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हड़ौदी कांड : मृतकों की याद में रक्तदान शिविर आज

Posted On January - 11 - 2017

भिवानी, 11 जनवरी (हप्र)
बाढड़ा के समीप घटित हुई भीषण सड़क दुर्घटना में 22 लोगों की दर्दनाक मौत के दिल दहलाने वाले मंजर को घटित हुए भले ही 15 वर्षों का लंबा अर्सा बीत गया हो लेकिन उस भयानक मंजर को याद कर आज भी रुह कांप उठती है। प्रदेश सरकार ने भले ही 9 लाख की राशि उनके परिजनों व 25 लाख की राशि उनके स्मारक के लिए जारी कर दी, लेकिन कई परिवारों में पुरुषों के चले जाने के बाद महिलाओं को मजबूरन अपने परिजनों का पेट पालने के लिए बड़ी जिम्मेवारी संभालनी पड़ रही है। जिस बिजली आपूर्ति की मांग को लेकर ग्रामीणों की जान गई वो समस्या आज भी ज्यों की त्यों बनी हुई है और पंचों की आपसी खींचतान के चलते स्मारक निर्माण कार्य भी खटाई में है। वहीं हड़ौदी विद्यालय प्राचार्य डा. सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि शहीद किसानों की याद में 12 जनवरी को एनएसएस विद्यार्थियों द्वारा एकदिवसीय रक्तदान कैंप का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्घाटन चरखी दादरी व बाढड़ा के एसडीएम बिजेन्द्रसिंह हुड्डा करेंगे।

12 जनवरी, 2002 में हुआ था हादसा
12 जनवरी, 2002 को हड़ौदी गांवों के ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल बिजली समस्या के लिए बाढड़ा के बिजली विभाग के एसडीओ कार्यालय आया था तथा जब वह वापस अपने गांव लौट रहा था तो कस्बे से निकलते ही सामने से आ रहे एक ट्रक व उनके टाटा 407 वाहन में सीधी भिड़ंत हो गई। इस मार्मिक दुर्घटना में 18 ग्रामीणों व 4 बिजली कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई। हड़ौदी सडक़ हादसे के मृतकों के आश्रित राजपाल, कृष्ण संजय, बोबदी, निर्मला, रिशालों देवी इत्यादि से बातचीत की तो घटना का जिक्र करते ही वे भावविह्वल हो जाते हैं।

अब उभर चुके हैं ग्रामीण : सरपंच
हड़ौदी के सरपंच अनिल श्योराण ने कहा कि गांव के लिए यह सड़क दुर्घटना एक बड़ा हादसा थी लेकिन समय के साथ ग्रामीण इस दुखद घड़ी से भी उभर चुके हैं। आज प्रत्येक घर से एक या 2 युवक केन्द्र या प्रदेश सरकार की नौकरी कर रहे हैं वहीं ग्रामीण भी कृषि के बदलते स्वरूप में आधुनिकीकरण के साथ अपने आप को ढाल चुके हैं। ग्रामीण विकास में पंचों को भी अन्य गांवों की तरह भाईचारे से ग्राम पंचायत का सहयोग करना चाहिए।


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