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फ़ीचर्ड न्यूज़
रोशनी  से नहाया  नगर

रोशनी से नहाया नगर

अमिताभ स. मलेशिया की केपिटल कुआलालम्पुर पर उतरते ही एयरपोर्ट की भव्यता दंग करती है। अपने देश से दस साल बाद अगस्त 1957 को मलेशिया ब्रिटिश राज से आजाद हुआ, लेकिन वहां तरक्की की रफ्तार कहीं अधिक है। समूचे मलेशिया में बिजली और पानी की कोई कमी नहीं है। कुआलालम्पुर की ...

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बुजुर्गों को कभी अकेला न छोड़ें

बुजुर्गों को कभी अकेला न छोड़ें

कार्तिक क्या आपके घर में बुजुर्ग हैं? क्या आप उन्हें अकेले रहने देते हैं? घर के कामों में शामिल नहीं करते? बातचीत में शामिल नहीं करते? यदि इन सब सवालों का जवाब हां है तो ज़रा नये शोध के नतीजे पर ध्यान दीजिये। एक शोध में यह बात सामने आयी है ...

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साख पर आंच

साख पर आंच

अनूप भटनागर भ्रष्टाचार, आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्याओं से निबटने के लिये देश में मौजूद काला धन जड़ से खत्म करने के इरादे से पांच सौ और एक हजार रूपए की मुद्रा को अमान्य घोषित करने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा का जनता ने पुरजोर स्वागत किया था। परंतु ...

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उलट सियासी विचार वाले साथी संग दो पल

उलट सियासी विचार वाले साथी संग दो पल

फीचर टीम सियासत को लेकर कहा जाता है कि ये भाई-भाई, बाप-बेटे में रिश्ते खराब करा देती है। इतिहास खंगाले तो बात सौ फीसदी समझ आने लगती है। मुगल शासकों में सियासत या गद्दी को लेकर खून-खराबे हुए। आज के दौर में भी सियासी मतभेद रिश्तों में तनाव पैदा करते हैं। ...

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स्ट्रीट फूड बनारस का

स्ट्रीट फूड बनारस का

स्वाद शैलेष कुमार बनारसी कपड़ों की धूम अब न केवल अपने देश में हो रही है, बल्कि विदेशों में बनारसी कपड़ों से बने ड्रेसेज रैम्प पर दिखने लगे हैं। इस शहर का ठेठ बनारसीपन लोगों को इतना लुभा रहा है कि गंगा मैया की अद्भुत आरती देखने के अलावा भी लोगों की ...

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कोजी कोजी ठंड

कोजी कोजी ठंड

इंटीरियर फीचर टीम ठंड में गर्माहट का अहसास ही आधी ठंड भगा डालता है। इस अहसास को घर की डेकोरेशन में डालकर तो देखें, कोजी माहौल का नज़ारा चहुंओर पाएंगे। ज्यादा कुछ नहीं करना है। कोजी फील वाली चंद चीजों का सहारा लेना है और उन्हें कायदे से यहां-वहां रखना है। ठंड ...

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मैं हूं   मीरा

मैं हूं मीरा

श्वेता रंजन कृष्ण के प्रति मीरा की भक्ति और आसक्ति अटूट थी। मीरा के रोम-रोम में कृष्ण का वास था। महलों में पली-बढ़ी, एक सुहागन मीरा ने आज से 500-600 वर्ष पहले कृष्ण की भक्ति के कारण ही सम्पूर्ण जगत के विरोध का सामना किया था। कृष्ण की भक्ति और अनुरक्ति ...

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  • साख पर आंच
     Posted On January - 22 - 2017
    भ्रष्टाचार, आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्याओं से निबटने के लिये देश में मौजूद काला धन जड़ से खत्म करने....
  • रोशनी  से नहाया  नगर
     Posted On January - 22 - 2017
    मलेशिया की केपिटल कुआलालम्पुर पर उतरते ही एयरपोर्ट की भव्यता दंग करती है। अपने देश से दस साल बाद अगस्त....
  • डाकिया थनप्पा खुशी बांचता गम छिपाता
     Posted On January - 22 - 2017
    जाने-माने साहित्यकार आरके नारायण की महान कृति ‘मालगुडी डेज’ के उन एपिसोड को याद कीजिये जो दूरदर्शन पर लंबे समय....
  • कोजी कोजी ठंड
     Posted On January - 22 - 2017
    ठंड में गर्माहट का अहसास ही आधी ठंड भगा डालता है। इस अहसास को घर की डेकोरेशन में डालकर तो....

वुडन फ्लोर चमाचम

Posted On January - 1 - 2017 Comments Off on वुडन फ्लोर चमाचम
घर की फ्लोरिंग से लेकर छत तक अगर करीने से तैयार करवायी जाए तो घर कमाल का दिखता है। आज कल बड़े-बड़े घरों में अक्सर वुडन फ्लोरिंग होती है। ....

