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त्रासदी का एक्सरे करती कथा

त्रासदी का एक्सरे करती कथा

अध्ययन कक्ष से बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी अशोक अंजुम जितने सधे हुए काव्य साधक हैं, उतने सशक्त मंचीय गीतकार भी। ‘अंजुम’ ने मुख्यत: गज़ल, दोहा, गीत, हास्य-व्यंग्य के साथ ही लघुकथा, कहानी, व्यंग्य, लेख, समीक्षा, भूमिका, साक्षात्कार, नाटक विधा में कलम चलाई है। तकरीबन डेढ़ दर्जन से अधिक पुस्तकों के रचयिता ...

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लोकतंत्रीकरण हुआ है लेखन का

लोकतंत्रीकरण हुआ है लेखन का

समय और सृजन वंदना सिंह युवा कवयित्री, कहानीकार इरा टाक साहित्य सृजन के अलावा एक बेहतरीन चित्रकार और फिल्मकार भी हैं। अब तक इरा टाक पेंटिंग के आधा दर्जन सोलो शो और कई ग्रुप शो में हिस्सा ले चुकी हैं। दिल्ली में हाल ही में समाप्त हुए पुस्तक मेले में उनकी ...

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लघुकथाएं

लघुकथाएं

जीने में मुक्ति कमलेश भारतीय ‘मैं मर क्यों नहीं जाती?’ जमाने भर की सताई हुई औरत ने खुद से ही बुदबुदाते कहा। ‘तुम जिंदा ही कब थी?’ औरत के अंदर की औरत ने सवाल किया। ‘तुम ठीक कहती हो। जिसके जन्म पर घर में मातम छा जाए, उसे जिंदा कौन कहे? जिसे कभी लाज ...

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व्यवस्था की विसंगतियों पर गहरा तंज

व्यवस्था की विसंगतियों पर गहरा तंज

कालजयी रचना सुलोचना शर्मा बीसवीं सदी के महान अंग्रेजी उपन्यासकार जॅार्ज ऑरवेल की कालजयी कृति ‘एनिमल फार्म’ पहली बार इंग्लैंड में 17 अगस्त 1945 को प्रकाशित हुई थी। इस लघु उपन्यास का मूल नाम ‘एनिमल फार्म : ए फेयर स्टोरी’ था परंतु अमेरिका के प्रकाशकों ने इसे छोटा कर दिया। दरअसल ...

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अबाबील

अबाबील

उर्दू कहानी ख्वाज़ा अहमद अब्बास नाम तो उसका रहीम खां था, पर उस जैसा ज़ालिम शायद ही कोई हो। सारा गांव उसके नाम से कांपता था। एक दिन एक लोहार के बेटे ने उसके बैल की पूंछ से कंटीली झाड़ी बांध दी तो रहीम खां ने बच्चे को मार-मार कर अधमरा कर ...

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साहित्य के राजनीतिक संदर्भ

साहित्य के राजनीतिक संदर्भ

अध्ययन कक्ष से प्रमोद कौंसवाल हिंदी साहित्य में कविताओं और कहानियों के अलावा साहित्य परिशिष्टों के संपादन और अपने अनुवाद के हुनर के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी पुस्तक ‘आता ही होगा कोई नया मोड़’ (2015) में वरिष्ठ कवि लीलाधर जगूड़ी का जीवन और लेखन से परिचय कराते हुए उन्होंने हिंदी ...

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पढ़ने की ललक बढ़ी

पढ़ने की ललक बढ़ी

समय और सृजन वंदना सिंह महेश कटारे, कहानीकार, उपन्यासकार और नाटककार। बेहद विनम्र और अब भी ठेठ गंवई अंदाज में हिंदी साहित्य जगत में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने वाले महेश कटारे का महाराजा भर्तृहरि के जीवन पर दो खंडों में लिखा गया उपन्यास ‘कामिनी काय कांतरे’ खासा चर्चित रहा है और ...

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  • अबाबील
     Posted On January - 17 - 2017
    नाम तो उसका रहीम खां था, पर उस जैसा ज़ालिम शायद ही कोई हो। सारा गांव उसके नाम से कांपता....
  • व्यवस्था की विसंगतियों पर गहरा तंज
     Posted On January - 17 - 2017
    बीसवीं सदी के महान अंग्रेजी उपन्यासकार जॅार्ज ऑरवेल की कालजयी कृति ‘एनिमल फार्म’ पहली बार इंग्लैंड में 17 अगस्त 1945....
  • लघुकथाएं
     Posted On January - 17 - 2017
    ‘मैं मर क्यों नहीं जाती?’ जमाने भर की सताई हुई औरत ने खुद से ही बुदबुदाते कहा। ‘तुम जिंदा ही कब....
  • लोकतंत्रीकरण हुआ है लेखन का
     Posted On January - 17 - 2017
    युवा कवयित्री, कहानीकार इरा टाक साहित्य सृजन के अलावा एक बेहतरीन चित्रकार और फिल्मकार भी हैं। अब तक इरा टाक....

