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हरियाणा में और भी हैं ‘दंगल’ के नायक

Posted On December - 26 - 2016

राजेश शर्मा, फरीदाबाद

 अपने पिता जगरूप सिंह राठी के साथ अपना अर्जुन अवार्ड दिखातीं पहलवान नेहा राठी।

अपने पिता जगरूप सिंह राठी के साथ अपना अर्जुन अवार्ड दिखातीं पहलवान नेहा राठी।

23 दिसंबर को देश-विदेशों में रिलीज हुई आमिर खान की चर्चित फिल्म दंगल जैसी ही एक कहानी फरीदाबाद में भी दिखाई देती है। भिवानी के महाबीर फौगाट के जीवन पर बनी इस फिल्म के नायक की तरह ही फरीदाबाद के पहलवान पूर्व डीएसपी जगरूप सिंह राठी ने भी अपनी बेटी को पहलवान बनाने के लिए लंबा संघर्ष कर उसे मुकाम तक पहुंचाया है।
महाबीर फौगाट ने खुद पहलवानी में देश का नाम रोशन करने के साथ-साथ अपनी बेटी बबीता व गीता फौगाट को अखाड़े में उतारा था। उन्हीं की तरह सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एवं अर्जुन अवार्डी जगरूप सिंह राठी ने अपनी बेटी नेहा राठी को खुद कुश्ती के दांव-पेंच सिखाकर अंतर्राष्ट्रीय पहलवान बनाया। आज पहलवानी के दम पर ही नेहा हरियाणा पुलिस में इंस्पेक्टर हैं।
नेहा राठी ने देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ये मुकाम नेहा ने आसानी से नहीं पाया, बल्कि कड़ी मुश्किलों का सामना करके हासिल किया है। नेहा को खेल उपलब्धियों के कारण ही अर्जुन अवार्ड और भीम अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है तथा उनके पिता भी अर्जुन अवार्ड से सम्मानित हैं।
स्प्रिंग फील्ड कॉलोनी निवासी पहलवान एवं पूर्व डीएसपी जगरूप सिंह राठी के पिता दरियाव सिंह व उनके दादा चौधरी सुलतान सिंह भी अपने समय के नामी पहलवान थे। दादा-पिता की विरासत को जगरूप सिंह ने संभाला था। जगरूप सिंह अपने पुत्र को भी पहलवान बनाना चाहते थे, पर बेटे ने इनकार कर दिया तो जगरूप परेशान रहने लगे। निराशा की इस घड़ी में उन्होंने नेहा में पहलवानी का जुनून देखा, तो नेहा को छोटी उम्र में ही अखाड़े में उतार दिया।
परेशानियों से जूझना पड़ा : नेहा ने 1997 में कुश्ती के दांव-पेंच सीखने शुरू कर दिए, लेकिन उस वक्त लड़कियों में कुश्ती का क्रेज नहीं था। लोग अपनी बेटियों को अखाड़े में भेजने से परहेज करते थे। उस वजह से नेहा को भी अपनी खेल साधना में परेशानियों का सामना करना पड़ा। जगरूप राठी भी सोचते थे कि किस तरह लोगों को कुश्ती के बारे में जागरूक किया जाए, ताकि वे अपनी बेटियों को अखाड़े में भेजें। जगरूप सिंह नेहा को छोटे-छोटे बच्चों के साथ दांव-पेंच सिखाते थे। इसी बीच दिल्ली में नामी-गिरामी पहलवान मास्टर चंदगीराम की बेटियों ने भी जब कुश्ती के दांव-पेंच सीखने शुरू किए, तो जगरूप नेहा को चंदगीराम के अखाड़े में ले जाने लगे। वहां नेहा ने उनकी बेटियों के साथ दांव-पेंच सीखने शुरू किए।
समाप्त नहीं हुआ संघर्ष : नेहा का संघर्ष यहीं पर समाप्त नहीं हो जाता। खुद को स्थापित करने के दौरान नेहा को कंधे और घुटने की चोट के कारण भी कई परेशानियां झेलनी पड़ीं। चोट के कारण नेहा वर्ष 2004 में बुसान में एशियन गेम्स में भाग नहीं ले सकीं। ऐसे ही वर्ष 2008 में तुर्की में चैंपियनशिप में भाग न लेने का अफसोस नेहा को आज भी है। ये दोनों घटनाएं उस वक्त हुईं, जब नेहा का देश-विदेश में कुश्ती में अच्छा प्रदर्शन कर रही थी, लेकिन इन परेशानियों ने नेहा को मंजिल तक पहुंचने का रास्ता दिखाया।
खास है उपलब्धियों की फेहरिस्त
