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बेरोजगारी के समाधान के लिए युवाओं का कौशल विकास जरूरी

बेरोजगारी के समाधान के लिए युवाओं का कौशल विकास जरूरी

बेरोजगारी की समस्या विकराल हो चुकी है जोकि व्यक्ति के निजी जीवन को तो प्रभावित कर ही रही है, सामाजिक ताने-बाने को भी बिगाड़ रही है। बढ़ती आबादी इसकी सहायक बन गई है। सरकार योजनाएं लेकर आती है लेकिन वे भी जल्द ही नाकाफी सािबत होती हैं। यमुनानगर में सह-प्राध्यापक उचित ...

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तब कालका में शाम होते ही किवाड़ बंद हो जाते, जो सुबह ही खुलते

तब कालका में शाम होते ही किवाड़ बंद हो जाते, जो सुबह ही खुलते

साल 1948 में जब मैं परिवार के साथ कालका आया तो मेरी उम्र कोई 6 साल थी। यहीं बचपन बीता, जवान हुआ और फिर रेलवे में नौकरी मिल गई। अब 75 की उम्र में बीते हुए जमाने को देखता हूं तो अहसास होता है, हम कितना कुछ पीछे छोड़ आए हैं। ...

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ताकि फिर न भटकें राह, कैदियों को लकड़ी में जान डालना सिखाता हूं

ताकि फिर न भटकें राह, कैदियों को लकड़ी में जान डालना सिखाता हूं

शिल्प गुरु महेशचंद शर्मा का पता है- दिल्ली-6. उनके हाथ में हुनर है, वे बेजान लकड़ी पर जब अपने औजार चलाते हैं तो उनमें जो आकृति उबरती है, वह अनोखी होती है। कहते हैं, पैतृक कला है। कभी हाथी दांत पर आजमाते थे, उस पर रोक लगी तो फिर चंदन ...

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LOC पर ज़िंदगी की  रखवाली में एक लड़की

LOC पर ज़िंदगी की रखवाली में एक लड़की

सबरीना सिद्दीकी LOC  line of control  एक तरफ भारत की सेनाएं डटी हैं तो दूसरी तरफ पाकिस्तान की सेना अपनी बंदूकों के मुंह खोले बैठी है। पाक की तरफ से शुरुआत होती है तो भारत की तरफ से उसका जवाब दिया जाता है। दिन-रात गोलीबारी चलती है, तोपें गरजती रहती हैं। इस ...

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तब हर घर में गेहूं से भरी टंकी होती और चक्की भी मिलती थी

तब हर घर में गेहूं से भरी टंकी होती और चक्की भी मिलती थी

उस दिन दुकान पर आटे की थैली लेने के लिए गया तो एक पहचान के मिल गए। इधर-उधर की बातें होने लगी तो जिक्र बाजार में बिकने वाले गेहूं के आटे और चावल पर केंद्रित हो गया। कहने लगे, आजकल आटे के इतने सारे ब्रांड बाजार में हैं, सब अपने ...

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आरक्षण का अाधार जातिगत नहीं, आर्थिक होना चाहिए

आरक्षण का अाधार जातिगत नहीं, आर्थिक होना चाहिए

समाज के प्रत्येक वर्ग में ऐसे लोग हैं जोकि आर्थिक रूप से समृद्ध हैं, लेकिन उसके बावजूद आरक्षण का लाभ ले रहे हैं या लेना चाहते हैं। वैसे जरूरत इसकी है कि समाज के हर जरूरतमंद को चाहे वह किसी भी वर्ग या जाति से संबंधित हो, को आरक्षण का ...

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ग्रामीणों ने बनाया कोष, ताकि पैसे के अभाव में न रुके कोई शादी, इलाज

ग्रामीणों ने बनाया कोष, ताकि पैसे के अभाव में न रुके कोई शादी, इलाज

बेटी शादी के योग्य हो गई थी और विधवा मां के दिन का चैन और रात की नींद खत्म हो गई थी। घर में आय का कोई जरिया नहीं था, खेती की थोड़ी-बहुत जमीन ही थी, जिसके सहारे गुजर हो रही थी। जैसे-तैसे बेटी का रिश्ता हो गया लेकिन अब ...

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22 साल की सरपंच बदल रही गांव की तस्वीर

Posted On July - 1 - 2016 Comments Off on 22 साल की सरपंच बदल रही गांव की तस्वीर
एक वह जमाना था, जब गांव-देहात में बेटियों काे मतदान तो दूर उनका वोट भी नहीं बनवाया जाता था। लेकिन अब यहां बदलाव की बयार बह चली है, सरकार के प्रयास रंग ला रहे हैं, शिक्षित पंचायतें काम संभाल चुकी हैं। तिगांव के नजदीक आईएमटी क्षेत्र में एक गांव ऐसा ही है जहां ग्रामीणों ने एक युवती को बागडोर सौंपी है। एमए कर रही अंजू ....

