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अंतरंग सीन पर बरपा हंगामा

Posted On January - 7 - 2017

आमने सामने/चित्रांगदा सिंह

chitrangada-singh copyधर्मपाल
मॉडल से अभिनेत्री बनी चित्रांगदा सिंह आजकल अपनी नई फिल्म के कारण चर्चा में नहीं हैं, बल्कि शूटिंग के दौरान फिल्म छोड़ने के कारण उपजे विवादों से सुर्खियां बटोर रही हैं। वैसे, कहा यह भी जाता है कि चित्रांगदा के पास फिलहाल कोई फिल्म भी नहीं है। चित्रांगदा, जाने-माने फिल्ममेकर प्रीतिश नंदी के डायरेक्टर बेटे कुशान नंदी की फिल्म ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ में काम कर रही थीं और उनके साथ एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी मुख्य भूमिका में थे, लेकिन फिल्म की शूटिंग के दौरान ऐसा कुछ हुआ कि उन्होंने फिल्म को बीच में ही छोड़ दिया। उनसे बातचीत के अंश-

‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ को बीच में ही छोड़ देने की वजह?
दरअसल, यह सारा वाकया लखनऊ में शूटिंग के दौरान सेट पर अंतरंग सीन कॉन्ट्रोवर्सी को लेकर हुआ। मुझ पर कहानी से इतर जाकर काम करने का दबाव डाला जा रहा था। फिल्म के डायरेक्टर कुशान नंदी ने मुझसे फिल्म के हीरो नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ अंतरंग सीन की डिमांड की थी। उनकी बात मानकर हमने शॉट दे दिया। लेकिन, जैसे ही हमने शॉट खत्म किया, तो कुशान बोले कि पसंद नहीं आया। शॉट पूरा होने के बाद भी बार-बार रीटेक के लिए दबाव डाल रहे थे। मैंने बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन वह सुनने के मूड में ही नहीं थे। इस पर हमारी जमकर बहस हुई। ऐसे में मैंने फिल्म से किनारा कर लिया।

कहा जा रहा है कि आपके नखरों के कारण आपको फिल्म से निकाल दिया?
बिल्कुल बेबुनियाद बात है। उन्होंने मुझे फिल्म से नहीं निकाला, बल्कि मैंने खुद फिल्म को छोड़ दी। ऐसे लोगों के साथ काम कैसे किया जा सकता है, जो महिला की इज्जत करना नहीं जानते!

आपकी एक फिल्म ‘मेहरुन्निसा’ भी बहुत दिनों से अटकी हुई है?
यह फिल्म फ्लोर पर जाने वाली है। वैसे, अब इस फिल्म का नाम भी बदल गया है। पहले जहां फिल्म का नाम ‘मेहरुन्निसा’ था, वहीं अब यह ‘पहले आप जनाब’ के नाम से बन रही है। इस फिल्म में मैं मेगास्टार अमिताभ बच्चन के साथ पर्दे पर दिखने वाली हूं।

अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का अवसर मिलने पर कैसा महसूस किया?
बस यही कि जिसे मैं अपना आदर्श मानती थी, उनके साथ पर्दे पर दिखना किसी सपने के साकार होने जैसा ही है। अमिताभ बच्चन सदाबहार हैं। बचपन से ही वह मेरे आदर्श रहे हैं। ‘पहले आप जनाब’ में उनके साथ काम करने को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं और मैं आगे भी उनके साथ काम करना चाहती हूं।

फिल्म के निर्देशक सुधीर मिश्रा की किस खूबी की आप कायल हैं?
सुधीर सर हमेशा नई-नई चीजें आजमाने में माहिर हैं। वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनकी फिल्मों के चरित्रों में रोचकता और वास्तविकता का पुट होता है। उनके चरित्रों में ईमानदारी होती है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह हमेशा ही अपनी फिल्मों में महिलाओं को मजबूती से पेश करते हैं।

आप मानती हैं कि बॉलीवुड में अभिनेत्रियों की भूमिका भी अहम हो गई है?
हां, यह सच है। भारतीय सिनेमा ने हाल के वर्षों में काफी तरक्की की है और अभिनेत्रियों की भूमिका में भी काफी बदलाव आए हैं। आज अभिनेत्री होने का मतलब पर्दे पर सिर्फ सुंदर चेहरे का दिखाई देना नहीं रह गया है। अब वे भी अभिनय में काफी आगे जा रही हैं और उनमें काफी संभावनाएं है।

समानांतर फिल्मों से करिअर की शुरुआत करने के बाद आपने कमर्शियल फिल्मों का रुख कर लिया। ऐसा क्यों?
यह सच है कि मैंने फिल्म ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ और ‘ये साली जिंदगी’ जैसी समानांतर फिल्मों से अपने करिअर की शुरुआत की थी, लेकिन बाद में अगर व्यावसायिक फिल्मों में भी कदम रखा, तो इसके पीछे की वजह मेरा प्रयोगधर्मी होना है। मैंने अब तक अलग-अलग तरह की भूमिकाएं की हैं और आगे भी नई-नई भूमिकाओं के साथ प्रयोग करना चाहती हूं, ताकि एक अभिनेत्री के रूप में मुझमें निखार आए।

आपकी तुलना टॉप एक्ट्रेस स्व. स्मिता पाटिल से की जाती है, कैसा लगता है?
उनसे तुलना किया जाना मेरे लिए बड़ी बात है। यह एक अलग तरह का अनुभव है। वह एक बेहतरीन अभिनेत्री और हमारे वक्त से बहुत आगे थीं। लेकिन मुझे भी पता है कि मैं शायद ही कभी स्मिता पाटिल बन सकूं। जब लोग मेरी तुलना उनके साथ करते हैं, तो मुझे अच्छा जरूर लगता है, लेकिन यह उस समय अच्छा नहीं लगता है, जब लोग कहते हैं कि मुझे स्मिता पाटिल की तरह काम करना चाहिए।

क्या आपको नहीं लगता कि धमाकेदार शुरुआत के बावजूद आपके करिअर की गाड़ी पांचवे गियर में नहीं चल रही है?
यह सच है कि पिछला कुछ समय मेरे फिल्मी करिअर के लिए कुछ खास उपलब्धि भरा नहीं रहा है और आज भी मुझे अच्छे रोल और फिल्मों का इंतजार है, लेकिन मुझे इसका कोई गिला-शिकवा नहीं है। अगर मुझमें टैलेंट नहीं होता, तो मैं यहां तक भी नहीं पहुंच पाती। हालांकि, मैं अच्छे रोल का इंतजार कर रही हूं, पर मुझे फिल्मों में छोटे-मोटे रोल या आइटम सॉन्ग करने का अफसोस भी नहीं है, क्योंकि यह भी अपने आपको अलग ढंग से प्रस्तुत करने का एक तरीका है।

टीवी के लिए ट्राई क्यों नहीं करतीं?
मुझे टीवी पर काम करने के कई प्रस्ताव मिले, पर मैंने उन्हें स्वीकार नहीं किया, क्योंकि अभी मैंने खुद इतना कुछ नहीं किया है कि एक कुर्सी पर बैठकर दूसरों को जज करूं।


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