सुख-दु:ख मन:स्थिति की देन

Posted On November - 15 - 2016 Comments Off on सुख-दु:ख मन:स्थिति की देन
लंबे समय से स्वतंत्र लेखन व संपादन से जुड़े रहे  अशोक जैन का पहला परिचय तो यह है कि वे लघुकथा मासिक पत्रिका ‘दृष्टि’ का संपादन करते हैं। मगर उन्होंने बाल उपन्यास ‘सात कौड़ियों का राजमहल’, बाल गीत संग्रह ‘फूलों की महक’, उपन्यास ‘टूटते-बनते घर’ जैसी मौलिक रचनाओं के अलावा साठ से अधिक पुस्तकों का संपादन भी किया है। उन्हें कई पुरस्कार मिले। कैथल से गुरुग्राम तक की यात्रा में उन्होंने विपुल 

साहित्य का उत्पाद बनना चिंताजनक

Posted On November - 15 - 2016 Comments Off on साहित्य का उत्पाद बनना चिंताजनक
वंदना सिंह यह हिंदी साहित्य का सौभाग्य है कि इस वक्त हिंदी में अस्सी पार कई लेखक सक्रिय हैं। उनकी उपस्थिति और सक्रियता हिंदी साहित्य को एक खास किस्म की आश्वस्ति देता है। ऐसे ही लेखकों में से एक हैं वरिष्ठ आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के शिष्य विश्वनाथ त्रिपाठी की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें से हिंदी आलोचना, हिंदी साहित्य का संक्षिप्त 

कविताएं

Posted On November - 8 - 2016 Comments Off on कविताएं
प्रेम, इबारत है प्रेम, इबारत है जीवन का गणित जमा-घटाव करो चले-चले जाओ… आओ। प्रेम, इबारत है खाली को भरता उठक-बैठक करो करते चले जाओ… अाओ। प्रेम, इबारत है दिशा-दरिया देखो और दिखाओ पूर्ण हो जाओ… आओ। …अन्धेरे में प्रेम, अन्धेरे में रोशनी है कुदरत के खेल का दांव है तनिक हिलजुल तो करो… करो! प्रेम, अन्धेरे में हताश रास्तों का आकर्षण है तनिक राहगीर तो बनो… बनो! प्रेम, अन्धेरे में चुप्पी का 

चेखव के एकांकी में रूसी जीवन

Posted On November - 8 - 2016 Comments Off on चेखव के एकांकी में रूसी जीवन
पंकज मालवीय का पहला परिचय तो यह है कि वे पंजाब विश्वविद्यालय के रूसी भाषा विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं। मगर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने रूसी भाषा की कालजयी रचनाएं हिंदी पाठकों तक अनुवाद करके पहुंचाई हैं। ....

आत्मुग्धता के दौर में भटकी कविता

Posted On November - 8 - 2016 Comments Off on आत्मुग्धता के दौर में भटकी कविता
बहुमुखी प्रतिभा के धनी ध्रुव गुप्त कविता, कहानी और ग़ज़ल में समान रूप से आवाजाही करते हैं। कविताओं से साहित्य की दुनिया में आए ध्रुव गुप्त पुलिस अफसर रहे हैं लेकिन उनकी कविताओं में एक अलग किस्म की संवेदना नजर आती है। ....

लघु कथा

Posted On November - 8 - 2016 Comments Off on लघु कथा
पिता अपने दोनों बच्चों के साथ कार में। कार जाम में फंस गई। अचानक एक बच्चे ने बाहर की तरफ देखा और दूसरे से बोला—अरे, उस आदमी की साइकिल देख। कभी देखी है इतनी पुरानी साइकिल? कबाड़ में भी ऐसा खटारा नहीं मिलेगा। ....

प्लेग : आतंक के साये में जिजीविषा

Posted On November - 8 - 2016 Comments Off on प्लेग : आतंक के साये में जिजीविषा
सात नवम्बर, 1913 को फ्रांस के तत्कालीन उपनिवेश अल्जीरिया में जन्मे अल्बैर कामू की प्रारंभिक शिक्षा देश की राजधानी एल्जिएर्स में हुई। वे एक प्रसिद्ध दार्शनिक, कथाकार, उपन्यासकार व नाटककार रहे हैं, जिन्हें 1957 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ....

पठान की बेटी

Posted On November - 8 - 2016 Comments Off on पठान की बेटी
गफूर पठान शाम को जब कभी अपनी झुग्गी-झोपड़ी वाली बस्ती में लौटता, वहां रहने वाले बच्चे ‘काबुली वाला, काबुली वाला’ कहते हुए अपनी झोपड़ियों में जा छुपते परंतु एक छोटा-सा सिख बच्चा बेखौफ वहां खड़ा रहता और उसके थैले, ढीले-ढाले कपड़े, उसके सिर की फटी और उधड़ी हुई पगड़ी की ओर देखता रहता। ....