स्मार्ट सिटी की तर्ज पर दूसरे शहरों की सूरत भी बदलने की जरूरत

Posted On June - 24 - 2016 Comments Off on स्मार्ट सिटी की तर्ज पर दूसरे शहरों की सूरत भी बदलने की जरूरत
देश में जब स्मार्ट सिटी विकसित किए जा रहे हैं, तब बाकी शहरों की सूरत भी बदले जाने की जरूरत है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि विकास सभी का मौलिक अधिकार है और हम एक शहर को विकसित करके बाकी को अपने हाल पर नहीं छोड़ सकते। ....

तब गर्मियों में घरों के बाहर पानी के मटके रखे होते थे, प्याऊ लगती थीं

Posted On June - 24 - 2016 Comments Off on तब गर्मियों में घरों के बाहर पानी के मटके रखे होते थे, प्याऊ लगती थीं
एक कहावत है, भूखे को भोजन व चलते को पानी पिलाने से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है। गर्मियों में गांव-देहात और शहरों में गलियों, सड़कों के किनारे रखे जाने वाले पानी के मटके, वाटर कूलर इसी सोच का परिणाम हैं। ....

आर्गेनिक खेती से अाईटी इंजीनियर ने बदली कर्जदार किसानों की जिंदगी

Posted On June - 24 - 2016 Comments Off on आर्गेनिक खेती से अाईटी इंजीनियर ने बदली कर्जदार किसानों की जिंदगी
यह कहानी सबक देती है कि हमारे पास जितने भी सीमित संसाधन हैं, उन्हीं का सही इस्तेमाल करके हम न केवल कामयाबी हासिल कर सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी मॉडल स्थापित कर सकते हैं। इसके लिए जरूरत होती है सही नेतृत्व और टीम वर्क की। ....

बेंगलुरु का बार्बर, जो है 200 कारों का मालिक

Posted On June - 24 - 2016 Comments Off on बेंगलुरु का बार्बर, जो है 200 कारों का मालिक
इस कहानी की शुरुआत 1979 से होती है। एक परिवार का मुखिया जोकि एक छोटी सी हेयर कटिंग की दुकान का मालिक था, की मौत हो जाती है। घर में पत्नी के अलावा तीन बच्चे हैं। ....

सामाजिक बेहतरी के लिए संयुक्त परिवार हैं अाज की बड़ी जरूरत

Posted On June - 10 - 2016 Comments Off on सामाजिक बेहतरी के लिए संयुक्त परिवार हैं अाज की बड़ी जरूरत
भारत की बढ़ती जनसंख्या एक गंभीर समस्या है। जिस रफ्तार से हमारी आबादी बढ़ रही है, उससे लगता है कि हम जल्दी ही चीन को भी पीछे छोड़ देंगे जोकि दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। जनसंख्या पर नियंत्रण इसलिए जरूरी है क्योंकि हमारा भौगोलिक क्षेत्रफल उतना ही है, जितना आजादी के वक्त था। ऐसे में संसाधन कम होते जा रहे हैं, लेकिन ....

राजस्थान के किसान एक मोबाइल एप को देखकर उगाते हैं खेत में बीज

Posted On June - 10 - 2016 Comments Off on राजस्थान के किसान एक मोबाइल एप को देखकर उगाते हैं खेत में बीज
देशभर में कई तरीकों से किसानों की दशा एक जैसी ही है, उन्हें मानूसन की चिंता बनी रहती है, बार-बार ईश्वर से अच्छी बारिश की गुहार करते रहते हैं। वहीं दिन और रात ‘अच्छी’ फसल होने की उम्मीद बांधे होते हैं, फिर फसल कट जाती है, मंडी में पहुंच जाती है, तब फिर अच्छी कीमत हासिल करने के लिए उसे बेहद जद‍्दोजहद करनी पड़ती है। ....

तब लगभग हर घर में नेताजी सुभाष, आजाद का कैलेंडर टंगा होता था

Posted On June - 10 - 2016 Comments Off on तब लगभग हर घर में नेताजी सुभाष, आजाद का कैलेंडर टंगा होता था
यह किस्सा तबका है जब घरों की दीवारों पर टंगे कैलेंडर न केवल शोभा बनते थे बल्कि हवा के तेज झोंको में फड़फड़ाते हुए अपनी मौजूदगी का खूब अहसास कराते थे। हालांकि कैलेंडर अब भी हैं, लेकिन फिल्मी और वे भी दीवार पर चिपके हुए। ....

छुट‍्टी का मजा लेते हुए सीखिए खेती के गुर

Posted On June - 10 - 2016 Comments Off on छुट‍्टी का मजा लेते हुए सीखिए खेती के गुर
प्रगतिशील किसान दिनेश बताते हैं, माई प्ले फार्म के नाम से शुरू किया गया यह फार्म करीब 4 एकड़ में फैला हुआ है। शुरुआत में यहां 700 रुपये फीस रखी गई है, यह सारा सिस्टम ऑनलाइन है। इसमें माई प्ले फार्म की वेबसाइट के जरिये लोग आवेदन करते हैं। ....

