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हल्दी दिल की दोस्त, कैंसर की दुश्मन

Posted On December - 14 - 2016

pt copyआयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में चमत्कारी औषधि के ‘खिताब’ से नवाजी गयी हल्दी वैज्ञानिकों की भी पसंद बन गयी है। कई अध्ययनों में कैंसर, दिल की बीमारी, डिमेंशिया, गठिया और सोरायसिस जैसी बीमारियों की रोकथाम में भारतीय मसालों की इस ‘सरताज’ को कारगर पाया गया है।
राष्ट्रपति के निजी चिकित्सक पद्मश्री प्रोफसर मोहसिन वली का कहना है कि हल्दी का लोहा अब वैज्ञानिक भी मान रहे हैं। रंग में ही नहीं, गुणों में भी ‘सोना’ हल्दी को सर्दी-जुकाम से लेकर कैंसर और दिल से जुड़ी बीमारियों से लड़ने में सक्षम पाया गया है। हृदय रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर वली बताते हैं- वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि हल्दी का मुख्य घटक ‘करक्यूमिन’ न केवल कैंसर की कोशिकाओं को मारने और उनकी वृद्धि रोकने में सक्षम है, बल्कि वह हमारे दिल का सबसे अच्छा दोस्त भी है। करक्यूमिन शरीर में पहुंचकर धमनियों के भीतर ‘प्लाक’ नहीं जमने देता, जिससे खून में क्लॉट नहीं बन पाता। क्लॉट बनने से हृदयाघात का गंभीर खतरा हो जाता है। इसके अलावा प्लाक नसों को संकरा बना देता है जिससे खून का प्रवाह बाधित होने लगाता है।
हल्दी में एंटी-इन्फ्लैमेटरी और एंटी-ऑक्सिडेंट गुण भी हैं। प्रोफेसर वली कहते हैं कि बीमारी की शुरुआत इन्फ्लैमेशन से ही होती है और कई तरह के ‘धारधार हथियारों से लैस’ हल्दी ऐसे दुश्मनों को पहले ही पटकनी दे देती है। यह हमारे शरीर में कई समस्याओं का कारण बनने वाले फ्री रेडिकल्स को निकाल बाहर करती है। यह गठिया की बीमारी में भी कारगर है। प्रोफेसर वली कहते हैं- ‘हमने अंबा हल्दी और लाल मिर्च पर शोध किया है। लाल मिर्च में भी करक्यूमिन पाया जाता है लेकिन उसकी तीखी प्रकृति के कारण हम उसका उपयोग सीमित ही कर सकते हैं। हल्दी हर गंभीर बीमारी की रोकथाम में कारगर है।
एक दिन में कितनी हल्दी खायें?
निरोगी बने रहने के लिए प्रतिदिन हल्दी कितनी मात्रा में लेनी चाहिये? इसके जवाब में प्रोफेसर वली कहते हैं कि रोज के खाने में 5 ग्राम हल्दी आवश्यक है। दूध में उबालकर लेने से इसका बेहतर नतीजा मिलता है। कच्ची हल्दी का रस त्वचा पर लगाने और उसका सेवन करने से सोरायसिस की बीमारी में भी बहुत लाभ मिलता है। इस बीमारी से परेशान लोगों को अपने डॉक्टर से संपर्क करके यह तय करना चाहिए की हल्दी का उपयोग वे किस तरह करें।
56 फीसदी तक कम हो जाता है कोलेस्ट्रॉल

11412cd _heart_curvy_flatउचित मात्रा में सेवन करने से हल्दी का पीला घटक करक्यूमिन खराब कोलेस्ट्रॉल को 56 प्रतिशत घटाकर कोलेस्ट्रॉल ऑक्सिडेशन को कम करता है। यह हमारे खून के सीरम ट्राइग्लिसराइड्स स्तर को भी 27 प्रतिशत तक कम करता है। कुल मिलाकर यह टोटल कोलेस्ट्रॉल को भी 33.8 प्रतिशत कम करके दिल को मजबूती से धड़कने में अहम भूमिका निभाता है।

11412cd _icon_meterहल्दी मधुमेह के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट हड्डियो में होने वाली समस्याओं से भी बचाते हैं। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली हल्दी सांस संबंधी बीमारियों में भी राहत पहुंचाती है।

11412cd _immune_systemहल्दी प्राकृतिक एंटीबायोटिक है। इसलिए यह पेट और त्वचा संबंधी बीमारियों को जड़ से खत्म करती है। इसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। यह ऊर्जा देने के साथ खून को साफ रखती है। इसमें छिपे गुण सेहत और सौंदर्य दोनों के लिए लाभदायक हैं। यह बढ़ती उम्र का प्रभाव कम करने में भी मदद करती है।

24 घंटों में कैंसर कोशिकाओं को मारना शुरू कर देता है करक्यूमिन
11412cd _haldiहल्दी पर देश ही नहीं, विदेश में भी लगातार शोध हो रहे हैं। ब्रिटेन के कॉर्क कैंसर रिसर्च सेंटर में किए गये परीक्षण में करक्यूमिन को गले की कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में बेहद कारगर पाया गया। शोधकर्ता डॉ. शैरन मैक्केना और उनकी टीम के अनुसार करक्यूमिन ने 24 घंटों के भीतर कैंसर की कोशिकाओं को मारना शुरू कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि करक्यूमिन कैंसर के नये इलाज विकसित करने में सहायक हो सकता है। अमेरिका और ईरान में भी हल्दी पर नये शोध हुए हैं जिसमें करक्यूमिन को सोरायसिस की बीमारी में कारगर पाया गया है। इस संबंध में अमेरिकन एकेडमी ऑफ डरमाटोलोजी और ईरान की फार्मास्यूटिकल रिसर्च पत्रिका में शोध पत्र प्रकाशित हुआ है। भोपाल में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति पीयूष त्रिवेदी के मुताबिक करक्यूमिन के चिकित्सीय गुणों से प्रेरित होकर उनकी टीम कनाडा के एडवांस मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉ. एच ली की टीम के साथ मिलकर शोध कर रही है। प्रोफेसर त्रिवेदी ने कहा- हमने अपने पिछले शोध में हल्दी से दो एंटीकैंसर मॉलिक्यूल ढ़ूढ़ें हैं जो बिना किसी दुष्प्रभाव के कैंसर की कोशिकाओं को तेजी से मारने में सक्षम हैं। प्रोफेसर त्रिवेदी के मुताबिक कैंसर में विटामीन बी-17 बहुत कारगर है। यह एपरिकोट (खुबानी) के बीज और गेहूं के जवारे में अत्यधिक मात्रा में मिलता है।


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