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रोचक

विटामिन 'ए' जरूर लें कार्तिक यूं तो गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन दिये जाने की सख्त जरूरत होती है। लेकिन अब डॉक्टरों से सलाह लेकर आपको उन्हें भरपूर विटामिन 'ए' भी देना होगा। ताजा शोध में यह सामने आया है कि गर्भावस्था के दौरान मां द्वारा पर्याप्त विटामिन 'ए' नहीं लेने से ...

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समुद्र चले संग-संग

समुद्र चले संग-संग

यात्रा-वृत्तांत/महाबलीपुरम केवल तिवारी इस सफर पर समुद्र की बात होती है। इस सफर पर समुद्र का ही साथ होता है। कोई इसे मंदिरों का शहर कहता है और कोई रिसाेर्ट्स का। कहे कोई कुछ भी, लेकिन यह जगह है बहुत अनूठी। जब आप यहां के सफर पर होते हैं तो लगता है ...

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नन्हे का कमरा

नन्हे का कमरा

फीचर टीम उम्र में छोटे, कहने को नन्हे-मुन्ने, मगर घर का सबसे अहम सदस्य होते हैं हमारे बच्चे। इसलिए तो कहते हैं कि उनके कमरे को सजाना बच्चों का खेल नहीं। बड़ी-बड़ी जुगत भिड़ानी पड़ती है। कभी उनके आराम का ध्यान, कभी पसंद का, कभी लेटेस्ट ट्रेंड्स पर निगाह तो कभी ...

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लुटाएं तहज़ीब का खज़ाना

लुटाएं तहज़ीब का खज़ाना

फीचर टीम हम कितने तमीज़दार या तहज़ीब के रखवाले हैं, इसका सच्चा खुलासा उस घड़ी होता है, जब हमारे सामने बैठा व्यक्ति कुछ-कुछ अशोभनीय आचरण करता है। हमारे में से बहुत सारे लोग सामने वाले की बदत्तमीजी को नज़रअंदाज़ करने को ही सही मानते हैं। दरअसल कई बार सबकुछ इतना जल्दी ...

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चख ले  झारखंडी चोखा

चख ले झारखंडी चोखा

शैलेष कुमार झारखंड आैर बिहार में कई समानताएं हैं, जाहिर है खान-पान में भी हैं। बावजूद इसके झारखंड के खान-पान में कई ऐसी विशेषताएं हैं, जो इसे बिहार से अलग करती हैं। झारखंड के बारे में लोगों की यह भी सोच है कि यहां कुछ भी जायकेदार नहीं है, जबकि सच्चाई ...

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साइबर अड्डे

साइबर अड्डे

अलका कौशिक छत्तीसगढ़ में महानदी के किनारे खुदाई ने सिरपुर की शक्ल में एक ऐसे शहर को उगला था, जिसमें कुएं की जगत के करीब ही ज़मीन पर स्टापू जैसे किसी खेल की लकीरें आज भी अपनी हस्ती को संभाले हुए हैं। पुरातत्वेत्ताओं का अनुमान है कि गांव-देहात की औरतें जब ...

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सरकारी तंत्र में 'अनफिट' ईमानदार दारोगा

सरकारी तंत्र में 'अनफिट' ईमानदार दारोगा

नमक का दारोगा मुंशी प्रेमचंद मुंशी प्रेमचंद की कहानियां हर देश-काल-परिस्थिति पर फिट बैठती हैं। उनकी लिखी कहानी है 'नमक का दारोगा', जो आज के दौर में भी उतनी ही सटीक बैठती है, जितना अपने रचे जाने के समय में। इस कहानी के मुख्य पात्र हैं मुंशी वंशीधर। कहानी सरकारी तंत्र ...

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  • साइबर अड्डे
     Posted On February - 19 - 2017
    छत्तीसगढ़ में महानदी के किनारे खुदाई ने सिरपुर की शक्ल में एक ऐसे शहर को उगला था, जिसमें कुएं की....
  • सरकारी तंत्र में ‘अनफिट’ ईमानदार दारोगा
     Posted On February - 19 - 2017
    मुंशी प्रेमचंद की कहानियां हर देश-काल-परिस्थिति पर फिट बैठती हैं। उनकी लिखी कहानी है 'नमक का दारोगा', जो आज के....
  • लुटाएं तहज़ीब का खज़ाना
     Posted On February - 19 - 2017
    हम कितने तमीज़दार या तहज़ीब के रखवाले हैं, इसका सच्चा खुलासा उस घड़ी होता है, जब हमारे सामने बैठा व्यक्ति....
  • समुद्र चले संग-संग
     Posted On February - 19 - 2017
    इस सफर पर समुद्र की बात होती है। इस सफर पर समुद्र का ही साथ होता है। कोई इसे मंदिरों....

