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इस स्कूल में पढ़ाई ही नहीं होती, नई राहों को तलाशना भी सिखाते हैं

इस स्कूल में पढ़ाई ही नहीं होती, नई राहों को तलाशना भी सिखाते हैं

दूसरों के घर में झाड़ू-पोंछा करने वाली उस महिला की बच्ची स्कूल नहीं जा पा रही थी। जाती भी कैसे, यहां-वहां काम करके जो कमाई होती वह मकान का किराया और खाना जुटाने में खर्च हो जाता। उस घर में था ही क्या? लेकिन उस महिला के दिल में आसमान ...

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तब नाते काफी अहम थे, एक-दूजे का लिहाज काफी होता था

तब नाते काफी अहम थे, एक-दूजे का लिहाज काफी होता था

पहले की शादियां न जाने कौनसे फेविकोल से जुड़ती थी कि आजीवन टिकी रहती थी। जबकि आजकल शादियों का टूटना रेत के घरौंदे टूटने जैसा हो गया है। मामूली बातों को लेकर पति-पत्नी अापस में टकरा जाते हैं और फिर अलग-अलग हो जाते हैं। इसका परिणाम न केवल बच्चे भुगतते ...

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पंचायतों को और अधिकार देना समय की मांग और जरूरत

पंचायतों को और अधिकार देना समय की मांग और जरूरत

गत दिवस हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया है कि जिला परिषदों को और ताकतवर बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे उन शक्ितयों की पहचान करें जिन्हें जिला परिषदों के हवाले किया जाना चाहिए। वास्तव में पंचायती राज की संस्थाओं का ...

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मसाले, स्वाद  ही नहीं बढ़ाते किस्मत भी महकाते हैं...

मसाले, स्वाद ही नहीं बढ़ाते किस्मत भी महकाते हैं...

पढ़ाई छूटी तो हाथ का हुनर आया काम  9वीं में पढ़ाई छोड़नी पड़ी तो मुंबई का रुख कर लिया। हाथ में हुनर था खाना पकाने का। मुंबई में एक जैन परिवार के यहां रसोइया बन गए। कोई 8 साल वहां काम किया। एक दिन जैन परिवार के मुखिया ने पूछा- लंदन ...

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ट्रैफिक जाम से निपटना जरूरी, गांवों के लिए बननी चाहिए सड़कें

ट्रैफिक जाम से निपटना जरूरी, गांवों के लिए बननी चाहिए सड़कें

हमारे शहरों में ट्रैफिक जाम लगना अब आम हो गया है। गुरुग्राम में सुबह प्रवेश करना और शाम को यहां से बाहर निकलना पर्वत की चोटी चढ़ने जैसी बात हो गई है। सड़कों पर हजारों की तादाद में गाड़ियां उतरती हैं तो फिर एक के पीछे एक लगती जाती है। इस ...

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यह सड़क नहीं टूटेगी...

यह सड़क नहीं टूटेगी...

डॉ. राकेश कपूर एक 5वीं क्लास के बच्चे से क्या अपेक्षा करते हैं जोकि अपने स्कूल पहुंचने के लिए एक नदी को पार करके जाता है? पीछे मुड़ कर देखता हूं तो कितने ही साल गुजर चुके हैं। डॉ. राकेश कपूर के लिए ये बीते हुए साल काफी मायने रखते हैं। ...

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दिहाड़ी करके पढ़ाने वाले माता-पिता का बेटा बन गया गूगल का इंजीनियर

दिहाड़ी करके पढ़ाने वाले माता-पिता का बेटा बन गया गूगल का इंजीनियर

कई बार घर में खाने को नहीं होता। सिर पर अपनी छत नहीं थी। पति-पत्नी दोनों सब्जी बेच कर जैसे-तैसे गुजारा कर रहे थे। एक दिन पति ने कुछ और करने की सोची। इरादा यही था कि अपने 3 बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला सकें। पति ने एक फैक्टरी में काम ...

