शादी समारोह से बच्चे ने चुराया 3 लाख का बैग !    फर्जी अंगूठा लगाकर मनरेगा के खाते से उड़ाये लाखों !    गुरु की तस्वीरों पर प्रकाश अाभा न दिखाने पर एतराज !    हरियाणा में 2006 के बाद के कर्मियों को भी ग्रेच्युटी !    पहले दिया समर्थन, अब झाड़ा पल्ला !    सप्ताह भर में न भरा टैक्स तो टावर होंगे सील !    पेंशन की दरकार, एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन !    परियोजना वर्करों की देशव्यापी हड़ताल कल !    आईएस का हाथ था कानपुर रेल हादसे में !    आज फिर चल पड़ेगी नेताजी की कार !    

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त्रासदी का एक्सरे करती कथा

त्रासदी का एक्सरे करती कथा

अध्ययन कक्ष से बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी अशोक अंजुम जितने सधे हुए काव्य साधक हैं, उतने सशक्त मंचीय गीतकार भी। ‘अंजुम’ ने मुख्यत: गज़ल, दोहा, गीत, हास्य-व्यंग्य के साथ ही लघुकथा, कहानी, व्यंग्य, लेख, समीक्षा, भूमिका, साक्षात्कार, नाटक विधा में कलम चलाई है। तकरीबन डेढ़ दर्जन से अधिक पुस्तकों के रचयिता ...

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लोकतंत्रीकरण हुआ है लेखन का

लोकतंत्रीकरण हुआ है लेखन का

समय और सृजन वंदना सिंह युवा कवयित्री, कहानीकार इरा टाक साहित्य सृजन के अलावा एक बेहतरीन चित्रकार और फिल्मकार भी हैं। अब तक इरा टाक पेंटिंग के आधा दर्जन सोलो शो और कई ग्रुप शो में हिस्सा ले चुकी हैं। दिल्ली में हाल ही में समाप्त हुए पुस्तक मेले में उनकी ...

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लघुकथाएं

लघुकथाएं

जीने में मुक्ति कमलेश भारतीय ‘मैं मर क्यों नहीं जाती?’ जमाने भर की सताई हुई औरत ने खुद से ही बुदबुदाते कहा। ‘तुम जिंदा ही कब थी?’ औरत के अंदर की औरत ने सवाल किया। ‘तुम ठीक कहती हो। जिसके जन्म पर घर में मातम छा जाए, उसे जिंदा कौन कहे? जिसे कभी लाज ...

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व्यवस्था की विसंगतियों पर गहरा तंज

व्यवस्था की विसंगतियों पर गहरा तंज

कालजयी रचना सुलोचना शर्मा बीसवीं सदी के महान अंग्रेजी उपन्यासकार जॅार्ज ऑरवेल की कालजयी कृति ‘एनिमल फार्म’ पहली बार इंग्लैंड में 17 अगस्त 1945 को प्रकाशित हुई थी। इस लघु उपन्यास का मूल नाम ‘एनिमल फार्म : ए फेयर स्टोरी’ था परंतु अमेरिका के प्रकाशकों ने इसे छोटा कर दिया। दरअसल ...

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अबाबील

अबाबील

उर्दू कहानी ख्वाज़ा अहमद अब्बास नाम तो उसका रहीम खां था, पर उस जैसा ज़ालिम शायद ही कोई हो। सारा गांव उसके नाम से कांपता था। एक दिन एक लोहार के बेटे ने उसके बैल की पूंछ से कंटीली झाड़ी बांध दी तो रहीम खां ने बच्चे को मार-मार कर अधमरा कर ...

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साहित्य के राजनीतिक संदर्भ

साहित्य के राजनीतिक संदर्भ

अध्ययन कक्ष से प्रमोद कौंसवाल हिंदी साहित्य में कविताओं और कहानियों के अलावा साहित्य परिशिष्टों के संपादन और अपने अनुवाद के हुनर के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी पुस्तक ‘आता ही होगा कोई नया मोड़’ (2015) में वरिष्ठ कवि लीलाधर जगूड़ी का जीवन और लेखन से परिचय कराते हुए उन्होंने हिंदी ...