2005 में दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक। यहीं पर इसी वर्ष सेंचुरियन कप में भी स्वर्ण पदक जीता। इस प्रदर्शन से उन्हें 2005 में हरियाणा के सर्वोच्च खेल सम्मान भीम अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके बाद भी उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन जारी रखा, जिसकी बदौलत 2013 में उन्हें अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया।12512CD _NEHA RAHTI
अब और लड़कियों को भी लाना है आगे : नेहा का सपना बच्चों को कुश्ती के दांव-पेंच सीखना है। कुश्ती के प्रति लड़कियों को आगे लाना है। फरीदाबाद की लड़कियां अभी कुश्ती के प्रति जागरूक नहीं हैं। नेहा का कहना है कि दंगल फिल्म को देखकर अभिभावक व युवतियों को अखाड़े में जाने की इच्छा जागेगी।
पिता बोले- बेटियां बोझ नहीं : अर्जुन अवार्डी पहलवान एवं पूर्व डीएसपी जगरूप सिंह राठी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ’ के नारे को सभी देशवासियों को अपने जहन में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटी माता-पिता पर किसी तरह का कोई बोझ नहीं होती। लोगों को समझना चाहिए कि बेटी जिस फील्ड में रुचि रखती हो उसे उसी फील्ड में डालकर प्रोत्साहित कर आगे बढ़ने में मदद करें। क्योंकि आज लडकों से ज्यादा लडकी हर फील्ड में अच्छा प्रदर्शन कर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि दंगल जैसी फिल्म से पहलवानों का मनोबल बढ़ा है। लोग अपनी बेटियों को भी पहलवान बनाने में आगे आएंगे।
एेसी फिल्मों से देश में बढ़ेगा कुश्ती का क्रेज
फिल्म निर्माता और अभिनेता आमिर खान की फिल्म दंगल के शुक्रवार को रिलीज होने पर शहर के पहलवानों ने खुशी व्यक्त की। पहलवानों का कहना है कि हरियाणा के पहलवान महाबीर फौगाट के परिवार पर बनी इस फिल्म से देश में पहलवानी का क्रेज बढ़ेगा। इतना ही नहीं, लोग अपनी लड़कियों को भी अखाड़ों में भेजेंगे। स्थानीय पहलवानों का मानना है कि फिल्म में कुश्ती की बारीिकयों को दिखाया गया है। इससे खिलाड़ी, कोच और खेल प्रेमियों का मनोबल बढ़ा है।
युवा बहुत कुछ जान सकेंगे : हिन्द केसरी
12512CD _NARTPAL HOODA_PHALWANहिन्द केसरी नेत्रपाल सिंह का कहना है कि कलाकार, फिल्मकार और फिल्म से जुड़े हर क्षेत्र के लोगों पर यह फिल्म खरी उतरती है। फिल्म में मनोरंजन के साथ-साथ रेसलिंग के बारे में जानकारी मिलती है। युवाओं को कुश्ती के बारे में बहुत-कुछ जानने को मिलेगा।
बलाली बहनों ने कुश्ती से किया नाम रोशन
12512CD _GOPICHAND_PHALWANराष्ट्रीय पहलवान गोपीचंद का कहना है कि भिवानी जिले के पहलवान महाबीर फोगाट कुश्ती में देश का नाम रोशन करना चाहते हैं। अपने इस सपने को साकार न होने के चलते उन्होंने अपनी दो बेटियों को भी अखाड़े में उतारा। दोनों ने देश का नाम रोशन किया।
फिल्म ने मनोरंजन के साथ दिया प्रभावी संदेश
12512CD _TONI_PHALWANमशहूर पहलवान टोनी का कहना है कि दंगल फिल्म कुश्ती को बढ़ावा देने के लिए बनी है। आमिर खान का यह सराहनीय कदम है। मनोरंजन के साथ अच्छे संदेश के मिश्रण पर यह फिल्म बनकर आई है। फिल्म मानव जीव के मुकम्मल मकसद पर रोशनी डालेगी।
लड़कियों को मिलेगा प्रोत्साहन
12512CD _LELU_PHALWANबल्लभगढ़ के पथवारी मंदिर अखाड़े में पहलवानों को गुर सिखाने वाले लीलू पहलवान का कहना है कि दंगल फिल्म से देश में कुश्ती को बढ़ावा तो मिलेगा, साथ ही लड़कियां भी अखाड़े में आएंगी। यह फिल्म काफी हद तक लड़कियों के लिए बेहतर रहेगी।


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