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5 राज्य, 5 चुनाव; 5 मुख्यमंत्री कौन?

Posted On January - 6 - 2017

144 copy5 राज्य-पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर। चुनाव का बिगुल बज चुका है। सभी दलों की तैयारियां जोरों पर हैं। लगभग एक महीने चलने वाले चुनाव के लिए सभी पार्टियों के उम्मीदवार तय हैं। कुछ ने सूची घोषित कर दी है। कुछ की बाकी है। कहीं बगावत है। कहीं गठबंधन की आस। इन सबके बीच सभी प्रमुख दलों ने यह तय कर दिया है कि वे चुनाव जीते तो उनका मुख्यमंत्री कौन होगा? भारतीय जनता पार्टी ने 5 में से 3 राज्यों में मुख्यमंत्री घोषित नहीं किया है। भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और चेहरे के साथ मैदान में है। अब देखना यह है कि इन 5 राज्यांे में मुख्यमंत्री कौन कौन बनते हैं?  उपेंद्र पाण्डेय  की रिपोर्ट…

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित करने में कांग्रेस सबसे आगे नजर आ रही है। यूपी में कांग्रेस ने दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित का नाम घोषित कर रखा है, यह बात दूसरी है कि शीला दीक्षित खुद अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और समाजवादी पार्टी की ओर से दोबारा मुख्यमंत्री बनने को ताबड़तोड़ ताल ठोंक रहे अखिलेश यादव को अपने से बेहतर मुख्यमंत्री करार दे रही हैं। यूपी में अभी तक चार पार्टियों की चुनावी जंग में सत्तारूढ समाजवादी पार्टी की ओर से ही पांचवां कोना भी उभरता दिख रहा है और बेटे अखिलेश के मुकाबले पुराने अखाड़ची पहलवान मुलायम सिंह यादव को ताल ठोंकने की नौबत आन पड़ी है। बसपा की ओर से पार्टी सुप्रीमो मायावती मुख्यमंत्री उम्मीदवार होंगी। भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़ेगी।

समाजवादी पार्टी
अखिलेश यादव
ak copyसमाजवादी पार्टी में फिलहाल अधिकारों की जंग जारी है। मौजूदा सीएम अखिलेश के मुख्यमंत्री पद दावेदार हैं, लेकिन उनके पिता और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव कह चुके हैं कि सीएम उम्मीदवार का फैसला चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी करेगी। अब अखिलेश और उनके चाचा रामगोपाल ने पार्टी का अधिवेशन बुलाकर अखिलेश को मुख्यमंत्री उम्मीदवार और पार्टी का अध्यक्ष घोषित कर दिया है। मुलायम सिंह ने भी कड़ा कदम उठाते हुए रामगोपाल यादव को पार्टी से निकाल दिया है। अब पिता और पुत्र में पार्टी और चुनाव चिह्न को लेकर जंग जारी है। दोनों ने ही ‘साइकिल’ की सवारी के लिए चुनाव आयोग में अपना हक जताया है। अगर दोनों में सुलह हो जाती है तो अखिलेश ही सपा के सीएम पद के उम्मीदवार होंगे। अगर सुलह नहीं होती है तो गुट के सीएम पद के उम्म्ीदवार अखिलेश होंगे।
तो कौन होगा मुलायम का सीएम? : अगर मुलायम अखिलेश से अलग चुनाव लड़ते हैं तो उनकी पार्टी का सीएम उम्मीदवार कौन होगा? क्या मुलायम खुद मैदान में उतरेंगे या शिवपाल को कमान देंगे।  इस पर अभी अगर-मगर का ही सवाल है।