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गृह मंत्री को एसएमएस कर आठवीं के बच्चे ने रुकवाया 4 टीचर्स का तबादला

Posted On August - 12 - 2016 Comments Off on गृह मंत्री को एसएमएस कर आठवीं के बच्चे ने रुकवाया 4 टीचर्स का तबादला
यहां दो स्थिति हैं, एक तरफ हरियाणा का उदाहरण है और दूसरी तरफ कर्नाटक के एक गांव का। हरियाणा में टीचर्स की कमी होती है तो गांव के लोग स्कूल को ताला लगाकर उसके सामने बैठ जाते हैं (आमतौर पर यही होता है)। उनके लिए रोष जताने का यही तरीका है। इस बीच प्रशासन, सरकार के कानों तक जब तक बात नहीं पहुंचती है, मामला नहीं निपटता। हालांकि दक्षिणी कर्नाटक के हराड़ी कस्बे में जब एक साथ 4 टीचर्स का ट्रांसफर 

आने वाला कल

Posted On July - 29 - 2016 Comments Off on आने वाला कल
जब स्मार्ट सिटी बन रहे हैं तो छोटे शहरों का भविष्य भी तय हो एक शहर का मतलब यह होता है कि वहां सबकुछ व्यवस्थित होगा। देश में जब स्मार्ट सिटी बनाई जा रही हैं तब छोटे शहरों का भविष्य भी तय किया जाना चाहिए। आखिर वहां रहने वाले लोग भी तो इस देश के नागरिक हैं, वे भी सभी तरह के टैक्स अदा करते हैं। गोहाना नगर पालिका के वार्ड 7 से पार्षद आशा जैन यह बात कहती हैं। जैन बताती हैं, मैं चाहती हूं कि 

बीते कल की यादें

Posted On July - 29 - 2016 Comments Off on बीते कल की यादें
सावन में अब नहीं पड़ते झूले, कोथली, बतासे भी पुरानी बात लोगों के रहन-सहन व तीज-त्योहारों में भी बड़ा बदलाव आ गया है। अब त्योहार पर पहले जैसा न तो उल्लास देखने को मिलता और न ही खानपान। 70 वर्षीय नेहरू लाल शर्मा पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहते हैं- तब सावन का अलग ही महत्व व उल्लास हुआ करता था। गांवों में सावन शुरू होते ही नीम और आम के पेड़ों पर झूले डाल दिए जाते। लड़कियां व महिलाएं सावन 

14 साल की वह बच्ची हमेशा जिंदा रहेगी…

Posted On July - 29 - 2016 Comments Off on 14 साल की वह बच्ची हमेशा जिंदा रहेगी…
पीजीआई चंडीगढ़ में इंदरप्रीत सिंह (सफेद पगड़ी में) अन्य सहयोगी के साथ बच्चों को सामग्री बांटते हुए। -विक्की घारू पीजीआई चंडीगढ़ में विभिन्न डिपार्टमेंट के बाहर एक नजारा सामान्य है। बीमार खुले में बिस्तर पर लेटे होते हैं और उनके तीमारदार इधर-उधर चद‍्दर बिछा कर बैठे होते हैं। ऐसे ही सप्ताह और महीने बीत जाते हैं। देश के दूर-दराज के शहरों से इलाज के लिए यहां आने वाले इन लोगों के साथ बच्चे 

चाय बेचने वाली महिला ने 1 करोड़ के लोन से 317 परिवार बनाए आत्मनिर्भर

Posted On July - 29 - 2016 Comments Off on चाय बेचने वाली महिला ने 1 करोड़ के लोन से 317 परिवार बनाए आत्मनिर्भर
 गरीबी इतनी थी कि स्कूल जाने का एक दिन भी मौका नहीं मिला। समय बीत गया, शादी हो गई। आगे भी स्थिति वैसी ही रही। लेकिन मन में था कि हालात बदलने हैं। वह महिला दूसरी महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती, लेकिन पति को यह पसंद नहीं था, एक दिन झगड़ा हुआ तो तेजध्ाार हथियार से पत्नी की बाजू को काट दिया।  हालांकि महिला का संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। उन्होंने कुछ और महिलाओं को लेकर सेल्फ हेल्प 

