करदाताओं को धमकी न दें : सीबीडीटी !    भूमि अधिग्रहण के बाद मुआवजा अपील निरर्थक !    माल्या को लाने की कोशिशें तेज हुईं !    रिलायंस जियो का अब 3 नॉट 3 ऑफर !    ऋतिक का किस्सा अब खत्म : कंगना !    रसोइया नहीं जनाब इन्हें शेफ कहिये !    इलाहाबाद में राहुल-अखिलेश के लिए तैयार मंच गिरा !    93 के मुगाबे बोले, अगले साल भी लड़ूंगा चुनाव !    जंगली जानवर के हमले से गांवों में दहशत !    नूंह में दीवार तोड़ महिलाओं ने कर लिया दुकान पर कब्जा !    

बदलाव › ›

फ़ीचर्ड न्यूज़
बेरोजगारी के समाधान के लिए युवाओं का कौशल विकास जरूरी

बेरोजगारी के समाधान के लिए युवाओं का कौशल विकास जरूरी

बेरोजगारी की समस्या विकराल हो चुकी है जोकि व्यक्ति के निजी जीवन को तो प्रभावित कर ही रही है, सामाजिक ताने-बाने को भी बिगाड़ रही है। बढ़ती आबादी इसकी सहायक बन गई है। सरकार योजनाएं लेकर आती है लेकिन वे भी जल्द ही नाकाफी सािबत होती हैं। यमुनानगर में सह-प्राध्यापक उचित ...

Read More

तब कालका में शाम होते ही किवाड़ बंद हो जाते, जो सुबह ही खुलते

तब कालका में शाम होते ही किवाड़ बंद हो जाते, जो सुबह ही खुलते

साल 1948 में जब मैं परिवार के साथ कालका आया तो मेरी उम्र कोई 6 साल थी। यहीं बचपन बीता, जवान हुआ और फिर रेलवे में नौकरी मिल गई। अब 75 की उम्र में बीते हुए जमाने को देखता हूं तो अहसास होता है, हम कितना कुछ पीछे छोड़ आए हैं। ...

Read More

ताकि फिर न भटकें राह, कैदियों को लकड़ी में जान डालना सिखाता हूं

ताकि फिर न भटकें राह, कैदियों को लकड़ी में जान डालना सिखाता हूं

शिल्प गुरु महेशचंद शर्मा का पता है- दिल्ली-6. उनके हाथ में हुनर है, वे बेजान लकड़ी पर जब अपने औजार चलाते हैं तो उनमें जो आकृति उबरती है, वह अनोखी होती है। कहते हैं, पैतृक कला है। कभी हाथी दांत पर आजमाते थे, उस पर रोक लगी तो फिर चंदन ...

Read More

LOC पर ज़िंदगी की  रखवाली में एक लड़की

LOC पर ज़िंदगी की रखवाली में एक लड़की

सबरीना सिद्दीकी LOC  line of control  एक तरफ भारत की सेनाएं डटी हैं तो दूसरी तरफ पाकिस्तान की सेना अपनी बंदूकों के मुंह खोले बैठी है। पाक की तरफ से शुरुआत होती है तो भारत की तरफ से उसका जवाब दिया जाता है। दिन-रात गोलीबारी चलती है, तोपें गरजती रहती हैं। इस ...

Read More

तब हर घर में गेहूं से भरी टंकी होती और चक्की भी मिलती थी

तब हर घर में गेहूं से भरी टंकी होती और चक्की भी मिलती थी

उस दिन दुकान पर आटे की थैली लेने के लिए गया तो एक पहचान के मिल गए। इधर-उधर की बातें होने लगी तो जिक्र बाजार में बिकने वाले गेहूं के आटे और चावल पर केंद्रित हो गया। कहने लगे, आजकल आटे के इतने सारे ब्रांड बाजार में हैं, सब अपने ...

Read More

आरक्षण का अाधार जातिगत नहीं, आर्थिक होना चाहिए

आरक्षण का अाधार जातिगत नहीं, आर्थिक होना चाहिए

समाज के प्रत्येक वर्ग में ऐसे लोग हैं जोकि आर्थिक रूप से समृद्ध हैं, लेकिन उसके बावजूद आरक्षण का लाभ ले रहे हैं या लेना चाहते हैं। वैसे जरूरत इसकी है कि समाज के हर जरूरतमंद को चाहे वह किसी भी वर्ग या जाति से संबंधित हो, को आरक्षण का ...