बहुजन समाज पार्टी
मायावती
maya copyमुख्यमंत्री पद के दावेदारों में सबसे कम कांटे किसी की राह में हैं तो वह हैं बहुजन समाजवादी पार्टी की सुप्रीमो मायावती। वे बसपा की अध्यक्ष हैं और पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार भी। साठ वर्षीय मायावती बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में संस्थापक कांशीराम की उत्ताधिकारी हैं। वे चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं हैं। हालांकि तीन बार उनका कार्यकाल काफी छोटा रहा। एक बार वे भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करके सरकार बना चुकी हैं। वे अपनी सोशल इंजीनियरिंग के लिये मश्ाहूर हैं। दलित उनका वोटबैंक हैं। हालांकि इस बार उनकी नजर मुस्लिम समुदाय पर भी है। उनका मानना है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से रूठे मुस्लिम वोटर बसपा की ओर आ सकते हैं। यही कारण है कि उन्होंने इस बार काफी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद मायावती के सामने अपनी पार्टी को बचाए रखने के लिए यही मौका है। अगर वे इस बार भी चूक जाती हैं तो उनके लिए आगे की राह मुश्किल हो सकती है। लोकसभा में उत्तर प्रदेश से बहुजन समाज पार्टी का एक भी उम्मीदवार नहीं जीत पाया था। मायावती कहती हैं कि सपा की गुंडागर्दी से परेशान जनता के पास अब बसपा के रूप में ही विकल्प बचा है।

कांग्रेस
शीला दीक्षित
see copyमुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित करने में कांग्रेस सबसे आगे रही है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने कई महीने पहले ही दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का नाम घोषित कर दिया था। यह बात दूसरी है कि शीला दीक्षित खुद अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और समाजवादी पार्टी की ओर से  दोबारा मुख्यमंत्री बनने को ताबड़तोड़ ताल ठोंक रहे अखिलेश यादव को अपने से बेहतर मुख्यमंत्री करार दे रही हैं।  केजरीवाल से हारने के बाद शीला को पार्टी ने उत्तर प्रदेश भेजा है। कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ब्राह्मण वोट को देखते हुए शीला को यूपी में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है।

भाजपा मोदी के सहारे
भारतीय जनता पार्टी की ओर से उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए किसी को भी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है। अमित शाह यूपी में काफी समय से काम कर रहे हैं। पार्टी ने अपना प्रचार अभियान जोर-शोर से छेड़ा हुआ है, लेकिन किसी चेहरे को सीएम के लिए प्रोजेक्ट किया है। अभी पार्टी पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ही निर्भर है।

पंजाब
पंजाब में आम आदमी पार्टी की एंट्री ने विधानसभा चुनाव को रोचक बना दिया है। अभी तक प्रदेश में सियासी जंग शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के बीच होती थी। मुख्यमंत्री भी इन्हीं पार्टियों से बनते आये हैं। एक बार कांग्रेस का तो एक बार अकाली दल का। पिछले दस साल से पंजाब में अकाली दल की सरकार है। अकाली दल से प्रकाश सिंह बादल तो कांग्रेस की ओर से कैप्टन अमरेंद्र मुख्यमंत्री बनते रहे हैं। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में पंजाब से चार सांसद जिताने वाली आम आदमी पार्टी के हौसले इस बार बुलंद हैं। वह भी पंजाब की सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। लुधियाना के बैंस बंधुओं के साथ गठबंधन कर आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल अकाली दल और कांग्रेस को कड़ी चुनौती देने के मूड में हैं। कांग्रेस और अकाली दल भी आम आदमी पार्टी को हल्के में नहीं ले रहे हैं।

शिरोमणि अकाली दल
प्रकाश सिंह बादल
par copyपिछले चुनाव को अपना आखिरी चुनाव बताने वाले प्रकाश सिंह बादल एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल ओर भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। हालांकि चुनाव का सारा प्रबंधन और रणनीति उनके बेटे व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल देख रहे हैं। वे इस बार भी अपने पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र लंबी से चुनाव मैदान में उतरेंगे। अकाली दल का सबसे बड़ा वोट बैंक पंथक वोटर हैं। इसलिए अकाली दल विभिन्न धार्मिक यादगारें, दरबार साहिब के इर्द-गिर्द के सौंदर्यीकरण एवं अन्य पंथक मु्द्दों की ओर लौट रही है।  अकाली दल विकास को अपनी जीत की सबसे अहम कड़ी मानता है। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह का कहना है कि अकाली-भाजपा सरकार ने दस साल में प्रदेश का जितना विकास कराया है, उतना अब तक किसी ने नहीं कराया। अब पार्टी दस साल में कराए गए विकास कार्याें को जनता तक पहुंचाने में जुटी है। पार्टी अपना ज्यादा ध्यान विकास के मुद्द्े उठाने पर ही लगा रही है।
इसके लिए अखबारों में विज्ञापनों का सहारा लिया जा रहा है। सरकार की ओर से कराए गसे विकास कार्यों की ‘किताब’ घर-घर बंटवाई जा रही है।