तब बच्चों के हाथों में गुल्ली डंडा होते थे, अाज स्मार्ट फोन हैं

Posted On July - 22 - 2016 Comments Off on तब बच्चों के हाथों में गुल्ली डंडा होते थे, अाज स्मार्ट फोन हैं
टीवी, इंटरनेट और स्मार्ट मोबाइल फोन ने बच्चों का अल्हड़पन खत्म कर दिया है। इन उपकरणों ने उन्हें कुछ ज्यादा ही दुनियादार बना दिया है, इसका असर जहां उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है वहीं उनका भविष्य भी प्रभावित हो रहा है। ....

बच्चों को भयमुक्त माहौल जरूरी है, तभी उनका पूर्ण विकास होगा

Posted On July - 22 - 2016 Comments Off on बच्चों को भयमुक्त माहौल जरूरी है, तभी उनका पूर्ण विकास होगा
रेवाड़ी के सूमा खेड़ा में जो घटा वह पूरे समाज के सामने है, एक गांव की लड़कियों ने दूसरे गांव के स्कूल में पढ़ने से मना कर दिया था। वे अपने घरों में बैठी थीं और उनकी जिद थी कि जब तक उनके गांव में ही स्कूल नहीं बन जाता तब तक वे पढ़ने नहीं जाएंगी। ....

मैं बस कूद पड़ता हूं, डूबती सांसों को किनारा मिल जाता है और मुझे संतोष

Posted On July - 22 - 2016 Comments Off on मैं बस कूद पड़ता हूं, डूबती सांसों को किनारा मिल जाता है और मुझे संतोष
गर्मी से बेहाल कुछ युवक यमुना में कूद गए। पानी का बहाव तेज था, इस बीच एक युवक का खुद पर नियंत्रण नहीं रहा और वह डूबने लगा। किनारे के पास ही एक व्यक्ित उन युवकों को देख रहा था। जब उन्होंने पाया कि एक युवक खतरे में है तो वह बगैर एक भी पल की देरी किए तेज बहाव में कूद पड़ा। कड़ी मशक्कत के ....

विचार की खाद से खेतों में उग रही फसल

Posted On July - 22 - 2016 Comments Off on विचार की खाद से खेतों में उग रही फसल
यह जानकर आश्चर्य होता है कि धरती में उगाए जाने वाले बीजों के समक्ष प्रार्थना की जाए कि वे स्वस्थ हों और ऐसी फसल का उत्पादन करें जोकि मानव के स्वास्थ्य को बढ़ाए और उसकी सोच को सकारात्मक करे। पंचतत्वों के जरिये बीजों काे सकि्रय करके आस्था की खेती करने वाले किसान निश्चित रूप से ऐसी राह पर निकले हैं जोकि एकदम अलग है। ....

तब बहुएं सास के पैर छूती तो वे आशीर्वाद की झड़ी लगा देती थीं

Posted On July - 15 - 2016 Comments Off on तब बहुएं सास के पैर छूती तो वे आशीर्वाद की झड़ी लगा देती थीं
राम प्यारी तब घर में बहुएं बुजुर्ग महिला या सास के चरण स्पर्श करके दिन की शुरुआत करती थी। जब बहुएं सास के पांव दबाती थी तो सास उन्हें सदा सुहागन बनी रहने का आशीर्वाद देने के साथ-साथ ‘दूधो नहाओ-पूतों फलो’ की दुआएं भी देती थी। सीवन निवासी 85 वर्षीय राम प्यारी का कहना है कि अब सब कुछ बदल गया है। अब न तो पुराने समय की रवायतें रही हैं और न ही आज-कल की बहुओं को उनकी जानकारी है। राम प्यारी का 