Read More

ग्रामीणों ने बनाया कोष, ताकि पैसे के अभाव में न रुके कोई शादी, इलाज

ग्रामीणों ने बनाया कोष, ताकि पैसे के अभाव में न रुके कोई शादी, इलाज

बेटी शादी के योग्य हो गई थी और विधवा मां के दिन का चैन और रात की नींद खत्म हो गई थी। घर में आय का कोई जरिया नहीं था, खेती की थोड़ी-बहुत जमीन ही थी, जिसके सहारे गुजर हो रही थी। जैसे-तैसे बेटी का रिश्ता हो गया लेकिन अब ...

Read More


सामाजिक बुराइयों के खात्मे के लिए लांघी घर की दहलीज

Posted On January - 23 - 2015 Comments Off on सामाजिक बुराइयों के खात्मे के लिए लांघी घर की दहलीज
”मुझे खुशी है कि मेरी पत्नी नशा व कन्याभ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान चलाकर अन्य महिलाओं के लिए न केवल प्ररेणास्रोत बनी हैं, बल्कि उनके प्रयास से कई घर बर्बाद होने से बच गए हैं। सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए हमें आगे आना चाहिए। मेरा पत्नी को पूरा सहयोग है।” – नरेश तायल, पुष्पा तायल के पति यह घर-घर की कहानी लगती है, पति का शराब पीकर आना, बुरा बर्ताव करना, बच्चों, पत्नी 

यादों में गुजरा जमाना

Posted On January - 16 - 2015 Comments Off on यादों में गुजरा जमाना
घर से निकलते हुए बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते थे ”बात तब की है जब मैं 14-15 वर्ष की आयु का था, उन दिनों का स्मरण होते ही मन में टीस सी उठती है। तब हम बच्चे मिलजुल कर बैठा करते थे। कबड‍्डी, गिल्ली-डंडा, लुक्का-छिप्पी खेलते, नदी, तालाब में नहाते। तब शरीर सौष्ठव पर खूब ध्यान दिया जाता था। आजकल के बच्चों को तो पढ़ाई, ट‍्यूशन या फिर विडियो गेम से ही फुर्सत नहीं मिलती ऐसे में उनका शरीर कमजोर 

एक सलाह ने बदले हालात, बहल हुआ साफ और रोशन

Posted On January - 16 - 2015 Comments Off on एक सलाह ने बदले हालात, बहल हुआ साफ और रोशन
16 अक्तूबर 2012 का दिन बहल में एक बड़ा बदलाव लेकर आया था। इस तारीख को कस्बे के लोगों को एक ऐसा विचार मिला जो न केवल उनके बेहतर रहन-सहन से जुड़ा था बल्िक उनकी सोच को भी आगे ले जाने वाला था। कस्बे में कुछ लोग सफाई अभियान चला रहे थे। कूड़ा उठाकर एक तरफ फेंका जा रहा था, तभी भिवानी के तत्कालीन एडीसी सुजान सिंह आए और पूछा कि इस कूड़े को उठा कर कहां रखा जाएगा। लोगों ने बताया कि बस एक जगह से उठाकर किसी 

कड़े मुकाबले के लिए अब फिट रहना पहली जरूरत

Posted On January - 16 - 2015 Comments Off on कड़े मुकाबले के लिए अब फिट रहना पहली जरूरत
मेरी दादी की सुनाई एक बात मुझे रह-रह कर याद आती है। बात तब की है जब वे दुल्हन बनकर ससुराल आयी थी। संयुक्त परिवार था, सास-ससुर, ननदें-देवर, पति के बड़े भाई, उनका परिवार। अलसुबह उठ जाना, पशुओं को चारा डालना, दूध निकालना, उनका गोबर घर से बाहर डाल कर आना। खाना बनाना िफर खेत में काम के लिए निकल जाना अािद तमाम काम सिर पर रखे होते लेकिन मजाल उफ तक करने का मौका मिलता। दिनभर की भागदौड़ में इतनी कसरत हो 

यादों में गुजरा जमाना

Posted On January - 9 - 2015 Comments Off on यादों में गुजरा जमाना
तब 160 रुपये में एक तोला सोना मिलता था मैं उन दिनों को याद करके हैरान होता हूं जब 160 रुपये तोला सोना व  16 रुपये का मण गेहूं खरीदा करते थे। तब जरूरतें इतनी कम थीं कि कभी महंगाई का अहसास ही नहीं होता था। तब फल-सब्जी, अनाज, घी आदि सभी बगैर मिलावट के मिलता था। कपड़े साधारण होते और घर से बाहर उन्हें पहनकर निकलते तो कोई यह नहीं कहता कि आपके कपड़े ऐसे हैं, तब विचारों की कदर थी और लोग कहते कि फलां आदमी अच्छे 