यह है ऐनिड का संसार

Posted On January - 1 - 2017 Comments Off on यह है ऐनिड का संसार
सीमा आनंद चोपड़ा हम इंगलैंड के बर्किंघमशायर के ‘रेड लायन फैमिली पब’ में थे। दरअसल हम 20वीं शताब्दी की बाल पुस्तकों की प्रख्यात अंग्रेजी लेखिका ऐनिड बलाइटन की रचनास्थली की खोज पर निकले थे। इसी खोज ने हमें दिखाया और पहुंचाया था ‘रेड लायन फैमिली पब’ में। पब 18वीं शताब्दी में कैसा दिखता था, इससे संबंधित एक पेंटिंग देखी। पर पेंटिंग देखने के बाद हमें लगा कि अधिक कुछ नहीं बदला है। 

बदलेंगे घुमक्कड़ी के अंदाज़

Posted On January - 1 - 2017 Comments Off on बदलेंगे घुमक्कड़ी के अंदाज़
लद्दाख तक पहुंचने की सरे-राह पर बर्फ की मोर्चाबंदी भी अब यायावरों के पैरों को थाम नहीं पाती। आसमान को चीरते लोहे के पंछियों पर सवार हो कितने ही कदम इस सर्दीली खोह में उतरने की बेताबी को और हवा देते हैं। ये दीवाने सिर्फ घुमक्कड़ी के लिए वहां पहुंचते हों, ऐसा नहीं है। ....

सुनो, डिजिटल युग की दस्तक

Posted On December - 25 - 2016 Comments Off on सुनो, डिजिटल युग की दस्तक
सुना है कि इंडिया डिजिटल हो रहा है, कैशलेस। साइबर हाईवे पर सवार देश की नरेंद्र मोदी सरकार ने जाते साल की 8 नवंबर को कागजी नोटों की रुखसती और डिजिटल युग की आमद का परवाना लिख डाला। ....

पेटू बैक्टीरिया से ऊर्जा

Posted On December - 25 - 2016 Comments Off on पेटू बैक्टीरिया से ऊर्जा
शौचालयों, रसोईघर के कचरे से निकलने वाले बैक्टीरिया बन सकते हैं ऊर्जा के बड़े स्रोत। इस तरह के बैक्टीरिया के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि इनका इस्तेमाल कर ऊर्जा पैदा की जा सकती है। ....

नए साल में नया सा घर

Posted On December - 25 - 2016 Comments Off on नए साल में नया सा घर
नए साल की आमद होने वाली है। क्यों न नयी फिजाओं की खुशामदीद नए होम डेकोर से करें। नया माहौल रहन-सहन में बदलाव का सूचक भी है। आज हम आपको बताएंगे इंटीरियर के कुछ रचनात्मक डिजाइन, ताकि घर आकर्षक लगे। ....

पारंपरिक फ्लेवर्स वाला इटालियन फूड

Posted On December - 25 - 2016 Comments Off on पारंपरिक फ्लेवर्स वाला इटालियन फूड
मुझे याद है जब मेरे भाई आैर भाभी घूमने के लिए वेनिस गए थे तब उन्होंने मुझे फोन करके कहा था कि यार, यहां क्या स्वादिष्ट वाइन मिलती है। मैंने तब फटाफट ही कह डाला था कि वाइन के साथ मेरे लिए कुछ आैर भी लेकर आना। उन्होंने आते ही मुझे स्पार्कलिंग व्हाइट वाइन प्रोसेको दी थी, जो स्वाद में कमाल की थी। वेनिस को ....

गाली तो गाली है

Posted On December - 25 - 2016 Comments Off on गाली तो गाली है
'इश्क कमीना' या फिर 'कुत्ते-कमीने मैं तेरा खून पी जाऊंगा' जैसे गालियों या अपशब्दों से भरे बॉलीवुड डायलॉग शौकीन लोग अक्सर बोलते दिख जाएंगे। हमारे बीच में ही बहुत सारे लोग बात-बात पर गाली देने के आदी होते हैं। हम खुद भी तो कभी-कभी, खासकर गुस्सा आने पर गाली बक डालते हैं। ....

स्त्रासबूर्ग जिंगल ऑल द वे

Posted On December - 25 - 2016 Comments Off on स्त्रासबूर्ग जिंगल ऑल द वे
दिसंबर की कड़कड़ाती ठंड में, रात के अंधेरे को चीरते हुए, रेंडियर पर सवार होकर जब सेंटा क्लॉज़ झिलमिल सितारों से भरे आसमान से नीचे उतरते हैं तो चारों ओर जगमग रोशनी फैल जाती है, मौसम खुशनुमा हो जाता है, ठंड का एहसास भी अच्छा लगने लगता है और सबके चेहरों पर-फिर चाहे वे बच्चे हों या बड़े-एक मीठी सी मुस्कान आ जाती है। ....

