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वेब मकड़जाल में फंसे हम

Posted On January - 1 - 2017

फीचर टीम
15 copyआभासी दुनिया यानी कि फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम या स्नैपचैट की दुनिया। हैरानी की बात है कि आज हमारी हकीकत की दुनिया इस आभासी दुनिया के चलते डगमगाने लगी है। इसीलिए इस बात पर चर्चाएं-परिचर्चाएं होने लगी हैं कि कितनी सही है यह दुनिया। इस आभासी दुनिया के फेर में पड़े हम भूल चुके हैं कि वास्तविक संसार कितना सुंदर है। वेब की दुनिया के मकड़जाल में फंसे हम शायद इस सुंदरता को देखना भी नहीं चाहते। क्या हमें मुद्दे पर एक बार फिर सोचने की जरूरत  नहीं है?
चर्चाओं के दौरान हम इस निष्कर्ष पर भी पहुंचते हैं कि वेब दुनिया बिल्कुल ही फिजूल भी नहीं है। आज के दौर में हमारा सारा नेटवर्क कहीं न कहीं इसी के बलबूते चलता है। हम अपनी राय जनता तक पहुंचाना चाहते हैं तो सोशल मीडिया सबसे कारगर है। अपने पर्सनल पिक्चर्स, अपनी बातें फेसबुक के जरिए दोस्तों संग शेयर करते हैं, बढ़िया कमेंट्स का लुत्फ उठाते हैं। पर सवाल फिर वही कि फेसबुक पर दोस्त सैकड़ों में और हकीकत की दुनिया में कितने? हमारा सारा दिन ही अब माेबाइल फोन या लैपटॉप पर निकलने लगा है। रात न हो तो हम सोएं भी न और 24 में से अधिकतर समय वेब की दुनिया में ही बिताएं। इस बारे में एक सर्वे के दौरान जब कुछ लोगों से बात की गयी तो मजेदार तथ्यों से रूबरू हुए। लोगों ने माना कि आज के युग में इंसान के ऊपर सबसे हावी चीज का नाम इंटरनेट ही है। हम इस बिना तार वाले कनेक्शन से कुछ इस कदर जुड़े हैं कि निकलने का सवाल ही नहीं। सवाल तो तब पैदा हो, जब हम निकलना चाहें। सर्वे में लोगों ने कहा कि हमारे में से अधिकांश बिना किसी खास जरूरत के इंटरनेट पर सर्फिंग में जुटे रहते हैं। दिन में बहुत कम समय ऐसा होता है कि हमें इसकी सच में जरूरत होती है। फेसबुक पर कुछ अपलोड किया या ब्लॉग पर, उसके बाद का काफी समय प्रतिक्रियाओं के इंतज़ार में मोबाइल हाथ में पकड़े निकल जाता है। वह दिन गए, जब हमारे बड़े-बुजुर्ग कहा करते थे कि किताबें हमारी अच्छी दोस्त। आज की पीढ़ी से पूछें तो कहेगी कि इंटरनेट हमारा बेस्ट फ्रेंड।  हालांकि सर्वे में जब युवावर्ग से बात की गयी तो तथ्य और भी मजेदार होते चले गए। कुछ ने माना कि इंटरनेट के बिना अब जिंदगी मुश्किल है। हालांकि कुछ का यह भी कहना था कि वे दिन ज्यादा अच्छे थे, जब आभासी दुनिया का नामोनिशान नहीं था। बिना एप्स और मीडिया साइट्स के हम अपने दोस्तों, परिवार वालों और रिश्तेदारों के अधिक निकट थे। वहीं कुछ का नज़रिया था कि इंटरनेट आज हमारी जिंदगी में इतना घुसपैठ कर चुका है कि इसे डिलीट करना या फिर मिनिमाइज़ करना असंभव सा लगता है। जो लोग यह कहते हैं कि इसके बिना ही जिंदगी हैप्पी होगी, उन्हें सोचना चाहिए कि इसे जिंदगी से निकालना अब लगभग असंभव है।  यहां यह तथ्य जानना भी जरूरी है कि हममें से अधिकांश का कामकाज आज वेब दुनिया से ही जुड़ा है। जिन लोगों की रोज़ी-रोटी इससे जुड़ी है, वे इसकी हिमायत करेंगे ही। इस संबंध में जब एक ऑनलाइन लेखक से बात की गयी तो उनका जवाब था कि वेब पोर्टल उनके लिए किसी नियामत से कम नहीं है। उन्हें अपने काम के लिए किसी बड़े ऑफिस की जरूरत नहीं पड़ती। मात्र एक लैपटॉप में उनका पूरा ऑफिस समाया है। वह सारा दिन इस पर काम करते हुए अपनी जीवनचर्या चला रहे हैं। लेकिन जिस दिन ऑफिस वर्क नहीं होता, उस दिन वे लैपटॉप को देखते तक नहीं। वह सारा दिन उनके परिवार के लिए होता है।


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