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पानी याद दिलायेगा नानी

Posted On January - 11 - 2017

शमीम शर्मा

दो बार नोबल पुरस्कार विजेता मैरी क्यूरी का कहना है कि मैं यह कभी नहीं देखती कि क्या हो चुका है, मैं तो सिर्फ यह देखती हूं कि क्या होना बाकी है। हमारे नेताओं का ध्यान हमेशा जो हो चुका, उसी पर रहता है। पांच राज्यों में चुनावों की घोषणा क्या हुई कि बखिये उधेड़ने का सिलसिला ज़ोर पकड़ता जा रहा है। सबने पाड़-तिवाड़े करने शुरू कर दिये हैं।
पंजाब में इस बार पानी पर चुनाव टिका है। पंजाब का मतलब ही पांच नदियों के पानी से था। यह पानी सतलुज, चिनाब, रावी, झेलम और ब्यास नदियों का है। पर अब पानी नदियों का नहीं, नेताओं का हो गया है। यूं कह लो कि पंजाब में नेताओं ने पानी में आग लगा रखी है।
ताज्जुब की बात तो यह है कि जो नेता हरियाणा के पानी के हिस्से की पैरवी कर रहे हैं, वे पंजाब में घुसते ही इस पैरवी पर पानी फेर देते हैं। और कुछ हो ना हो पर ऐसे नेताओं से जनता पानी भरवा कर ही दम लेगी। वैसे लीडरों की जात चिकने घड़े की होती है जिस पर दो बूंद पानी भी नहीं ठहरता। शायद यही कारण है कि उन्हें अपने किसी भी कहे या किये पर पानी-पानी होना कभी नहीं आया।
पानी का रंग बदलना तो इनके बायें हाथ का खेल है। कई बार मन में विचार आता है कि नेताओं का बायां हाथ इतना ताकतवर है और अगर ये किसी दिन दायें हाथ की हिम्मत दिखाने पर तुल गये तो समझो कई नप जायेंगे। नेताओं से सावधान करते हुए एक सज्जन ने अपने घर के बाहर लिखवा दिया-हाथ जोड़कर वोट मांगना हर नेता की अदा है, जो इनका विश्वास कर ले वो मानस गधा है।
जल युद्ध ही पंजाब के नेताओं के मेनीफैस्टो की नीव है। इस बार यह पानी कइयों के घुटने टिकवा देगा तो कइयों को अपने बहाव में बहाकर अज्ञात स्थान पर ले जायेगा। वोट ऐसी चीज़ है जो बड़ों-बड़ों को पानी पिला सकती है।
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एक बर की बात है अक रामप्यारी अपणे घरआले तैं उलाहना देते होये बोल्ली-जद मैं ब्याही आई थी तो थम मन्नैं मलाई, रबड़ी, बरफी अर बेरा नीं किसे-किसे नाम तैं पुकारा करते। ईब के होग्या? नत्थू उसतैं समझाते होये बोल्या-बावली, दूध की मिठाई ज्यादा दिन नहीं टिक्या करती।


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