पौधे लगाना बचत खाते जैसा, अभी इन्वेस्ट करेंगे तो ब्याज समेत पाएंगे

Posted On July - 15 - 2016 Comments Off on पौधे लगाना बचत खाते जैसा, अभी इन्वेस्ट करेंगे तो ब्याज समेत पाएंगे
विक्रम पंघाल पौधे ऐसे ही हैं, जैसे हमारी संतान। पौधे सबकुछ समझते हैं, प्यार, नफरत, आक्रोश, हिंसा। ऐसे प्रयोग बहुत से लोगों ने किए हैं, जब उन्होंने अपने रोपे पौधों से बात की और वे असामान्य गति से बढ़ गए। युवा विक्रम पंघाल यह बात कहते हुए इसकी जरूरत बता रहे हैं कि आखिर हमें पौधरोपण क्यों करना चाहिए। पंघाल कहते हैं, प्रकृति ऊंची इमारतों और साइंस-तकनीक का नाम नहीं है, प्रकृति जीवन देती 

किंजल सिंह आईएएस जिद से जीता जहान

Posted On July - 15 - 2016 Comments Off on किंजल सिंह आईएएस जिद से जीता जहान
यह कहानी 1982 में उत्तर प्रदेश के गाेंडा जिले के माधवपुर से शुरू होती है। तब गोंडा में डीएसपी थे केपी सिंह। वे आईएएस की तैयारी में जुटे थे और परीक्षा पास करने के बाद अब इंटरव्यू के इंतजार में थे। उस समय जिले में अपराधी तत्वों का बोलबाला था और पुलिस के लोग भी उनसे संबंध रखते थे। केपी सिंह को इसकी जानकारी थी और उन्होंने संबंधित पुलिस वालों के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए। आशंका सही पाई 

जमीन के सैकड़ों फुट नीचे पत्थरों को पीस कर बनाती हैं तरक्की की राह

Posted On July - 15 - 2016 Comments Off on जमीन के सैकड़ों फुट नीचे पत्थरों को पीस कर बनाती हैं तरक्की की राह
टनल इंजीनियरिंग वह काम है, जो जमीन के अंदर होता है, सैकड़ों फुट गहराई में। पथरीली जमीन, मिट‍्टी और कठोर चट‍्टानों को चकनाचूर करके राह बनाई जाती है विकास की। कोलकाता की बेटी और पंजाब की बहू एनी सिन्हा रॉय की राह भी ऐसी रही है, उन्होंने विरोधी विचारों के खिलाफ अपना रास्ता बनाया और फिर एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जिस पर अब सभी नाज करते हैं। वे देश की एक मात्र महिला हैं, जिन्होंने टनल इंजीनियरिंग 

आने वाला कल

Posted On July - 8 - 2016 Comments Off on आने वाला कल
कोई भी व्यक्ति जिसे खुद से प्रेम है और जो अपने परिवार और देश की खुशहाली चाहता है, उसे योग करना चाहिए। अापको रोजाना की जिंदगी में से सिर्फ एक घंटा निकालना है। आप देखेंगे कि योग के नित्य अभ्यास से आप अपने खुद के बेहद नजदीक आ गए हैं। ....

बीते कल की यादें

Posted On July - 8 - 2016 Comments Off on बीते कल की यादें
जागते रहो...। रात के सन्नाटे में यह आवाज हम रोजाना सुनते। साथ ही बिजली के पोल से लाठी बजाने की आवाज आती, कुत्ते भौंकते और फिर उनके पीछे जैसे कोई दौड़ रहा होता। यह व्यक्ित चौकीदार होता था। उस आवाज से बड़ा सम्बल मिलता था। ....

जमीन में पानी के घड़े दबाकर जेल को भर दिया हरियाली और पक्षियों से

Posted On July - 8 - 2016 Comments Off on जमीन में पानी के घड़े दबाकर जेल को भर दिया हरियाली और पक्षियों से
जेल के बारे में यही कहा जाता है, यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। बेशक यह बात सुरक्षा के लिहाज से कही जाती है, लेकिन परिंदों को कौन रोक सका है, उन्हें जहां दो बूंद पानी और चुग्गा मिलता है वे वहीं ठहर जाते हैं। ....
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