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पढ़ने की ललक बढ़ी

पढ़ने की ललक बढ़ी

समय और सृजन वंदना सिंह महेश कटारे, कहानीकार, उपन्यासकार और नाटककार। बेहद विनम्र और अब भी ठेठ गंवई अंदाज में हिंदी साहित्य जगत में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने वाले महेश कटारे का महाराजा भर्तृहरि के जीवन पर दो खंडों में लिखा गया उपन्यास ‘कामिनी काय कांतरे’ खासा चर्चित रहा है और ...

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  • अबाबील
     Posted On January - 17 - 2017
    नाम तो उसका रहीम खां था, पर उस जैसा ज़ालिम शायद ही कोई हो। सारा गांव उसके नाम से कांपता....
  • व्यवस्था की विसंगतियों पर गहरा तंज
     Posted On January - 17 - 2017
    बीसवीं सदी के महान अंग्रेजी उपन्यासकार जॅार्ज ऑरवेल की कालजयी कृति ‘एनिमल फार्म’ पहली बार इंग्लैंड में 17 अगस्त 1945....
  • लघुकथाएं
     Posted On January - 17 - 2017
    ‘मैं मर क्यों नहीं जाती?’ जमाने भर की सताई हुई औरत ने खुद से ही बुदबुदाते कहा। ‘तुम जिंदा ही कब....
  • लोकतंत्रीकरण हुआ है लेखन का
     Posted On January - 17 - 2017
    युवा कवयित्री, कहानीकार इरा टाक साहित्य सृजन के अलावा एक बेहतरीन चित्रकार और फिल्मकार भी हैं। अब तक इरा टाक....

उजबक की कदमताल

Posted On December - 6 - 2016 Comments Off on उजबक की कदमताल
समय के चक्र को उल्टा नहीं घुमाया जा सकता। हां, बनवारी लाल आज पूरी शिद्दत के साथ यही महसूस कर रहा था। समय चालीस साल आगे बढ़ गया है मगर वह अभी भी वहीं खड़ा कदमताल कर रहा है। उसने भी कई बार समय के साथ आगे बढ़ने की बात सोची मगर परम्पराओं और दायित्वों में जकड़े पांवों ने हमेशा ही मना कर दिया तो ....

झंकार नहीं, आग-तेजाब की शायरी

Posted On December - 6 - 2016 Comments Off on झंकार नहीं, आग-तेजाब की शायरी
पाकिस्तानी शायरी में ‘सारा शगुफ्ता’ एक आग और तेजाब का नाम रहा है। सारा शगुफ्ता को महत्वपूर्ण हस्ताक्षरों से अलग नहीं किया जा सकता। औरत के सम्मान, समाज में उनका स्थान, निजी आजादी के लिए जितना इस युवा शायरा को झेलना पड़ा, वैसी कोई दूसरी मिसाल शायद ही कहीं मिलती होगी। डॉ. शाहीना तबस्सुम के संपादन में इधर छपी इनकी कृति ‘शायरी झंकार नहीं’ खुद ....

अपने-अपने सुख

Posted On December - 6 - 2016 Comments Off on अपने-अपने सुख
मेरे मंथली पास दिखाते ही ‘टिकट... टिकट... टिकट...’ कहते हुए सिटी बस के परिचालक ने मेरे पास बैठे यात्री से टिकट मांगा। ‘एक टिकट राम मंदिर...’ सुनते ही मेरी नजरें अनायास उसकी तरफ उठ गईं। यह लगभग 18-19 साल का एक किशोर था। उसकी गोद में बुक्स और नोट्स से भरा हुआ बैग रखा था जिसे देखकर लग रहा था जैसे किसी कोचिंग इंस्टिच्यूट से ....

