प्रतिनिधिगण आॅनलाइन खंगाल रहे थे। पहली बार उम्मीदवार के फोटो भी  पोलिंग मशीन पर चस्पां थे और वोटरों की फोटो झलक रही थी वोटरलिस्ट के खाने में। मतदान से लेकर सरकारें बनने और चलने तक का कामकाज डिजिटल हो जाना ‘गो ग्रीन’ का ग्रीन सिग्नल है।

500 साल का कागज
500 copyकागज निर्माण का हुनर सन 105 में चीनी हान राजवंश के शासक हो-टिश के दरबारी ‘त-साई-लून’ ने किया था। भारत में कागज उद्योग मुगल काल में फला-फूला, जब काश्मीर के सुल्तान जैनुल आबिदीन ने (1417-1467) कश्मीर में कागज मिल लगाई। अंग्रेजों ने कलकत्ता को राजधानी बनाया तो सन 1870 में कलकत्ता के पास ‘बाली’ में पेपर मिल खोली। आजादी हमारा पैदायशी हक है-का नारा देने वाले मुंशी नवल किशोर ने अपना अखबार और छापाखाना चलाने के लिए 1879 में देश की पहली पेपरमिल खोली, जिसका मालिकाना हक किसी अंग्रेज के हाथ में न होकर देसी उद्यमी के पास था। मुंशी प्रेमचंद ने इसी मुंशी नवल किशोर प्रेस में नौकरी करते हुए ‘माधुरी’ पत्रिका का प्रकाशन किया था। सन 1882 टीटागढ़ में टीटागढ़ कागज मिल्स तथा सन 1887 बंगाल कागज निर्माण फैक्ट्री की स्थापना हुई। आधुनिक युग की पहली मशीनी कागज मिल यमुनानगर की गोपाल पेपर मिल ही थी, जो 1925 में खुली। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में कागज उद्योग का कुल टर्नओवर 17,000 करोड़ रूपये है तथा 2500 करोड़ रूपये भारत सरकार के खाते में राष्ट्रीय योगदान करता है। भारत में प्रति व्यक्ति कागज उपभोग 7.2 किग्रा है जो अन्य देशों की तुलना में कम है। भारत में यह उद्योग 0.12 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से तथा 0.34 लाख व्यक्तियों को अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार प्रदान करता है।

मनीआर्डर मिनटों में  आपके घर
419337-paytm copyग्रामीण भारत और सीमाओं पर फौजियों के लिए नोटबंदी का मुकाबला करने में लीडर की भूमिका निभाने वाला इंडियन पोस्टल विभाग भी नए साल में ‘पेपरलेस गो ग्रीन’ की कवायद में है। आप शहर में हैं और घरवाले नाते-रिश्तेदार गांवों में नोटबंदी से परेशान हैं तो डाकखाने का रुख कीजिये। ई मनीआर्डर कीजिये, कोई कागज नहीं, कोई कलम नहीं। पोस्ट आॅफिस काउंटर पर एक क्लिक करते ही रुपया सुदूर गांव वाले डाकखाने के डाकबाबू के मोबाइल में पहुंच जाएगा। वहां से डाकिया जी आपके घर पहुंचा देंगे पैसा। अगर पैसा 10 मिनट के भीतर चाहिए तो कीजिये इंस्टैंट एक्सप्रेस मनीआर्डर, बस आपके मोबाइल पर एक कोड आएगा। कोड दिखाकर पैसे का लेनदेन सीधे डाकखाने से। यही नहीं आपके पार्सल और पैकेटों की डिलिवरी की आॅनलाइन ट्रैकिंग भी अब डीटीडीसी और ब्लूडार्ट जैसी कूरियर कंपनियों की बपौती नहीं रही। इंडियन पोस्ट भी अपने पार्सल की ट्रैकिंग करने लगा है। नए साल में एक कूरियर डाकखाने से भी करके देखिये। दोपहर में बुकिंग और उसी शाम से आपके मोबाइल आईपैड या लैपटाॅप पर पार्सल के मूवमेंट और डिलिवरी की आॅनलाइन डिजिटल जानकारी हाजिर। आने वाला साल 2017 पेपरलेस दुनिया में आपकी लंबी छलांग का साक्षी बनने जा रहा है। शुभ नववर्ष।

1257204_article copy2016 : कागजी दुनिया की विदाई

  • 500 और 1000 के पुराने नोट चलन से बाहर।
  • एटीएम, पेटीएम, मोबाइल मनी, क्रेडिट कार्डों की धूम।
  • वोटर सूची हुई डिजिटल।
  • रेलवे की ई-टिकटिंग हुई फ्लेक्सी, वेंडर कैटरिंग सेवाएं हुईं डिजिटल।
  • बुकिंग विंडो की जगह मशीनों से, फोन से ई-टिकट का विकल्प।
  • स्टेट बैंक आॅफ इंडिया के साथ रेलवे स्टेशनों पर स्वाइप मशीनों के जरिए टिकट खिड़की पर एटीएम कार्ड पेमेंट सिस्टम शुरू।

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