एक अनोखी तकनीक जिससे बुझती है पौधों की प्यास

Posted On January - 9 - 2015 Comments Off on एक अनोखी तकनीक जिससे बुझती है पौधों की प्यास
पानी का महत्व तब समझ में आता है जब एक-एक बूंद की किल्लत हो। गर्मियों में तो पानी का संकट सुर्खियां बन जाता है, ऐसे में लोगों को खुद के इस्तेमाल के लिए तो पानी उपलब्ध हो नहीं पाता अपने पेड़-पौधों की कहां से सिंचाई करें। ऐसा भी नहीं है कि पेड़-पौधों को तीन-चार दिन में एक बार पानी की जरूरत पड़ती हो, उन्हें भी नियमित पानी चाहिए होता है। कुछ ऐसे ही विचार चल रहे थे, गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी, (जीजेयू) 

पैसा कमाया, पर उस वक्त का क्या जो पीछे छूट गया

Posted On January - 9 - 2015 Comments Off on पैसा कमाया, पर उस वक्त का क्या जो पीछे छूट गया
समय की प्रतिस्पर्धा ने ग्रामीण के जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। जो किसान एक दशक पहले तक दूधारू पशुओं के बीच सहज जीवन व्यतीत करता था और पेड़ के नीचे चैन की रोटी खाकर आराम से सो जाया करता था, अब भौतिकता और पैसे कमाने की दौड़ में शामिल हो गया है। धन कमाना गलत नहीं है लेकिन इस प्रवृति ने उसके जीवन से शांति और सहजता छीन ली है। अब उसके पास गाड़ी है, बंगला है, बैंक बैलेंस है लेकिन कुछ नहीं है तो वह 

पैसे के पीछे भागकर इंसान खो चुका है ईमानदारी

Posted On January - 2 - 2015 Comments Off on पैसे के पीछे भागकर इंसान खो चुका है ईमानदारी
यादों में गुजरा जमाना ‘उत्तम खेती, मध्यम व्यापार, नखीद नौकरी’ हमारे समय में यह कहावत बड़ी उत्तम थी। इसका मतलब था कि खेती सही है, अन्न पैदा कर किसान जहां खुद की आजीविका कमाता है वहीं समाज के दूसरे लोगों का भी भरण-पोषण करता है। वहीं व्यापार दूसरे दर्जे की चीज है, कोई सक्षम है तो व्यापार करे लेकिन नौकरी को सही नहीं माना जाता था। धारणा थी कि नौकरी करके व्यक्ित दूसरे के अधीन हो जाता है, इससे 

पूर्व फौजी के नजरिये ने बदल दिये डीघल के हालात

Posted On January - 2 - 2015 Comments Off on पूर्व फौजी के नजरिये ने बदल दिये डीघल के हालात
एक फौजी रिटायरमेंट के बाद घर आया था। फौज के अनुशासित माहौल में उन्होंने सीखा था कि िजंदगी तब बेहतर तरीके से विकसित होती है जब सभी चीजें ठीक से हों। मतलब यह था कि एक बेहतर जीवन के लिए सभी चीजें उपलब्ध हों। गांव में सब ठीक नहीं था। जरूरत थी एक बदलाव की। झज्जर के डीघल गांव के जगत सिंह ने गांव के हालात बदलने के लिए एक शुरुआत की। आज इस काफिले में गांव के दूसरे लोग भी जुड़ रहे हैं। जगत कहते हैं- 

डरो मत, घर से बाहर िनकल जमाने को फेस करो

Posted On January - 2 - 2015 Comments Off on डरो मत, घर से बाहर िनकल जमाने को फेस करो
तेजाबी हमले ने मेरी जिंदगी को बदल दिया। मेरी चाहत एक वालीबॉल प्लेयर बनने की थी लेकिन उस शाम जो घटा ईश्वर न करे किसी और के साथ ऐसा हो। शारीरिक रूप से तो मुझे बेइंतहा दर्द मिला ही आत्िमक रूप से भी अपार दर्द हुआ। उस समय मन में आता था कि मैं जिंदा ही क्यों हूं, मर क्यों नहीं जाती। लेकिन भगवान हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे हमारे बारे में ज्यादा जानते हैं। ढाई साल के इस दौर में दोषियों को 

यादों में गुजरा जमाना

Posted On December - 26 - 2014 Comments Off on यादों में गुजरा जमाना
भागदौड़ की ज़िंदगी में अब बुजुर्ग हो गया है अकेला ” आज की भागती-दौड़ती ज़िंदगी में बीते जमाने का वह ठहराव और सुकून न जाने कहां चला गया है। तब अतिथियों का बेहद मान होता था। घर में अगर दामाद आकर ठहरता तो न केवल घर के लोग बल्कि आसपास के घरों के लोग भी लोटे में दूध भरकर पिलाने के लिए आते थे। चौपाल सजती और लोग हुक्के की गुड़गुड़ाहट के बीच अपने सुख-दुख साझा करते। खेती-किसानी की बातें होती। तब चौपालों 

