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दम…आलू ने निकाला, किसानों को प्रति एकड़ 20 हजार घाटा

Posted On January - 11 - 2017

राम कुमार तुसीर
सफीदों, 11 जनवरी

सफीदों की सब्जी मण्डी मे बिकने को कई दिन से पड़ी आलू की बोरियां। -निस

सफीदों की सब्जी मण्डी मे बिकने को कई दिन से पड़ी आलू की बोरियां। -निस

कृषि वैज्ञानिक भले ही किसानों को फसल चक्र अपनाने का मशवरा दशकों से दे रहे हैं और सब्जी उत्पादन एवं बागवानी का क्षेत्र बढ़ाने को बजट लुटाया जा रहा है लेकिन सब्जियों के भाव गिरने से सब्जी उत्पादक किसानों की घाटे से निरंतर कमर टूट रही है। आलू के भाव में भारी गिरावट के कारण क्षेत्र में अनेक किसानों ने आलू उत्पादन से तौबा कर ली है। वे दूसरी सब्जियों के प्रति भी उत्साहित नहीं हंैं और इसका कारण है सब्जी उत्पादन में निरंतर भारी घाटा।
सफीदों की सब्जी मण्डी में बढ़िया कहे जाने वाले आलू का अधिकतम भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि आम भाव 280 से 350 रुपये प्रति क्विंटल ही है।
इलाके में सबसे अधिक आलू उगाने वाले सब्जी मण्डी के आढ़ती अशोक अरोड़ा ने बताया कि पुराने आलू का तो कोई खरीदार ही नहीं है जिसे आवारा पशुओं तक को परोसा जा रहा है। उन्होंने बताया कि नोटबंदी व पुराने आलू का भण्डार बचा रहने के कारण यह दुर्गति हुई है जबकि आढ़ती सुभाष सैनी ने बताया कि पंजाब व शाहबाद के आलू ने यहां बाजार की मिट्टी पलीत की है और अभी भाव उठने की कोई सम्भावना भी नहीं है। सैनी ने बताया कि अमृतसर व जालंधर से यहां आलू आ रहा है और अब लोकल भी शुरू होने वाला है। इधर किसान गुरनाम ने बताया कि इसी तरह फूलगोभी व बंदगोभी अढाई-तीन रुपये प्रति किलो पिट रही है और इस भाव में मजदूरी भी किसान के पल्ले नहीं पड़ती। गुरनाम का कहना था कि आलू उगाने में प्रति एकड़ करीब  हजार रुपये का खर्च आता है और बीज की गुणवत्ता अनुसार एक एकड़ में 80 से 150 क्विंटल आलू सामन्य तौर पर पैदा होता है जो यहां कोल्ड स्टोर  की सुविधा न होने के किसानों को तत्काल बेचना होता है और ऐसे मे भाव गिर जाता है। गुरनाम ने बताया कि सालाना पट्टे पर जमीन लेकर आलू की खेती करने वाले किसानों को इस स्थिति में प्रति एकड़ 20 रुपये का नुकसान है और यह नुकसान पिछले सीजन में भी किसानों ने झेला है। मंगलवार को सब्जी मण्डी में सिवाणामाल, सफीदों, बहादुरगढ़ व खेड़ाखेमावती के कई किसानों ने बताया कि लगातार घाटा रहने की वजह से उन्होंने आलू की फसल से तौबा कर ली है।
न कोल्ड स्टोर, न सरकार का ध्यान
किसानों का कहना था कि सरकार इस इलाके पर ध्यान नहीं दे रही है, यहां कोल्ड स्टोर नहीं है और ना ही बागवानी की अनुदान योजनाओं बारे जानकारी तक दी जा रही है। किसानों ने बताया कि यहां के व्यापारी उत्तर प्रदेश के आगरा से आलू खरीद कर वहीं कोल्ड स्टोर में लगा देते हैं और मांग होने पर यहां ले आते हैं। किसानों के अनुसार पंजाब, हिमाचल व उत्तरप्रदेश की सब्जियां थोक में भारी मात्रा में इस इलाके में लाकर बेची जाती है और इस तरह से यहां के सब्जी उत्पादक किसान के उत्पादों का भाव पीट दिया जाता है जिससे किसान निरंतर घाटे में हैं।


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