बगावत कर सकती है परेशान    
दस साल की सत्ता विरोधी लहर के चलते मतदाताओं की नाराजगी कई जगह काफी बढ़ चुकी है। पंजाब में नशे, खनन, ट्रांसपोर्ट, केबल आदि माफिया के लग रहे आरोपों का कोई वाजब जवाब नहीं है। बादल बजुर्ग हो गये हैं और सुखबीर बादल पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों में अभी पूरी तरह स्वीकार्य नहीं हैं। बेरोजगारी बहुत बड़ा मु्द्दा है, जो दस साल के शासन के कारण अकाली-भाजपा के खाते में ही आता है।

कांग्रेस
कैप्टन अमरेंद्र सिंह
cap copyकांग्रेस ने प्रकाश सिंह बादल के धुर विरोधी कैप्टन अमरेंद्र सिंह को पंजाब में पार्टी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया है। पहले सीएम और सांसद रह चुके कैप्टन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। 2002 से 2007 तक मुख्यमंत्री रहे कैप्टन ने सिखों और किसानों में खास तौर पर अपना रसूख बढ़ा लिया था। कैप्टन काफी लंबे समय से प्रदेश में चुनाव प्रचार  मुहिम चला रहे हैं। वे शहरी हिंदू और दलित वोट बैंक के परंपरागत वोट बैंक को साथ लाने के भी प्रयास में है। एसवाईएल के मुद्दे पर संसद से इस्तीफा देने वाले कैप्टन की किसानों में खासी पकड़ है। वे नशे के मुद्दे पर भी अकाली दल को घेर रहे हैं। वे अपनी सभाओं में कहते हैं कि अगर उनकी सरकार बनी तो वे तीन महीने में पंजाब से नशे को खत्म कर देंगे। प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत बादल, भाजपा के पूर्व सांसद नवजोत  सिंह सिद्धू के आने से कांग्रेस और कैप्टन को और भी ताकत मिल सकती है। इस बार कैप्टन अभी तक तो पार्टी में गुटबाजी पर लगाम लगाने में कामयाब रहे हें।  अगर कैप्टन कांग्रेस को पंजाब जीतकर देते हैं तो यह पार्टी के लिए संजीवनी होगी। क्योंकि कांग्रेस की अगर कहीं से जीत की संभावनाएं हैं तो वह पंजाब ही है।

आप
अभी घोषित नहीं
aap copyलोकसभा चुनाव में पंजाब से चार सांसद बनाने और 24 फीसद वोट हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी अब विधानसभा चुनाव में भी ताल ठोक रही है। हालांकि पार्टी ने पंजाब में किसी को भ्ाी मुख्यमंत्री उम्मीदवार नहीं बनाया है। अभी पार्टी का नेतृत्व दिल्ली के सीएम और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं। अभी पार्टी का वही चेहरा हैं और वही नाम। आप ने सत्तारूढ़ अकाली दल को सीधी चुनौती दी है। पार्टी के पंजाब के नेता व सांसद भगवंत मान को डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ जलालाबाद से उतारा है। यही नहीं जरनैल सिंह लंबी में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने अपना पूरा जोर पंजाब पर लगाया हुआ है। वे अब तक यहां कई रैलियां कर चुके हैं। वे अपनी रैलियों में भ्रष्टाचार और परिवारवाद पर निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि अगर आप की सरकार बनी तो वे पंजाब में भ्रष्टाचार पर रोक लगा देंगे। परिवारवाद पर उन्होंने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर धावा बोला। उनका कहना है कि पंजाब में अकाली नहीं, बल्कि बादल सरकार है। कांग्रेस और कैप्टन अमरेंद्र सिंह पर भी वे निशाना साध रहे हैं। अकाली और कांग्रेस में मिलीभगत होने का आरोप लगा रहे हैं।

