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गुजरात का खाखरा

Posted On January - 1 - 2017

शैलेष कुमार
khakhra copyगुजरातियों का गरबा आैर डांडिया जितना प्रसिद्ध है, उतना ही प्रसिद्ध होता जा रहा है खाखरा आैर थेपला। ढोकला, कढ़ी आैर खिचड़ी तो काफी पहले से उत्तर भारतीयों की रसोई में पहुंच चुका है। अब बारी है बाकी गुजराती व्यंजनों की, जो न केवल पूरे भारत में बल्कि विश्व में भी अपनी पहचान बना रहा है। आप किसी भी पर्यटन स्थल पहुंच जाए, वहां गुजराती थाली आपको जरूर मिलती है। एक बार काम के सिलसिले में अहमदाबाद जाना हुआ था। वहां के एक परंपरागत रेस्तरां में पारंपरिक गुजराती थाली खाने का मौका मिला। एक बड़ी सी थाली आैर उसके साथ कई छोटी-छोटी कटोरियां। इतनी वेरायटी कि पेट तो भर जाए लेकिन मन न भरे! कढ़ी से लेकर थेपला तक उस थाली में था, लेकिन रोटी आैर परांठे इतने छोटे कि आप एक कौर में उसे खा लें। वहीं मिली एक महिला ने बताया था कि हम गुजराती यदि बड़ी रोटी या परांठा बना लें तो लोगों को यह सोचने का मौका मिल जाता है कि इन्हें खाना बनाने का शऊर नहीं हैं। गुजरातियों की यही खास बात है, ये खाना भी बहुत प्यार से आैर समय देकर बनाते हैं। गुजराती डिशेज का नाम आते ही सबसे पहली तस्वीर ढोकला की सामने आती है, जिसे उत्तर भारतीय शाम के नाश्ते के समय चाय के साथ खाते हैं। लेकिन आपको यह जानकर जरूर आश्चर्य होगा कि गुजरातियों के लिए ढोकला मेन मील में शामिल होता है। जिस तरह हम रोटी-सब्जी या परांठा खाते हैं, उसी तरह गुजराती ढोकला खाते हैं। यहां बनाए जाने वाला ढोकला न केवल भाप में पका होता है, बल्कि कुछ लोग इसे फ्राई करके भी बनाते हैं। कई आकार, रंग आैर स्टाइल में मिलने वाले ढोकला को हरी या मीठी चटनी के साथ खाया जाता है। मीठी चटनी गुजरातियों के घर हमेशा मिलती है, जैसे उत्तर भारतीयों के घर धनिये की हरी चटनी। इनकी मीठी चटनी खजूर आैर इमली को मिक्स करके बनती है। ढोकला की तरह ही हांडवा भी मेन मील का ही हिस्सा है। ब्रेकफास्ट हो या लंच या फिर डिनर ही क्यों नहीं, एक गुजराती कभी भी हांडवा को मना नहीं कर सकता। हांडवा को आप ढोकला परिवार का ही हिस्सा समझिए, जो अपने लुक आैर स्वाद की वजह से ढोकला से अलग है। हांडवा को प्रेशर कुकर या हांडवा कुकर में पकाया जाता है। गुजरात में हांडवा कुकर अलग से मिलता है। मटर, 14 copyअदरक, लहसुन, हरी मिर्च आैर धनिया जैसे इनग्रेडिएंट्स हांडवा को जायकेदार बना देते हैं, जिसे अचार के साथ खाया जाता है।
उत्तर भारतीयों के लिए परांठे का जो महत्व है, वही महत्व गुजरात में थेपला का है। इन्हें आप स्टफ्ड परांठा समझने की भूल नहीं कीजिए, ये उससे काफी अलग हैं। यात्रा के दौरान गुजरातियों का यह फेवरेट मील होता है, जिसे ये यात्रा से पहले ही बड़ी मात्रा में बनाकर रख लेते हैं ताकि यात्रा के दौरान भूख लगे तो परेशानी न हो। अचार आैर विभिन्न तरह की करी के साथ थेपला का स्वाद लेने के लिए कोई भी गुजराती मना तो बिल्कुल नहीं करेगा। उत्तर भारतीयों की कढ़ी गुजरातियों के लिए भी कमाल का काम करती है। उत्तर भारतीयों से बिल्कुल अलग, ये लोग कढ़ी को केवल चावल के साथ नहीं खाते अपितु खिचड़ी, चावल, चपाती या थेपला कुछ भी कढ़ी के साथ दौड़ पड़ता है। जब गला खराब हो तो गरमागरम कढ़ी दवा की तरह काम करती है। अभी कुछ दिनों पहले ही फेसबुक पर एक पोस्ट देखा था, जिसमें एक महिला ने उंधियो बनाकर उसकी तस्वीर डाली थी आैर कमेंट्स में कई लोगों ने उंधियो की जबरदस्त तारीफ की थी। उंधियो एक पारंपरिक गुजराती डिश है, जिसेे मकर संक्रांति के दौरान पकाया जाता है। इसमें कई तरह की सब्जियां, मसाले आैर ड्राईफ्रूट्स डाले जाते हैं। बाजरे का बना रोतलो अब दूसरे राज्यों के होटल के मेन्यू में पहुंच चुका है। बाजरे के आटे से बने रोतलो को सफेद कच्चे प्याज, हरी मिर्च आैर छाछ के साथ खाया जाता है, जो बेहद स्वादिष्ट लगता है। लेकिन जब इसे गुड़ आैर गरम घी के साथ खाओ तो असल में इसका स्वाद समझ आता है। इसे पसंद करने वाले इस कॉम्बिनेशन को जन्नत कहते हैं।
