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तिरछी नज़र

Posted On January - 10 - 2017

पढ़िये दिमाग रहिये सुखी

प्रदीप उपाध्याय
काश! हमारे देश में भी तकनीकों का प्रयोग किया जाता तो आज नेताजी को ये दिन नहीं देखने पड़ते। अब वे पुत्र पर विश्वास करें या फिर भाई और तथाकथित वफादार पर! यह सिर्फ नेताजी की ही बात नहीं है, इस तकनीक का इस्तेमाल करके हम कई भावी समस्याओं से निजात पा सकते हैं। देखिये, ब्रिटेन के लोग कितने समझदार हैं,वहां ब्रिटिश रॉयल बैंक जॉब देने से पहले कैंडिडेट्स को माइंड रीडिंग कैप्स पहनाकर उनके दिमाग को पढ़ लेता है और इससे आने वाले परिणाम के आधार पर ही तय करते हैं कि बैंक में उन्हें काम दिया जाए या नहीं या बैंक में किस तरह का कार्य दिया जाए। ब्रेन स्कैनर के इस्तेमाल से यह भी पता चल जाता है कि कैंडिडेट्स के दिमाग में इन्टरव्यू के समय क्या चल रहा है। तकनीक में वे आगे हैं, शायद इसीलिए वहां पोलिटिकल ड्रामा नहीं होता।
हमारे देश में भी सभी राजनीतिक दलों के हाईकमान टिकट वितरण के पहले इस तकनीक के द्वारा टिकट की चाह रखने वाले कैंडिडेट्स और पार्टी में शामिल होने वालों को ब्रेन कैप पहनाकर उनके ब्रेन द्वारा दी गई प्रतिक्रियाओं के आधार से उनके व्यक्तित्व का पता कर सकते हैं। शायद इस तकनीक के द्वारा यह भी पता किया जा सकेगा कि व्यक्ति ज्यादा महत्वाकांक्षी तो नहीं है, अस्थिर स्वभाव का तो नहीं है, वफादारी की कितनी उम्मीद की जा सकती है, पार्टी में घुसने और टिकट पाने के पीछे ध्येय क्या है? पार्टी में टिकेगा या लालच में आकर आयाराम-गयाराम हो जाएगा। कौन पार्टी का वफादार सैनिक निकलेगा, कौन दगाबाज, धोखेबाज होगा।
सम्बन्धों को जोड़ने में भी इस तकनीक का प्रयोग किया जा सकता है। एक नजर के प्यार में आदमी न घर का रहता है, न घाट का! वैसे भी आज के दौर में सास, बहू और साजिश के चलते घरों के विघटन होते देर नहीं लगती। सम्बन्धों में कसमें, वादे, प्यार और वफा की अनिवार्यता जो रहती है। सुखी परिवार की यह अनिवार्य शर्त भी है। अतः दोनों ही पक्ष इस तकनीक के द्वारा मनचाहा पार्टनर, मनचाहे दामाद-बहू का चयन कर सकते हैं। हो सकता है कि इससे परिवार के टूटने की नौबत न आए!
एक और महत्वपूर्ण बात, किसके पास काला धन है, किसने अपना काला न देश में ही विनिवेशित किया है, किसने विदेशी बैंकों में जमा कर रखा है। ब्रेन कैप पहनाकर जाना जा सकता है। इसी से यह मालूम किया जा सकेगा कि कहीं यह व्यक्ति विजय माल्या तो नहीं बन जाएगा।
क्या हम ब्रिटेन की तरह इतने एडव्हान्स होकर माइंड रीडिंग शुरू करेंगे! आपके दिमाग में क्या चल रहा है, मैं जान सकूंगा और मेरे दिमाग में क्या चल रहा है, आप जान सकेंगे। फिर देर किस बात की है!


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