इनडोर प्लांट्स हमें भी चाहिए रोशनी

Posted On November - 20 - 2016 Comments Off on इनडोर प्लांट्स हमें भी चाहिए रोशनी
जाड़े को तो आपने वेलकम कह दिया, मगर क्या अपने इनडोर पौधों के मन की सुनी जो पारे में गिरावट और शुष्क हवाओं की वजह से परेशानी झेल रहे हैं। सर्दी में जैसे आपको गर्माहट की जरूरत है, ठीक वैसे ही इनडोर पौधे भी ठंड के मौसम में आपसे अतिरिक्त देखभाल की दरकार रखते हैं। ....

अंडे सेते समय लोरी गाती है चिड़िया

Posted On November - 20 - 2016 Comments Off on अंडे सेते समय लोरी गाती है चिड़िया
अभिमन्यु वाली कहानी हम सब जानते हैं, जिसमें कहा गया है कि उन्होंने मां के गर्भ में चक्रव्यूह रचना को तोड़ने के गुर सीख लिए थे। आज वैज्ञानिक आधार पर भी यह बात पुख्ता हुई है कि मां के खुश रहने, प्राकृतिक वातावरण में रहने जैसी तमाम परिस्थितियों का असर होने वाले बच्चे पर पड़ता है। इसी क्रम में एक और नया शोध सामने आया ....

एअर प्योरीफायर हवा के ताज़ा झोंके

Posted On November - 20 - 2016 Comments Off on एअर प्योरीफायर हवा के ताज़ा झोंके
दूषित पानी के बाद अब नंबर दूषित हवा का है। पहाड़ी इलाकों की ताज़ा हवा को बोतलों में बंद कर बेचा जा रहा है। इसके अलावा शहरों की फिज़ा में घुली गंदगी को शुद्ध करने के लिए एअर प्योरीफायर्स बनाए जा रहे हैं। ....

हिमालय की गोद में

Posted On November - 13 - 2016 Comments Off on हिमालय की गोद में
भूटान, चीन और म्यांमार की सीमा से सटे और हिमालय की गोद में बसे अरुणाचल प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। अरुणाचल की बहुरंगी संस्कृति लोगों को आकर्षित करती है। ....

बोलती/गुनगुनाती रघु की तसवीरें

Posted On November - 13 - 2016 Comments Off on बोलती/गुनगुनाती रघु की तसवीरें
रघु राय का नाम दुनिया के बेहतरीन फोटोग्राफरों में शुमार होता है। पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित रघु राय की हर तसवीर कुछ कहती है। ....

फर्ज के आगे बेबस फौजी पेत्रो

Posted On November - 13 - 2016 Comments Off on फर्ज के आगे बेबस फौजी पेत्रो
कई बार सबकुछ होते हुए भी इंसान अपनेपन से महरूम रहता है। उसे तलाश होती है एक ऐसे व्यक्ति की जो उसे उसका अपना सा लगे। अपना सा लगने वाला कोई मिल भी जाये तो फर्ज इस अपनेपन के बीच में आ जाता है। ....

गांधी की कुटिया डगर ज़रा कठिन थी

Posted On November - 13 - 2016 Comments Off on गांधी की कुटिया डगर ज़रा कठिन थी
यशपाल 1939 में दूसरा महायुद्ध आरंभ हुआ तो ब्रिटिश साम्राज्यशाही सरकार ने भारत की इच्छा के विरुद्ध देश को उस युद्ध में लपेट लिया। उस समय देश के सभी राजनैतिक दल युद्ध में भाग लेने के विरुद्ध थे। ब्रिटिश सरकार के इस अन्याय के विरोध में कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने शासन से असहयोग कर त्यागपत्र दे दिए। कांग्रेस ने गांधी जी के नेतृत्व में युद्ध-विरोध का आंदोलन तो आरंभ किया परंतु आंदोलन को 

रूप बदलता रुपया

Posted On November - 13 - 2016 Comments Off on रूप बदलता रुपया
8 नवंबर की वह आधी रात और विदा हो गए 500 और हज़ार के करारे-करारे से दिखने वाले नोट। इतिहास के कूचों-गलियों में खो गए। मगर इनकी अचानक विदाई और विदाई के बाद मचे हंगामे के चलते ये लंबे समय तक याद रखे जाएंगे। अब सरकार ने 500 और 2 हज़ार के नये करेंसी नोट जारी कर दिए हैं। ....