लघु कथा

Posted On November - 29 - 2016 Comments Off on लघु कथा
दुश्मनी गोविंद शर्मा वे दोनों, एक भूतपूर्व और एक वर्तमान क्लब में पास-पास बैठे थे। वर्तमान बोला—तेरे लिये काफी दिन से कुछ आरोप मेरे भीतर कुलबुला रहे हैं। सबूत भी हैं मेरे पास। ‘तो, देर किस बात की उगल दे।’ भूतपूर्व बोला। ‘वाह, मैं इतना कमीना नहीं हूं कि पहले आरोप लगाऊं। तू कुछ आरोप मुझ पर लगा, फिर जवाब में…।’ ‘अबे, क्या लगाऊं तेरे पर। जितना तू इन तीन साल में नहीं खा सका, उतना 

तपन

Posted On November - 29 - 2016 Comments Off on तपन
बनफूल सांझ उतर आई थी। एक गठे हुए शरीर का व्यक्ति बिना कोई शब्द किए बड़ी चालाकी से कमरे के अंदर प्रवेश कर गया। दीर्घ देह, बिन संवरे रूखे केश, घनी काली छोटी-छोटी दाढ़ी। चपला उस समय बिस्तर पर तिरछी लेटे हुई थी। वह व्यक्ति चुपचाप आकर उसके सामने खड़ा हो गया। चपला चीखने ही जा रही थी कि अचानक चुप हो गई। उसने तपन को पहचान लिया था। ‘तपन तुम, अचानक इतने दिनों बाद ?’ ‘हां, दस वर्षों की अनथक कोशिश के 

समय तय करेगा अच्छा-बुरा

Posted On November - 29 - 2016 Comments Off on समय तय करेगा अच्छा-बुरा
वंदना सिंह इन दिनों हिंदी में कई युवा लेखक नई तरह की हिंदी लिख रहे हैं और माना जा रहा है कि नई हिंदी की बिंदी लगाए इन उपन्यासों को खूब पाठक मिल रहे हैं। इसी तरह की नई भाषा और भावभूमि पर उपन्यास लिखने वालों में दिव्य प्रकाश दुबे का नाम तेजी से साहित्य में उभरा है। उनके तीनों उपन्यास ‘मुसाफ़िर कैफे’, ‘मसाला चाय’ और ‘टर्म्स एंड कंडिशंस अप्लाई’ बेस्ट सेलर हैं। डीपी के नाम से मशहूर दिव्य 

लघुकथाओं के बड़े मकसद

Posted On November - 29 - 2016 Comments Off on लघुकथाओं के बड़े मकसद
मधुदीप लघुकथा के क्षेत्र में पहचाना नाम है। इस क्षेत्र में जगमगाये दीप अब प्रकाश देने लगे हैं। खासकर लघुकथा शृंखला ‘पड़ाव और पड़ताल’ के 25 खण्डों के सम्पादन/संयोजन व प्रकाशन में महत्वपूर्ण योगदान के चलते। जहां तक उनकी प्रकाशित कृतियों का सवाल है तो उसमें -एक यात्रा अन्तहीन, उजाले की ओर, और भोर भई, पराभव, लौटने तक, कल की बात, (उपन्यास) छोटा होता आदमी (कहानी-संग्रह) मेरी बात तेरी बात, समय का पहिया… 

गहरी संवेदना से उपजा रचनाकर्म

Posted On November - 29 - 2016 Comments Off on गहरी संवेदना से उपजा रचनाकर्म
स्मृति शेष/प्रभजोत कौर त्रिलोक दीप प्रभजोत कौर नहीं रहीं, इस समाचार पर विश्वास कर पाना मुश्किल है आज भी मेरे लिए। उनकी बड़ी बेटी निरुपमा ने फोन कर दुखद समाचार दिया। अगले 25 नवंबर को बराड़ स्क्वायर स्थित श्मशानघाट पर बड़ी संख्या में प्रभजोत कौर के संबंधी, प्रशंसक, साहित्यकार आदि उपस्थित थे। उनकी छोटी बेटी अनुपमा, उनके दामाद जनरल जोगिंदर जसवंत सिंह (जेजे सिंह के नाम से विख्यात) 

क्षमा कर दें उसे

Posted On November - 22 - 2016 Comments Off on क्षमा कर दें उसे
वह औरत जब भी हंसती है उसकी हंसी ....

स्थायी नहीं निराशा का माहौल

Posted On November - 22 - 2016 Comments Off on स्थायी नहीं निराशा का माहौल
कहानी, उपन्यास नाटक और व्यंग्य सभी विधाओं में अधिकार के साथ लेखनी चलाने वाले नरेन्द्र कोहली अब तक सौ से अधिक किताबें लिख चुके हैं। नरेन्द्र कोहली को भारतीय पारंपरिक साहित्य को पुनर्व्याख्यायित करने का श्रेय भी जाता है। ....