मिलें बंद करने से बंद न होगा शोषण

Posted On December - 25 - 2016 Comments Off on मिलें बंद करने से बंद न होगा शोषण
गरीबी हटाने के मुद्दे पर चल रही बहस के बीच कामरेड मोटे बोले - 'प्रश्न घरेलू धंधों और मिलों के धंधों का नहीं। प्रश्न तो यह है कि व्यवस्था ऐसी हो कि मजदूर या किसान लोग अपने परिश्रम से जो पैदावार करें, उसे वे अपने व्यवहार में ला सकें। नए रोजगार बढ़ाने की भी आवश्यकता है ताकि बेकार लोग रोजी पा सकें।' ....

पोर-पोर में प्रेम समेटे पारो

Posted On December - 25 - 2016 Comments Off on पोर-पोर में प्रेम समेटे पारो
शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास देवदास ने बॉलीवुड ही नहीं, हिंदुस्तानी प्रेमियों के लिए जैसे एक चरित्र गढ़ दिया। यूं तो लैला मजनूं, सीरी फरहाद जैसे प्रेम प्रतीक जोड़ियां पहले से विद्यमान हैं। लेकिन शरतचंद्र के उपन्यास का नायक देवदास तमाम उदास और भटके हुए प्रेमियों का नायक बन जाता है। ....

काशी की बोल उठीं दीवारें

Posted On December - 25 - 2016 Comments Off on काशी की बोल उठीं दीवारें
भोले बाबा की नगरी काशी। माना जाता है कि वाराणसी भगवान शंकर के त्रिशूल पर टिका है। लेकिन इस शहर ने तमाम उतार-चढ़ाव का सामना किया है। सांस्कृतिक संपदा और धार्मिक आस्था की विरासत संभालने वाला यह शहर ना जाने कब आधुनिकता की भेंट चढ़ गया। तमाम घाटों के साथ यहां गंदगी के ढेर लग गए। काशी की पुरानी सुंदरता में नयी जान फूंकने का ....

अभिशप्त धैर्या

Posted On December - 18 - 2016 Comments Off on अभिशप्त धैर्या
काल की स्याह-सफ़ेद तूलिका से चित्रित दुःख की साकार, सदेह प्रतिमाओं में से एक, अलग गोमती। हिमांशु जोशी के उपन्यास 'कगार की आग' की नायिका, धैर्य धारिणी, धरा सी सहिष्णु। ....

लहरों ने उगला एक खोया शहर

Posted On December - 18 - 2016 Comments Off on लहरों ने उगला एक खोया शहर
बीते दो दशकों में केरल के समुद्र तटों, बैकवॉटर्स, पहाड़ों और मसाला बागान पर्यटन को सैलानियों ने इतना खंगाला है कि अब राज्य में पर्यटन अपने रटे-रटाए मुहावरों से बाहर फिसलने को बेताब है। ....

बिरजू महाराज की नातिन भी नृत्य दीवानी

Posted On December - 18 - 2016 Comments Off on बिरजू महाराज की नातिन भी नृत्य दीवानी
श्वेता रंजन कत्थक नृत्य का नाम आते ही जेहन में उभर जाता है चेहरा पंडित बिरजू महाराज का। पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित बिरजू महाराज। ऐसे महान शख्स की नृत्य शैली और खूबियों को, उनकी कत्थक परंपरा को आगे ले जाने की ज़िम्मेदारी उनके बेटे और पोतियों के अलावा उनकी नातिन शिंजिनी कुलकर्णी ने भी उठाई है। नृत्य की बारीकियों को बेहद संजीदगी से सीखने वाली शिंजिनी में नृत्य के लिए प्रेम बचपन 

एक मजबूरी में गरीब, एक शौकिया

Posted On December - 18 - 2016 Comments Off on एक मजबूरी में गरीब, एक शौकिया
यशपाल गांधी की कुटिया के दर्शन के लिए आए थे। इसलिए फिर विनय की कि देखने से मतलब फूस की झोपड़ियां देख लेने से नहीं है। ऐसी झोपड़ियां तो अनेक अवसरों पर देखी हैं। प्रयोजन है उस विचार-धारा को जानने का, जिसके कारण आप लोग यह कष्टमय जीवन बिताना उचित समझते हैं।’ ‘हमें तो इसमें कोई कष्ट जान नहीं पड़ता?’ गांधी आश्रम के मैनेजर शाह साहब ने लेटे ही लेटे उत्तर दिया। शाह साहब ने कृपापूर्वक 
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