फिर न दिखेगी चिड़िया

Posted On November - 13 - 2016 Comments Off on फिर न दिखेगी चिड़िया
इंसानों की बढ़ती संख्या वन्य जीवों के लिए बेहद घातक साबित हो रही है। आशंका जतायी जा रही है कि दुनिया में वन्य जीवों की संख्या वर्ष 2020 तक दो तिहाई घट जाएगी। वन्य जीवों के मामलों में किये गए एक अध्ययन में कहा गया है कि बढ़ती जनसंख्या के कारण तरह-तरह की मांग बढ़ रही हैं, मसलन-खाद्यान्न, आवास आदि। इन मांगों के कारण वनों ....

7 दिन में उगाओ, पकाओ, खाओ

Posted On November - 13 - 2016 Comments Off on 7 दिन में उगाओ, पकाओ, खाओ
यह बात थोड़ी अजीब तो लग सकती है, लेकिन नामुमकिन नहीं है। क्योंकि प्रयोग सफल रहा है। उसके वैज्ञानिक मानकों की जांच हो रही है। सबकुछ ठीक रहा तो आपको किचन में फल, साग-सब्जी उगाने का मौका मिल सकता है, वह भी बिना खाद-मिट्टी के। ....

केन फर्नीचर फिर फैशन लौटा

Posted On November - 13 - 2016 Comments Off on केन फर्नीचर फिर फैशन लौटा
केन से बना फर्नीचर आजकल मार्किट में इन है। फर्नीचर की दुकानों से लेकर बड़े-बड़े शो रूम में इनका बोलबाला है। लोग भी क्योंकि आजकल इको फ्रेंडली हो रहे हैं और हर पल कुदरत का सामीप्य चाहते हैं, अत: केन से बना फर्नीचर उनकी इस ख्वाहिश को पूरा करने में मददगार साबित हो रहा है। ....

सिक्किम फूड घुल मिल गए सभी स्वाद

Posted On November - 13 - 2016 Comments Off on सिक्किम फूड घुल मिल गए सभी स्वाद
मोमोज भला किसे पसंद नहीं! मोमोज को भले ही हम लोग चाइनीज कुजीन का हिस्सा मानते हों लेकिन सच तो यह है कि मोमोज हमारे देश के उत्तरी-पूर्व राज्यों से चलकर हमारे बीच पहुंचा। ....

फुटवियर भी हैं ड्रेस का हिस्सा

Posted On November - 13 - 2016 Comments Off on फुटवियर भी हैं ड्रेस का हिस्सा
कहने को तो आपने बढ़िया से बढ़िया पोशाक, साथ में मैचिंग गहने पहन लिए, लेकिन अगर आपके जूते आरामदायक नहीं हैं या फिर गंदे, मटमैले दिख रहे हैं तो बस समझ लीजिए, हो गया आपके सारे व्यक्तित्व का कबाड़ा। ....

प्रशंसा से प्रसन्न न होती थीं महाश्वेता

Posted On November - 6 - 2016 Comments Off on प्रशंसा से प्रसन्न न होती थीं महाश्वेता
आखिरी वर्षों में लेखन ही महाश्वेता की आजीविका का एकमात्र साधन रहा, इसलिए उनका पेशेवर लेखिका होना स्वाभाविक था। लेकिन समान निष्ठा से ही उन्होंने लघु पत्रिकाओं में भी लिखा। लघु पत्रिकाओं के लिए उन्होंने संघर्ष भी किया। उन्होंने अपने संपादन में निकलने वाली 'वर्तिका' में छोटे पत्रों की तालिका भी नियमित छापी। ....

लागी घुंघरू से बालपन में लगन…

Posted On November - 6 - 2016 Comments Off on लागी घुंघरू से बालपन में लगन…
संगीत आत्माभिव्यक्ति का बेजोड़ माध्यम है, जो दिल में छिपी भावनाओं को क्रियाशील बनाता है, जीवन में संजीवनी का कार्य करता है। नृत्य और संगीत की इन आंतरिक शक्तियों को कत्थक नृत्यांगना नम्रता राय ने कम उम्र में ही समझ लिया था। ....

परोसें पारसी स्नैक्स

Posted On November - 6 - 2016 Comments Off on परोसें पारसी स्नैक्स
मुंबई की जान हैं पारसी! दक्षिण मुंबई की सड़कों पर निकल जाएं तो पारसी हर जगह दिख जाएंगे। पारसी की संख्या भले ही कम हो रही हो लेकिन इनके खान-पान को चारों ओर पहचान मिल रही है। आज जिस खारी के जायके को लोग चाय के साथ आजमा रहे हैं, वह खारी इन पारसियों की ही देन है। ....
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