गुजरात में यदि किसी को भूख लगती है तो वह दो मिनट में पकने वाले नूडल्स से अपनी भूख नहीं मिटाता बल्कि एक ठेठ गुजराती टमाटर आैर प्याज की करी को हरी धनिया से गार्निश करता है आैर उसे नमकीन सेव के साथ चट कर जाता है। जिन गुजरातियों को मसालेदार खाना पसंद नहीं आता, उनके लिए खांडवी है। इसे भी बेसन आैर दही के साथ बनाया जाता है, जिसे हरी मिर्च या खजूर की बनी चटनी के साथ खाने का प्रचलन है। हरी मिर्च आैर लहसुन की चटनी में डूबोए एक खांडवी को अपनी जीभ पर रखकर तो देखिए, आप आैर खाने से खुद को रोक नहीं पाएंगे।
मुंबई में शाम की चाय के साथ खाखरा खाने का चलन है। मुझे शुरू में लगता था कि यह मराठी डिश है, वह तो बाद में पता चला कि यह भी गुजरात की ही देन है। ये न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि हेल्दी भी। जीरा, मसाले आैर मेथी के साथ आटे की मदद से बनाया गया खाखरा क्रिस्पी आैर लज्जतदार लगता है। जिन लोगों को अपने हेल्थ आैर फिटनेस की चिंता रहती है, उनके लिए खाखरा बेहतरीन नाश्ता आयटम है। फाफड़ा गुजरात के हर शहर के हर गली- मोहल्ले में मिल जाएगा। इसे फ्राई की गई हरी मिर्च आैर जलेबी के साथ खाने का अजीबोगरीब चलन है। फाफड़ा आैर हरी मिर्च जहां आपके तीखे मसालेदार स्वाद को पूरा करते हैं, वहीं जलेबी उस तीखेपन को कम करने के साथ ही आपके स्वीट टूथ को पैंपर करती है। राजकोट की मीठी चटनी आैर हरी मिर्च के साथ गंठिया भी नाश्ते के साथ खाया जाता है आैर हर चायवाले के पास मिलता भी है।
बर्गर का दूसरा नाम दाबेली है, जिसे पहली बार मैंने मुंबई में ही चखा था। मूल रूप से यह गुजरात के कच्छ क्षेत्र से आया है, जिसे हर उम्र के लोग खाना पसंद करते हैं। इसे आप वड़ा पाव का एक रूप भी कह सकते हैं, जिसमें मैश किए आलू आैर मसाले एवं मूंगफली स्टफ्ड रहती है। इसे खजूर आैर इमली की बनी मीठी चटनी के साथ सर्व किया जाता है। खाने के शौकीन गुजरातियों के लिए मीठा खाना बहुत जरूरी रहता है। इसके लिए वे त्योहार का इंतजार नहीं करते। लेकिन त्योहारों पर यहां घुघरा बनाए जाने की परंपरा है, जो आधे चांद के आकार का स्टफ्ड रहता है। कुछ लोग फ्राई करने की बजाय बेक करना पसंद करते हैं। श्रीखंड के बारे में तो अधिकतर लोगों ने सुना आैर चखा भी होगा। यह दही की तरह ही होता है लेकिन कई फ्लेवर में उपलब्ध होने के कारण काफी स्वादिष्ट लगता है। पुणे प्रवास के दौरान पहली बार मुझे मोहनथाल खाने का मौका मिला, जो बेसन का बना होता है लेकिन इतना स्वादिष्ट कि काजू की बर्फी की बराबरी कर ले।

गुजराती कढ़ी
GujaratiKadi copyसामग्री – 2 कप खट्टी दही, 2 चम्मच बेसन, 4 कप पानी, थोड़ी हींग, स्वादानुसार नमक, लाल मिर्च पाउडर, दालचीनी पाउडर, 2 चम्मच चीनी, 2 चम्मच तेल, 2 चम्मच साबुत सरसों, 8- 10 करी पत्ते, 3-4 साबुत लाल मिर्च, हरी धनिया। विधि – दही को फेंटकर इसमें बेसन मिलाएं आैर इतना फेंटे कि यह मुलायम हो जाए। इसमें हींग, नमक, लाल मिर्च पाउडर, दालचीनी पाउडर, चीनी आैर पानी डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। एक कढ़ाही में तेल गरम करके सरसों, करी पत्ते आैर लाल मिर्च डालें। जब सरसों चटकने लगे तो दही का मिश्रण डालकर आंच तेज करके इसमें उबाल ले आएं। अब आंच धीमी करके 15- 20 मिनट तक पकने दें। हरी धनिया से गार्निश करके गुजराती कढ़ी को सर्व करें।


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