आने वाला कल

Posted On June - 3 - 2016 Comments Off on आने वाला कल
देश में बेरोजगारी की समस्या बेहद विकराल हो चुकी है और व्यक्ति के निजी जीवन के अलावा हमारे सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को बिगाड़ रही है। कौशल क्रांति संगठन के प्रमुख प्रो. विधु रावल बेरोजगारी को बड़ी समस्या बताते हुए इसका समाधान चाहते हैं। उनके मुताबिक अगर इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में इसके परिणाम समाज को भुगतने होंगे। ....

बीते कल की यादें

Posted On June - 3 - 2016 Comments Off on बीते कल की यादें
''कभी गांव-देहात में समाज के लोग एकजुट होकर कुएं खुदवाते थे। इस दौरान खुले दिल से पैसे इकट‍्ठे किए जाते। प्रत्येक घर से रोजाना कोई काम कराने के लिए वहां पहुंचता। इस तरह कुछ दिन में ही कुआं तैयार हो जाता। ....

मजबूर थी, इसलिए इस धंधे में आई, पर अपनी बेटी को कभी नहीं आने दूंगी

Posted On June - 3 - 2016 Comments Off on मजबूर थी, इसलिए इस धंधे में आई, पर अपनी बेटी को कभी नहीं आने दूंगी
मेरे हाथ में क्या है, मुझे जो कहा गया, वह मैंने किया। परंपरा बना दी है पुरखों ने और हम बस इसे जीये जा रही हैं, लेकिन अब आगे ऐसा नहीं होगा। मेरी बेटी इस परंपरा पर नहीं चलेगी।’ राजस्थान के राजनट समुदाय की एक महिला जब यह कह रही थी तो उनकी आंखें सूखी पड़ी थीं। बिल्कुल रेत की तरह। वहां कोई नमी नहीं ....

सिलाई की मशीन से सुशीला ने बदल डाली तकदीर

Posted On June - 3 - 2016 Comments Off on सिलाई की मशीन से सुशीला ने बदल डाली तकदीर
बहल के मीठी गांव में मनियारी की छोटी-सी दुकान पर दो-तीन लड़कियां सामान खरीद रही हैं। चूडि़यां, कपड़ों पर लगाने वाले तारे-गोटा, चुनरी, खिलौने, सजावट की छोटी-छोटी चीजों से दुकान भरी हुई है। दुकान की मालिक उन्हें कई आइटम दिखाती है और उनमें से एक लड़कियाें को पसंद आ जाता है, जिसे लेकर वे चली जाती हैं। ....

तब बाराती एक खाट जरूर तोड़ते थे, इसे शगुन समझा जाता था

Posted On May - 20 - 2016 Comments Off on तब बाराती एक खाट जरूर तोड़ते थे, इसे शगुन समझा जाता था
पुराने समय में शादी में बारातियों के ठाठ निराले होते थे। बुजुर्ग मनोहर लाल बताते हैं, तब लड़के की शादी में निमंत्रण पक्का होने के बाद बाराती कपड़े व जूतों के जुगाड़ में जुट जाते थे। किसी की कमीज-पैंट, जूते या जूतियां मांगने में संकोच नहीं करते। बारात में चलते समय बस में सीट पक्की करने के लिए होड़ लगती। लड़की वालों की तरफ से ....

शादी, बच्चे के जन्म जैसे अवसरों पर पौधों का वितरण बने परंपरा

Posted On May - 20 - 2016 Comments Off on शादी, बच्चे के जन्म जैसे अवसरों पर पौधों का वितरण बने परंपरा
पर्यावरण को बचाना अकेले विभाग और सरकारों का काम ही नहीं है, बल्कि आम लोगों को भी इसके लिए आगे आना होगा। अभी की हालात यह हैं कि दुनिया के सभी देश पर्यावरण असंतुलन की मार झेल रहे हैं, बढ़ती गर्मी से ग्लेशियर पिघल रहे हैं और कई छोटे द्वीपनुमा देशों का अस्तित्व संकट में है। तोशाम के रतेरा गांव निवासी वीरेंद्र तंवर यह बात ....

ट्रेन में चढ़ते कटी टांग, एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा खुद को साबित किया सक्षम

Posted On May - 20 - 2016 Comments Off on ट्रेन में चढ़ते कटी टांग, एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा खुद को साबित किया सक्षम
बरेली रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का आना-जाना लगा था। एक ट्रेन आई तो भीड़ उसकी तरफ बढ़ गई, इस भीड़ में एक 24 साल की युवती भी थी। ट्रेन में चढ़ते हुए एकाएक युवती का पैर फिसल गया। वह प्लेटफॉर्म से नीचे गिर गई थी और उसकी टांग से ट्रेन गुजर चुकी थी। हाहाकार मच गया, युवती को अस्पताल ले जाया गया। उसकी जान बच ....
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