दोस्त की मां को खून देकर पास की जिंदगी की परीक्षा

Posted On December - 26 - 2014 Comments Off on दोस्त की मां को खून देकर पास की जिंदगी की परीक्षा
जिंदगी का सबक तब मिलता है जब हम खुद उन हालात से गुजरते हैं, ज़िनमें हम दूसरों को दुख उठाते या हंसते हुए पाते हैं। अंबाला में बीएसएनएल के एजीएम मनमोहन मैनी ऐसे ही हालात से गुजरे और उनके जीवन का मकसद बदल गया। वे रक्तदान करते और करवाते हैं, नेत्र दान से दूसरों की ज़िंदगी में रोशनी भरते हैं, उनकी कहानी… दोस्त की माता का ऑपरेशन होना था लेकिन सरकारी नौकरी में विभागीय परीक्षा 

बच्चों की जिद कि रोज जाना है स्कूल

Posted On December - 26 - 2014 Comments Off on बच्चों की जिद कि रोज जाना है स्कूल
शिक्षा का जीवन में क्या महत्व है? यह सवाल उतना ही अहम है ज़ितना कि यह कहना – सूरज हमें जीवन देता है। दरअसल शिक्षा से ही जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है। हरियाणा के ग्रामीण इलाकों के बच्चे इस बात को समझते हैं। तभी तो शिक्षा की अलख अब हर गांव-देहात में जगने लगी है। उन बच्चों का हौसला प्रशंसनीय है जोकि अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं स्कूल के लिए। यह तब और भी अहम हो जाता है जब सिकलीगर समाज के बच्चे 

संयुक्त परिवार में जो सुख मिलता था वह अब कहां

Posted On December - 19 - 2014 Comments Off on संयुक्त परिवार में जो सुख मिलता था वह अब कहां
“अब संयुक्त परिवारों का समय बीत गया है, पहले घर में परिवार का एक मुखिया होता था और पूरे घर के लोग उसके कहे के मुताबिक चलते थे। चाहे दो भाई हों या फिर छह सभी के सभी पिताजी का कहा मानते थे। दुख-सुख बांटते थे, हालांकि वक्त के साथ हालात भी बदलते हैं। अब महंगाई का दौर है और ऐसे में एकल परिवार चलाना ही मुश्किल हो रहा है। अब जीवन स्तर में बहुत अंतर आ गया है, लोग होटल और रेस्त्रां आिद में जाकर खाना 

मखौल का जवाब दिया हजारों को इंजीनियर बनाकर

Posted On December - 19 - 2014 Comments Off on मखौल का जवाब दिया हजारों को इंजीनियर बनाकर
उनके पास बेशक इंजीनियरिंग की डिग्री न हो लेकिन वे अब तक हजारों युवाओं को इंजीनियर बना चुके हैं। कहते हैं- जब अम्बाला शहर के एक प्राइवेट कॉलेज में दो कमरे लेकर मैंने इंजीनियरिंग कॉलेज खोला तो कई दोस्तों ने मजाक उड़ाया। कहने लगे- भला दो कमरों में कोई इंजीनियरिंग कॉलेज चला सकता है, लेकिन मेरी जिद थी कि अम्बाला व आसपास के इलाकों के बच्चों के लिए यहीं ऐसा प्रबंध किया जाए कि वे इंजीनियरिंग 

तीन बेटियों ने जज बनकर पूरा किया पिता का सपना

Posted On December - 19 - 2014 Comments Off on तीन बेटियों ने जज बनकर पूरा किया पिता का सपना
पिता की बेटों को सीख थी- मैंने तुम्हें वकील बनाया, टीचर बनाया, अब अपने बच्चों को इससे कुछ बड़ा बना कर दिखाओ तो तुम्हारी काबिलियत समझूं। पिता की कही बात बेटों ने गांठ बांध ली। अपने बच्चों के लिए उन्होंने कुछ सपने देखे, मुश्किलें झेली, बाधाओं का मुकाबला किया लेकिन उन सपनों को धुंधलाने न दिया। एक पिता की आंखों में अपनी आखिरी सांस तक यह सपना जिंदा रहा- चाहते थे बेिटयां जज बनें और बेिटयों ने 
Page 21 of 22« First...13141516171819202122

समाचार में हाल लोकप्रिय