उत्तराखंड    
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव इस बार कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों के लिए ही परीक्षा वाले हैं। दोनों ही दलों में वरिष्ठ नेताओं की भरमार है। यही कारण है कि न तो कांग्रेस ने और न ही भाजपा ने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है।

कांग्रेस
अभी घोषित नहीं
aap copyउत्तराखंड में मौजूदा मुख्यमंत्री हरीश रावत कांग्रेस पार्टी के भीतर तमाम झंझावात झेलने के बाद मौजूदा चुनाव में आंतरिक कारणों से बहुत सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। लिहाजा उनके हाथ मजबूत करने को परिवार भी मैदान में है। मुख्यमंत्री हरीश रावत की बेटी और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अनुपमा रावत की हरिद्वार की सक्रियता से भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के दावेदार परेशान हैं। अनुपमा  हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा रही हैं। उनकी मां और हरिद्वार से लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी रेणुका रावत भी इस क्षेत्र में कईं कार्यक्रम कर चुकी हैं।इसी हफ्ते हरीश रावत की कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांघी से मुलाकात को जीत हासिल होने की स्थिति में उनकी कुर्सी बरकरार रहने का संकेत माना जा रहा है। रावत के अलावा इंदिरा हृदयेश और यशपाल आर्य की भी सीएम पद के दावेदारी हैं।
राहुल से भेंट  के बाद हरीश रावत ने कहा कि राहुल गांधी हमारे सुप्रीम कमांडर वो जो भी आदेश राहुल देंगे में उसका पालन करूंगा। हरीश रावत के अलावा मुख्यमंत्री के पद पर वित्तमंत्री इंदिरा हृदयेश और यशपाल आर्य की भी दावेदारी है। चर्चा में सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत का भी नाम है। वंही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य भी राज्य के सबसे बड़े दलित चेहरे के रूप में सीएम पद के दावेदार है। विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगान के साथ ही आर्य दो बार प्रदेश अघ्यक्ष का सफल कार्यकाल निभा चुके हैं।

भाजपा
अभी घोषित नहीं
aap copyभाजपा ने उत्तराखंड में भी किसी को भी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। मुख्यमंत्री हरीश रावत को चुनौती देने वाले पूर्व कांग्रेस सीएम विजय बहुगुणा, हरख सिंह रावत और सतपाल सिंह महराज तीनों भाजपाई हो गये हैं। खुद भाजपा के चार-चार पूर्व सीएम बीएस खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक, भगत सिंह कोशियारी पहले से बैठे हैं। हरख सिंह रावत ने कांग्रेसी राज में सीएम पद हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। मौजूदा भाजपाध्यक्ष अजय भट्ट खुद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी का सपना देख रहे हैं। जब पार्टी में इतने पूर्व सीएम हों तो किसी एक चेहरे को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करके लड़ना आसान नहीं होता। ऐसा ही भाजपा के साथ है। पार्टी में चुनाव के दौरान ही बगावत हो या पार्टी के वोट बैंक पर असर पड़े, इससे बचने के के लिए पार्टी की ओर से किसी को भी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है। पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम औरचेहरे के साथ मैदान में उतरेगी।

गोवा
गोवा में वैसे तो पिछले कई महीनों से चुनावी बिसात बिछी हुई है, लेकिन मतदान की तिथि का ऐलान होने के साथ ही यह सवाल और भी तेज हो गया है कि इस बार राज्य का मुख्यमंत्री कौन होगा। कांग्रेस और भाजपा की जंग के बीच इस बार आप भी कूद गयी है। एमजीपी ने भाजपा से नाता तोड़कर अपना गठबंधन बना अलग ताल ठोक दी है। ऐसे में इस बार मुकाबला चोतरफ हो गया है।

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मणिपुर
असम में भाजपा की जीत और अरुणाचल में सरकार के पाला बदलने से इस बार पूर्वोत्तर भी सुर्खियों में है। यहां 15 साल से कांग्रेस की सरकार है। उसे भारतीय जनता पार्टी और नयी पार्टी बनाने वाली इरोम शर्मिला से चुनौती मिल रही है।

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