लघु कथाएं

Posted On November - 1 - 2016 Comments Off on लघु कथाएं
एक मीठा एहसास सरोज गुप्ता शादी के बाद पहली करवा चौथ का किस्सा है। रोज की भांति मैंने सुबह उठकर खाना बनाया और टिफिन पैक करके पति को दे दिया। शाम के लिए काफी कुछ तैयारियां करनी थीं सो मैं अपने कामों में लग गई। दो बजे के करीब मैं आराम करने को लेटी और आंख लग गई। एकाएक डोर बैल की आवाज सुनकर उठी और दरवाजा खोला तो सामने खेड़े पतिदेव को देखकर हैरान रह गई। ‘अरे, नितिन तुम’ एकदम से मेरे 

नारी मन की सूक्ष्म तरंगों का चित्रण

Posted On November - 1 - 2016 Comments Off on नारी मन की सूक्ष्म तरंगों का चित्रण
8 जनवरी 1909 को कलकत्ता के पटलडांगा में जन्मी आशापूर्णा देवी को उनके उपन्यास ‘प्रथम प्रतिश्रुति’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था। लगभग सवा दो सौ पुस्तकों की यह लेखिका एक साधारण गृहिणी थी, जिनका अधिक से अधिक समय घर की चारदीवारी में ही बीतता परंतु आश्चर्यजनक बात यह है कि उनके उपन्यास और कहानियों में जीवन का विस्तृत फलक दिखाई देता है। ....

तेरा कमरा, मेरा कमरा

Posted On November - 1 - 2016 Comments Off on तेरा कमरा, मेरा कमरा
दलीप कौर टिवाणा दफ्तर में मेरा और तुम्हारा कमरा साथ-साथ है। फिर भी न यह कमरा उस कमरे के पास जा सकता है और न वह कमरा इस कमरे के पास आ सकता है। दोनों की अपनी सीमाएं हैं। दोनों के बीच एक दीवार है। दीवार बड़ी पतली-सी है। भूल से भी अगर उधर तुम्हारा हाथ लगता है तो आवाज मेरे कमरे में पहुंच जाती है। संभवतः एक दिन कोई इस दीवार पर तुम्हारी ओर कील ठोक रहा था। मेरे कमरे की सारी दीवारें धमक रही थीं। 

गौरवशाली इतिहास का जीवंत चित्र

Posted On November - 1 - 2016 Comments Off on गौरवशाली इतिहास का जीवंत चित्र
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जन्मे कविवर सुरेश ‘सपन’ की रचनाओं का मूल स्वर व्यंग्य का रहा है। गजल-संग्रह तल में हलचल जारी है और दोहामयी रामकथा उनकी प्रकाशित कृतियां हैं। उनकी गजलों में अनेक तेवर देखे जा सकते हैं। रामकथा वस्तुत: शब्दों का तीर्थ और काव्य का मोक्ष है। रामकथा के इस सार में मूलकथा की सुगंध व्याप्त है। देश की विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा उन्हें 

ईमानदार होनी चाहिए आलोचना

Posted On November - 1 - 2016 Comments Off on ईमानदार होनी चाहिए आलोचना
वंदना सिंह हिंदी में जिन चंद लेखकों को आलोचकों और पाठकों से समान रूप से स्वीकृति मिली है, उसमें तेजिन्दर का नाम प्रमुख है। तेजिन्दर का उपन्यास काला पादरी बेहद लोकप्रिय और चर्चित हुआ है और उनको इस उपन्यास ने बेहद प्रतिष्ठा दिलाई। हालांकि इसके पहले प्रकाशित उनका उपन्यास वो मेरा चेहरा भी खासा चर्चित रहा था। इस उपन्यास में एक सिख नवयुवक की पीड़ा और संत्रास को विषय बनाया गया है जबकि 

समय सबसे बड़ा समीक्षक

Posted On October - 11 - 2016 Comments Off on समय सबसे बड़ा समीक्षक
नीरजा माधव हिंदी की जानीमानी कथाकार और उपन्यासकार हैं। उनके नौ उपन्यास, सात कहानी संग्रह और चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनके निबंधों के कई संकलन भी प्रकाशित हैं। ....

कविता में तन-मन की इबारत

Posted On October - 11 - 2016 Comments Off on कविता में तन-मन की इबारत
तीन दशक तक डीएवी कालेज, नकोदर में प्राध्यापक व हिंदी विभागाध्यक्ष रहे मोहन सपरा पिछले चार दशक से साहित्य साधना में रत हैं। ....

बच्चे उठाने वाले

Posted On October - 11 - 2016 Comments Off on बच्चे उठाने वाले
देशभर में यह बात फैल गई थी कि तीन बच्चों की बलि न देने पर रूपनारायण पर रेल का पुल किसी भी दशा में बन नहीं पा रहा है। दो बच्चे पुल के खंभे तले दफनाए जा चुके थे। ....
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