किसान की फांस का जीवंत चित्र

Posted On November - 22 - 2016 Comments Off on किसान की फांस का जीवंत चित्र
अरविंद कुमार पेशे से चिकित्सा भौतिकीविद एवं विकिरण सुरक्षा विशेषज्ञ हैं। पूरा नाम तो वैसे अरविन्द कुमार तिवारी है, पर लेखन में अरविन्द कुमार के नाम से ही सक्रिय हैं। आठवें दशक के उत्तरार्ध से अनियमित रूप से कविता, कहानी, नाटक, समीक्षा और अखबारों में स्तंभ लेखन कर रहे हैं। ....

चौपाल से काव्य रसिकों तक कविता की पहुंच

Posted On November - 22 - 2016 Comments Off on चौपाल से काव्य रसिकों तक कविता की पहुंच
प्रगतिशील कवि, कथाकार नागार्जुन ने प्राचीन पद्धति से इन्होंने संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की। हिन्दी, संस्कृत और मैथिली में काव्य-रचना की। आपका पूरा नाम वैद्यनाथ मिश्र यात्री था और मातृभाषा मैथिली में ‘यात्री’ नाम से ही काव्य-रचना की। ....

शराब की बोतल

Posted On November - 22 - 2016 Comments Off on शराब की बोतल
सूर्य की लाल किरणों से आकाश चमक रहा था। हवा में एक मस्ती थी। रविवार का दिन था। ह्यूस्टन शहर का मशहूर कर्नल, जो स्थानीय चर्च का सदस्य भी था, सुबह-सुबह अपने परिवार के साथ चर्च की ओर जा रहा था। यह उसका हर रविवार का नियम था। ....

लघु कथा

Posted On November - 15 - 2016 Comments Off on लघु कथा
ज़िंदा है मां  कमल कपूर रविवार की सुनहरी धुपहरी दोपहर को बच्चों के साथ खेलती विनी सहसा चक्कर खा कर गिर पड़ी तो घबरा कर वसुधा उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर ने पूरी तरह जांच कर बताया, ‘बच्ची में खून की बहुत कमी है… कुपोषण की शिकार है। यह ठीक से खाती-पीती नहीं है क्या?’ ‘ऐसी तो कोई बात नहीं डॉक्टर साहब! सुबह दूध पी कर और खूब अच्छा लंच और फल लेकर स्कूल जाती है और सारा खाना 

समाज-राजनीति की विसंगतियों पर तंज

Posted On November - 15 - 2016 Comments Off on समाज-राजनीति की विसंगतियों पर तंज
सुलोचना शर्मा उर्दू के सुप्रसिद्ध लेखक कृश्न चंदर देश की स्वाधीनता के बाद हिंदी में भी लिखने लगे थे। वर्षों पूर्व लिखा उनका व्यंग्यात्मक उपन्यास ‘एक गदहे की आत्मकथा’ जो मूलतः ‘एक गधे की सरगुजिश्त’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ था, आज भी उतना ही प्रासंगिक है। इसे पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे आज के समाज और राजनीतिक व्यवस्था की यथार्थ तस्वीर पेश की गई है। पुस्तक में इनसान की तरह बोलने वाला 

स्वार्थी महामानव

Posted On November - 15 - 2016 Comments Off on स्वार्थी महामानव
ऑस्कर वाइल्ड स्कूल से लौटते समय बच्चे रोज शाम को उस महामानव के बाग में जाकर खेला करते थे। मखमली घासों वाला वह बहुत सुन्दर बाग था। घास में जगह-जगह तारों की तरह रंगीन फूल जड़े हुए थे और वहां बारह पेड़ आड़ुओं के थे जिनमें वसंत ऋतु में गुलाबी कलियां फूटतीं और पतझड़ में रसीले फल लगते। टहनियों पर बैठकर पक्षी इतना मधुर सुरीला गीत गाते थे कि बच्चे खेल रोककर उन्हें सुनने लगते थे। एक दिन महामानव 
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